UP: सपा से निष्कासित विधायक
उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों फिर से हलचल है। सपा से निष्कासित विधायक पूजा पाल — जिन्होंने पिछले कुछ समय से कई विवादित बयान दिए थे — ने हाल ही में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान उन्होंने उनके पैर छुकर आशीर्वाद लिया, जिससे भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज हो गईं। हालांकि, जब उनसे यह सवाल पूछा गया कि क्या वे भाजपा में शामिल होंगी, तो उन्होंने इसका चौंकाने वाला जवाब दिया। आइए जानें पूरी कहानी, हालात और राजनीति के मायने।
📰 मामला कैसे शुरू हुआ — थोड़ा बैकग्राउंड
- पूजा पाल, जो कि उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले की चायल विधानसभा सीट से विधायक रहीं, कुछ ही महीने पहले Samajwadi Party (सपा) से निष्कासित हो गई थीं। कारण — पार्टी अनुशासन का उल्लंघन और “एंटी-पार्टी गतिविधियाँ”।
- उनका निष्कासन उस समय हुआ, जब उन्होंने विधानसभा में खुलकर राज्य सरकार की अपराध-रोधी नीतियों की प्रशंसा की थी, विशेष रूप से उस वक्त जब उनके पति की हत्या के लिए जिम्मेदार व्यक्ति — Atiq Ahmed — को पुलिस कार्रवाई में मारा गया था।
- निष्कासन के बाद उन्होंने खुद कहा था कि वे जल्दबाज़ी में किसी पार्टी को नहीं Joining करेंगी, और अपना अगला कदम समाज, समुदाय व विचारधारा को ध्यान में रखते हुए तय करेंगी।
🤝 मुलाकात और पैर छूने की घटना — अब क्या हुआ?
हाल ही में — 5 दिसंबर 2025 — पूजा पाल ने प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात की। इस मुलाकात में उन्होंने मौर्य के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
इस साधारण-सी मुलाकात और इस प्रकार संबंध दिखाने के कारण मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई कि शायद पूजा पाल अब Bharatiya Janata Party (भाजपा) में शामिल होने की तैयारी कर रही हैं।
❓ भाजपा में शामिल होने पर पूछा गया सवाल — पूजा ने क्या कहा?
जब पत्रकारों ने उनसे भाजपा में शामिल होने के अवसर पर प्रतिक्रिया मांगी — यानी, “क्या अब आप भाजपा में शामिल होंगी?” — तो पूजा पाल ने साफ़ कहा कि अभी उन्होंने किसी भी पार्टी से जुड़ने का फैसला नहीं किया है।
उन्होंने कहा कि वे अपने समुदाय और अपने मतदाताओं से बातचीत कर फैसला करेंगी।
उनका कहना है कि राजनीति केवल पार्टियों से जुड़ने का नाम नहीं है
— विचारधारा, जनता की उम्मीदें, उनके मत और भरोसे को देखते हुए आगे का कदम तय करेंगे।
⚠️ क्या यह सिर्फ राजनीति है — या कुछ और संदेश?
- इस मुलाकात और पैर छूने की घटना ने राजनीतिक समीकरणों में हलचल पैदा कर दी है।
- कई लोग इसे सियासी रुख के बदलाव की शुरुआत बता रहे हैं।
- वहीं, पूजा पाल द्वारा अभी पार्टी न बदलने की बात कहने से यह स्पष्ट हो गया है
- कि वे जल्दबाज़ी नहीं करना चाहतीं।
- वह जनता और समुदाय की भावना को भी महत्व दे रही हैं।
- इस बीच, कई राजनीतिक विश्लेषक इसे एक रणनीतिक कदम बता रहे है
- क्योंकि निष्कासित विधायक होने के नाते, अगला कदम सोच-समझ कर उठाना अनिवार्य है।
📰 क्या आगे हो सकता है — संभावित राजनीतिक परिदृश्य
- यदि पूजा पाल भाजपा में शामिल होती हैं, तो इससे उत्तर प्रदेश की राजनीति में दल-बदल
- और राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव हो सकता है।
- दूसरी ओर, यदि वे स्वतंत्र (Independent) बनी रहती हैं या किसी तीसरे विकल्प का चयन करती हैं
- तो भी उनका निर्णय स्थानीय राजनीति को हिला सकता है।
- साथ ही, उनकी सक्रियता और सार्वजनिक प्रतिक्रियाएँ — जैसे अपराध और न्याय के मुद्दों पर —
- उन्हें एक अलग पहचान दे रही हैं, जिसे कई पॉलिटिकल दल ध्यान से देखेंगे।