उत्तर प्रदेश सरकार ने पुच एआई
उत्तर प्रदेश सरकार ने बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप कंपनी पुच एआई (Puch AI) के साथ साइन किए गए 25,000 करोड़ रुपये के भव्य निवेश समझौते को मात्र चार दिनों में रद्द कर दिया है। 23 मार्च 2026 को साइन हुए इस एमओयू को इन्वेस्ट यूपी ने 27 मार्च 2026 को आधिकारिक रूप से निरस्त घोषित कर दिया। सरकार का कहना है कि विस्तृत समीक्षा में कंपनी की नेटवर्थ पर्याप्त नहीं पाई गई और प्रस्तावित परियोजना के अनुरूप उसके वित्तीय स्रोत विश्वसनीय नहीं मिले।
क्या था पुच एआई के साथ एमओयू?
पुच एआई एक नई कंपनी है, जो मात्र डेढ़ साल पहले शुरू हुई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में साइन हुए इस एमओयू में कंपनी ने यूपी में बड़े स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का दावा किया था। प्रस्ताव में शामिल थे:
- एआई पार्क्स का विकास
- बड़े डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर
- एआई कॉमन्स प्लेटफॉर्म
- एक एआई यूनिवर्सिटी की स्थापना
कंपनी का दावा था कि यह निवेश उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख एआई हब बनाने में मदद करेगा। शुरुआत में इस समझौते को राज्य की डिजिटल और टेक्नोलॉजी सेक्टर में बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा गया, लेकिन जल्द ही सोशल मीडिया और विपक्षी दलों ने कंपनी की वित्तीय क्षमता पर सवाल उठा दिए।
क्यों रद्द हुआ एमओयू?
इन्वेस्ट यूपी द्वारा जारी आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया कि राज्य सरकार के निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत एमओयू की समीक्षा की गई। इस दौरान कंपनी से जरूरी दस्तावेज और वित्तीय सूचनाएं मांगी गईं, लेकिन कंपनी समय पर इन्हें उपलब्ध नहीं करा सकी।
ड्यू डिलिजेंस प्रक्रिया में सामने आया कि:
- कंपनी की नेटवर्थ प्रस्तावित 25,000 करोड़ रुपये की परियोजना के मुकाबले बहुत कम थी (कुछ रिपोर्ट्स में कंपनी की पूंजी मात्र 43 लाख रुपये बताई गई)।
- वित्तीय स्रोत और फंडिंग लिंकेज विश्वसनीय नहीं पाए गए।
- कंपनी समय पर आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं करा पाई।
इन्वेस्ट यूपी ने बयान में कहा, “एमओयू रद्द होने के साथ ही अब दोनों पक्षों के बीच किसी प्रकार के अधिकार या दायित्व शेष नहीं रहेंगे।” सरकार ने यह फैसला पारदर्शिता और शासन में उच्चतम स्तर की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए लिया है।
विपक्ष और सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया
एमओयू साइन होते ही सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई। कई यूजर्स और विपक्षी नेताओं ने पूछा कि मात्र डेढ़ साल पुरानी और छोटी पूंजी वाली कंपनी 25,000 करोड़ रुपये का निवेश कैसे कर पाएगी? कुछ ने इसे “कागजी निवेश” या “फर्जी एमओयू” तक बताया। इस हंगामे के बाद सरकार ने तेजी से कार्रवाई की और एमओयू रद्द कर दिया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले स्पष्ट किया था कि एमओयू प्रारंभिक और गैर-बाध्यकारी है, जिसके बाद पूरी
ड्यू डिलिजेंस होती है। अब रद्द करने के फैसले को सरकार की
सख्ती और जवाबदेही के रूप में देखा जा रहा है।
यूपी सरकार का भविष्य का रुख
इन्वेस्ट यूपी ने संकेत दिया है कि भविष्य में ऐसे बड़े निवेश प्रस्तावों के लिए और सख्त नियम बनाए जाएंगे।
राज्य सरकार निवेश को बढ़ावा देने के साथ-साथ पारदर्शिता और वास्तविक वित्तीय क्षमता सुनिश्चित करना चाहती है।
यूपी में आईटी और एआई सेक्टर में निवेश आकर्षित करने की कोशिशें जारी हैं,
लेकिन हर प्रस्ताव की गहन जांच अनिवार्य होगी।
यह घटना निवेश प्रक्रिया में ड्यू डिलिजेंस की अहमियत को रेखांकित करती है। बड़े दावों वाले प्रस्तावों को
सिर्फ घोषणा तक सीमित नहीं रखा जा सकता; उन्हें ठोस वित्तीय आधार पर खरा उतरना जरूरी है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने पुच एआई के साथ 25,000 करोड़ रुपये के
एमओयू को रद्द करके यह संदेश दिया है कि राज्य में
निवेश स्वागत योग्य है, लेकिन वह विश्वसनीय, पारदर्शी और वित्तीय रूप से मजबूत होना चाहिए।
यह फैसला न सिर्फ सरकार की सतर्कता दिखाता है,
बल्कि भविष्य के निवेशकों के लिए भी एक उदाहरण बन गया है।
