UP GST Department Restructuring: यूपी में राज्य कर विभाग का बदलेगा ढांचा, 156 नए पद और पांच नए संभाग बनाने का प्रस्ताव

उत्तर प्रदेश में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू होने के बाद राज्य कर विभाग की जिम्मेदारियों और कार्यक्षेत्र में लगातार विस्तार हुआ है। इसी को देखते हुए अब विभाग के पुराने प्रशासनिक ढांचे में बदलाव की तैयारी की जा रही है। अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त मंच ने राज्य कर विभाग के कैडर पुनर्गठन का प्रस्ताव तैयार कर राज्य कर आयुक्त को भेजा है। इस प्रस्ताव में अधिकारियों के पदों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ नए पदनाम और अतिरिक्त संभाग बनाने की मांग की गई है।

प्रस्ताव के अनुसार विभाग में अधिकारियों के कुल पदों की संख्या मौजूदा लगभग 3012 से बढ़ाकर 3168 करने की मांग की गई है। यानी कुल 156 अतिरिक्त पद सृजित करने का सुझाव दिया गया है। इसके साथ ही राजस्व संग्रह और प्रशासनिक कार्यों को मजबूत करने के लिए फील्ड स्तर पर भी कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है।

जीएसटी लागू होने के बाद बढ़ीं विभाग की जिम्मेदारियां

उत्तर प्रदेश में एक जुलाई 2017 से जीएसटी व्यवस्था लागू हुई थी। इसके बाद राज्य कर विभाग का कार्यक्षेत्र पहले की तुलना में अधिक व्यापक हो गया। पहले विभाग का प्रमुख काम वस्तुओं की बिक्री पर कर वसूली और उससे जुड़े मामलों का निस्तारण करना था, लेकिन जीएसटी व्यवस्था में वस्तुओं के साथ सेवाओं पर भी कर प्रशासन की जिम्मेदारी जुड़ गई।

अब विभाग को अंतरराज्यीय कारोबार, इनपुट टैक्स क्रेडिट, रिफंड, फर्जी फर्मों की पहचान, कर चोरी की जांच और डिजिटल आंकड़ों के आधार पर निगरानी जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य करने पड़ते हैं। इन्हीं बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विभागीय ढांचे को नए सिरे से तैयार करने की मांग की गई है।

अधिकारियों के लिए नए पदनाम का प्रस्ताव

पुनर्गठन प्रस्ताव में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए कई नए पदनाम शामिल करने की मांग की गई है। इनमें चीफ कमिश्नर, स्पेशल कमिश्नर, अपर आयुक्त अपील, अपर आयुक्त ऑडिट, अपर आयुक्त रिसर्च एंड डाटा एनालिसिस और अपर आयुक्त प्रवर्तन जैसे पद शामिल हैं।

इसका उद्देश्य विभाग के अलग-अलग कार्यों के लिए विशेषज्ञ अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करना है। प्रस्ताव के अनुसार अपील, ऑडिट, प्रवर्तन और डाटा विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में अलग-अलग स्तर पर कामकाज को व्यवस्थित किया जा सकेगा।

3012 से बढ़ाकर 3168 पद करने की मांग

प्रस्ताव में अधिकारियों के कुल पदों की संख्या बढ़ाने के साथ विभिन्न ग्रेड पे के पदों में भी बदलाव का सुझाव दिया गया है।

  • 6600 ग्रेड पे वाले उपायुक्त स्तर के पद 496 से बढ़ाकर 572 करने की मांग।
  • 5400 ग्रेड पे वाले पद 964 से बढ़ाकर 1011 करने का प्रस्ताव।
  • 7600 ग्रेड पे वाले पद 157 से बढ़ाकर 235 करने की मांग।
  • 4800 ग्रेड पे वाले पद 1275 से घटाकर 1179 करने का सुझाव।
  • 8700 ग्रेड पे वाले पद 77 से बढ़ाकर 88 करने का प्रस्ताव।
  • 8900 ग्रेड पे वाले पद 21 से बढ़ाकर 56 करने की मांग।
  • 10 हजार ग्रेड पे वाले पद 22 से बढ़ाकर 27 करने का प्रस्ताव।

ये सभी आंकड़े प्रस्तावित ढांचे से संबंधित हैं। इन पर अंतिम निर्णय संबंधित सरकारी स्तर पर होना बाकी है।

प्रदेश में पांच नए संभाग बनाने की मांग

विभागीय पुनर्गठन प्रस्ताव में मौजूदा 20 जोन को बरकरार रखते हुए संभागों की संख्या 45 से बढ़ाकर 50 करने की मांग की गई है। इसके लिए प्रदेश के चार शहरों में पांच नए संभाग बनाने का सुझाव दिया गया है।

प्रस्ताव के तहत गौतमबुद्धनगर में एक, लखनऊ में दो, बस्ती में एक और शाहजहांपुर में एक नया संभाग बनाने की मांग शामिल है।

इसके अतिरिक्त 20 जोन में प्रशासनिक कामकाज के लिए 20 उपायुक्त प्रशासन और प्रदेश के 55 जिलों में 55 सहायक आयुक्त प्रशासन के पदों की आवश्यकता बताई गई है।

राजस्व संग्रह मजबूत करने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की मांग

राज्य कर विभाग के कामकाज में राजस्व संग्रह की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसी को देखते हुए प्रस्ताव में खंड स्तर पर कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की मांग की गई है।

इसके तहत 451 संग्रह अमीन, 113 संग्रह पर्यवेक्षक और 40 संग्रह अधीक्षक के पद सृजित करने का सुझाव दिया गया है।

प्रस्ताव तैयार करने वाले संगठन का मानना है कि करदाताओं की बढ़ती संख्या और राजस्व संग्रह के लक्ष्यों को देखते हुए फील्ड स्तर पर पर्याप्त अधिकारी-कर्मचारियों की तैनाती जरूरी है। इससे विभागीय कार्यों और राजस्व वसूली से जुड़ी गतिविधियों को बेहतर ढंग से संचालित करने में मदद मिल सकती है।

क्या कर्मचारियों और करदाताओं पर पड़ेगा असर?

यदि प्रस्ताव को स्वीकृति मिलती है तो राज्य कर विभाग में प्रशासनिक जिम्मेदारियों का

नए सिरे से बंटवारा हो सकता है। अपील, ऑडिट, प्रवर्तन और डाटा विश्लेषण जैसे कार्यों के लिए

अलग विशेषज्ञ पद बनने से विभागीय कामकाज में बदलाव संभव है।

वहीं नए संभाग और अतिरिक्त फील्ड कर्मचारियों की तैनाती से जिलों और स्थानीय

कार्यालयों में प्रशासनिक क्षमता बढ़ सकती है। इसका असर करदाताओं की समस्याओं के निस्तारण,

जांच प्रक्रिया और राजस्व संग्रह पर भी पड़ सकता है।

हालांकि, प्रस्ताव लागू होने की स्थिति में ही इसके वास्तविक परिणाम स्पष्ट होंगे।

फिलहाल विभागीय पुनर्गठन से संबंधित मांग और सुझाव संबंधित अधिकारियों के सामने रखे गए हैं।

निष्कर्ष

जीएसटी व्यवस्था के बाद उत्तर प्रदेश राज्य कर विभाग के कार्यों में आए विस्तार को देखते हुए

कैडर पुनर्गठन की मांग सामने आई है। प्रस्ताव में 156 अतिरिक्त पद, नए वरिष्ठ पदनाम, पांच नए संभाग और

राजस्व संग्रह के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती जैसे महत्वपूर्ण सुझाव शामिल हैं।

अब इस प्रस्ताव पर संबंधित स्तर पर होने वाली कार्रवाई और अंतिम निर्णय पर नजर रहेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. उत्तर प्रदेश राज्य कर विभाग में कितने नए पद बनाने का प्रस्ताव है?

प्रस्ताव में मौजूदा लगभग 3012 पदों को बढ़ाकर 3168 करने की मांग की गई है।

यानी 156 अतिरिक्त पद प्रस्तावित हैं।

2. राज्य कर विभाग में कितने नए संभाग बनाने की मांग की गई है?

प्रदेश में पांच नए संभाग बनाने का प्रस्ताव है।

3. नए संभाग किन शहरों में प्रस्तावित हैं?

गौतमबुद्धनगर में एक, लखनऊ में दो, बस्ती में एक और शाहजहांपुर में एक संभाग बनाने की मांग की गई है।

4. क्या विभागीय पुनर्गठन को मंजूरी मिल गई है?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त मंच की ओर से भेजा गया प्रस्ताव है।

इसे अंतिम सरकारी मंजूरी नहीं माना जा सकता।

5. विभागीय पुनर्गठन की जरूरत क्यों बताई गई है?

जीएसटी लागू होने के बाद वस्तुओं के साथ सेवाओं पर कर प्रशासन, इनपुट टैक्स क्रेडिट, रिफंड,

फर्जी फर्मों की जांच और डाटा आधारित निगरानी जैसी जिम्मेदारियां बढ़ी हैं।

इसी के अनुरूप विभागीय ढांचे में बदलाव की मांग की गई है।

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