प्रयागराज के नेबुआ नौरंगिया ब्लॉक
प्रयागराज जिले के नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के रायपुर खुर्द गांव में बृहस्पतिवार देर रात एक बड़ी वारदात ने प्रशासनिक मशीनरी को हिला दिया। नेबुआ नौरंगिया ब्लॉक के बीडीओ के घर के बाहर खड़ी उनकी निजी कार और विभाग की ओर से आवंटित सरकारी वाहन में अज्ञात अराजक तत्वों ने आग लगा दी। आग की लपटें और शोर सुनकर बीडीओ घर से बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन दरवाजा बाहर से बंद पाया गया। किसी तरह उन्होंने खुद को सुरक्षित निकाला।
घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस को देखते ही बीडीओ ने गुस्से और डर के मिश्रित भाव से कहा, “आज मनबढ़ों ने गाड़ी में आग लगाई है, कल मुझे भी जला देंगे। ऐसे माहौल में यहां ड्यूटी करना मेरे बस का नहीं है।” बीडीओ ने स्पष्ट रूप से डर जताया कि उनकी जान को खतरा है और वे इस ब्लॉक में काम नहीं कर पाएंगे।
ब्लॉक प्रमुख के समझाने पर दी तहरीर, फिर चले गए गांव
बीडीओ के इस बयान से मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी सकते में आ गए। ब्लॉक प्रमुख शेषनाथ यादव ने बीडीओ को समझाया और ढांढस बंधाया। काफी मिन्नतों के बाद बीडीओ ने पुलिस को तहरीर दी। तहरीर में उन्होंने वाहनों में आग लगाने की घटना का जिक्र किया और सुरक्षा की मांग की। तहरीर देने के बाद बीडीओ अपने मूल गांव प्रयागराज चले गए।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों जली हुई गाड़ियों का पंचनामा किया। फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया है ताकि आग लगाने के तरीके और सबूत जुटाए जा सकें। प्रारंभिक जांच में लगता है कि यह सुनियोजित हमला था। अराजक तत्वों ने रात के अंधेरे का फायदा उठाकर दरवाजा बाहर से बंद किया और वाहनों में आग लगा दी।
घटना से प्रशासन में हड़कंप, जांच शुरू
यह घटना प्रशासनिक अधिकारियों के बीच चिंता का विषय बन गई है। बीडीओ जैसे फील्ड अधिकारी ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए जिम्मेदार होते हैं,
लेकिन अगर उन्हें ही जान का खतरा महसूस हो तो कामकाज प्रभावित होगा।
पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया है और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
बीडीओ ने तहरीर में बताया कि हाल के दिनों में कुछ स्थानीय लोगों से उनके विवाद चल रहे थे,
जो विकास कार्यों या किसी अन्य मुद्दे को लेकर नाराज थे। संभवतः इसी रंजिश की वजह से यह वारदात हुई।
पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान दर्ज करने शुरू कर दिए हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती चुनौतियां
प्रयागराज जैसे जिले में ग्रामीण विकास अधिकारियों पर हमले की यह कोई पहली घटना नहीं है। पहले भी कई बीडीओ,
पटवारी और अन्य अधिकारी स्थानीय गुंडों या असंतुष्ट पक्षों से धमकियां झेल चुके हैं।
इस घटना ने एक बार फिर सवाल उठाया है कि फील्ड में तैनात अधिकारियों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए।
प्रशासन का कहना है कि बीडीओ की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त
बल तैनात किया जाएगा और जांच जल्द पूरी की जाएगी।
फिलहाल बीडीओ अपने गांव में हैं और स्थिति सामान्य होने पर ही वापस लौटने की बात कही है।
यह घटना ग्रामीण प्रशासन की चुनौतियों को उजागर करती है, जहां विकास कार्यों के साथ-साथ
व्यक्तिगत सुरक्षा भी एक बड़ी समस्या बन गई है।