उत्तर प्रदेश एटीएस
उत्तर प्रदेश में एक बड़े आतंकी नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। जांच में सामने आया है कि मेरठ का रहने वाला आकिब दुबई में बैठकर भारत में आतंकी मॉड्यूल ऑपरेट कर रहा है। यह नेटवर्क सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को जोड़कर देश में बड़ी वारदातों को अंजाम देने की साजिश रच रहा था।
कैसे खुला आतंकी साजिश का राज
एटीएस की जांच में पता चला कि आरोपी साकिब को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे इंस्टाग्राम और टेलीग्राम के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर्स से जोड़ा गया था। इस कनेक्शन की कड़ी मेरठ के आकिब तक पहुंची, जो दुबई में बैठकर पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, साकिब हैंडलर्स से सीधे संपर्क में था और उन्हें संवेदनशील जानकारियां उपलब्ध करा रहा था।
एफआईआर में आकिब का नाम शामिल
एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश के अनुसार, इस पूरे मामले में आकिब की भूमिका बेहद अहम है।
- आकिब का नाम एफआईआर में दर्ज किया गया है
- वह लंबे समय से दुबई में रह रहा है
- सोशल मीडिया के जरिए भारत में युवाओं को जोड़ रहा था
अब सुरक्षा एजेंसियां उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी कर रही हैं।
मॉड्यूल तैयार करने की जिम्मेदारी
सूत्रों के अनुसार, आकिब को पाकिस्तान के बड़े हैंडलर्स ने भारत में आतंकी मॉड्यूल तैयार करने की जिम्मेदारी दी थी।
- वह अलग-अलग लोगों को जोड़कर नेटवर्क बना रहा था
- युवाओं को देश विरोधी गतिविधियों के लिए उकसा रहा था
- कई मॉड्यूल पहले से सक्रिय होने की आशंका है
एटीएस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हैं और वे देश के किन-किन हिस्सों में सक्रिय हैं।
सोशल मीडिया बना बड़ा हथियार
इस मामले में सबसे चिंताजनक बात यह है कि आतंकियों ने सोशल मीडिया को अपना मुख्य हथियार बना लिया है। इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर युवाओं को फंसाया जा रहा है और उन्हें कट्टरपंथ की ओर धकेला जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई
एटीएस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां लगातार इस नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुटी हैं।
- संदिग्धों से पूछताछ जारी है
- डिजिटल सबूतों की जांच हो रही है
- आकिब के नेटवर्क की पूरी मैपिंग की जा रही है
एजेंसियों का दावा है कि जल्द ही इस पूरे नेटवर्क का बड़ा खुलासा किया जाएगा।
समाज और युवाओं के लिए चेतावनी
यह मामला इस बात का संकेत है कि कैसे सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल कर युवाओं को गुमराह किया जा सकता है। जरूरत है सतर्क रहने की और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत जानकारी पुलिस या संबंधित एजेंसियों को देने की।
