जेल में मिलने पहुंचा परिवार
रामपुर, 4 दिसंबर 2025: उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले की जेल में बंद समाजवादी पार्टी (सपा) के कद्दावर नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान ने बुधवार को परिवार के सदस्यों से मिलने से साफ इनकार कर दिया। परिवार के सदस्यों ने जेल पहुंचकर मुलाकात का प्रयास किया, लेकिन दोनों ने मिलने से मना कर दिया। इस घटना ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। रामपुर कारागार प्रशासन ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है, जिससे कई सवाल खड़े हो गए हैं। क्या यह राजनीतिक दबाव है या व्यक्तिगत फैसला? आइए जानते हैं पूरी कहानी।
रामपुर जेल में आजम खान और अब्दुल्ला का इनकार: परिवार का दर्द
रामपुर जेल के बाहर बुधवार दोपहर करीब 2 बजे आजम खान के परिवार के सदस्य पहुंचे। इसमें उनकी पत्नी तंजीन फातिमा, भाई जूबैर खान और अन्य रिश्तेदार शामिल थे। जेल नियमों के अनुसार हफ्ते में दो बार मुलाकात की अनुमति होती है, लेकिन जब परिवार ने आवेदन किया तो अंदर से संदेश आया कि आजम खान और अब्दुल्ला मिलना नहीं चाहते। तंजीन फातिमा ने रोते हुए कहा, “हमने जेल के बाहर घंटों इंतजार किया। अंदर से कोई वजह भी नहीं बताई गई। ये क्या हो रहा है हमारे साथ?” परिवार का आरोप है कि जेल प्रशासन ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया और चुपचाप चले गए।
सपा कार्यकर्ताओं ने इसे “राजनीतिक साजिश” करार दिया। रामपुर से सपा नेता शाहिद अख्तर ने कहा, “आजम साहब और अब्दुल्ला को तोड़ने की कोशिश हो रही है। पहले जेल में शिफ्टिंग, अब मुलाकात बंद। ये BJP की चाल है।”
दो पैन कार्ड मामले में सजा: जेल की जिंदगी और पुराने मामले
आजम खान (76 वर्ष) और अब्दुल्ला आजम खान (31 वर्ष) को नवंबर 2025 में दोहरे पैन कार्ड मामले में 7-7 वर्ष की सजा सुनाई गई। विशेष एमपी-MLA कोर्ट ने फैसला सुनाया कि अब्दुल्ला के नाम पर दो पैन कार्ड बनाए गए थे, जो धोखाधड़ी का मामला है। इस सजा के बाद दोनों को रामपुर जेल भेज दिया गया। आजम खान पर कुल 70 से ज्यादा मुकदमे चल रहे हैं, जिनमें जमीन हड़पने, जन्म प्रमाण पत्र फर्जीवाड़ा और अमर सिंह पर टिप्पणी जैसे मामले शामिल हैं।
सितंबर 2025 में आजम खान को क्वालिटी बार जमीन अतिक्रमण मामले में जमानत मिली थी और वे सीतापुर जेल से रिहा हुए थे। लेकिन नवंबर में दोबारा गिरफ्तार कर रामपुर भेज दिया गया। अब्दुल्ला को फरवरी 2025 में हरदोई जेल से रिहा किया गया था, लेकिन अब फिर सलाखों के पीछे हैं। सपा का दावा है कि ये सभी केस राजनीतिक प्रतिशोध हैं।
इनकार की वजह: राजनीतिक दबाव या व्यक्तिगत फैसला?
पुलिस और जेल सूत्रों के अनुसार, आजम खान ने जेल के अंदर संदेश भेजा कि “अभी मुलाकात नहीं, परिवार को परेशान न करें।” लेकिन वजह स्पष्ट नहीं है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि आजम खान जेल में अकेले रहना चाहते हैं ताकि सियासी रणनीति बना सकें। वहीं, परिवार का कहना है कि दबाव में ऐसा किया गया। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर ट्वीट किया, “आजम साहब का परिवार सबसे ज्यादा प्रताड़ित हो रहा है। जेल प्रशासन चुप क्यों है? ये लोकतंत्र की हत्या है।
” अखिलेश ने अक्टूबर 2025 में आजम से मुलाकात की थी और कहा था कि 2027 चुनाव में सब ठीक हो जाएगा।
जेल में मुलाकात न करने के पुराने उदाहरण भी हैं। 2023 में सीतापुर जेल में आजम
ने कांग्रेस नेता अजय राय से मिलने से इनकार किया था, वजह बताई गई मुलाकात की सीमा।
लेकिन यहां परिवार से इनकार सवालों का पुलिंदा बांध रहा है।
कारागार प्रशासन की चुप्पी: सवालों का घेरा
रामपुर जेल अधीक्षक ने जब पत्रकारों से बात की तो सिर्फ इतना कहा, “मुलाकात का फैसला कैदी का होता है।
प्रशासन कुछ नहीं कह सकता।” लेकिन जेल नियमों के मुताबिक
, इनकार की वजह दर्ज होनी चाहिए।
विपक्ष ने इसे “अमानवीय” बताया।
सपा ने रामपुर एसएसपी से शिकायत की है और हाईकोर्ट जाने की चेतावनी दी।
आजम खान ने जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कई बार कहा है
कि “मेरा परिवार सुरक्षित रखें, लेकिन साजिश बंद करें।”
सियासी संदेश: 2027 चुनाव से पहले संकेत
यह घटना 2027 यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सपा के लिए झटका है।
आजम खान रामपुर-मुरादाबाद सीटों पर मुस्लिम वोट बैंक के सूत्रधार हैं। अखिलेश यादव ने कहा
, “आजम साहब की आवाज दबाई नहीं जा सकती।
” BJP ने चुप्पी साधी है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि ये केस मजबूत करने की कवायद है।