उत्तर प्रदेश में आठवें वेतन
आठवें वेतन आयोग में पुराने पेंशनर्स की उपेक्षा: उत्तर प्रदेश में आंदोलन का ऐलान
उत्तर प्रदेश में आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर पेंशनर्स में भारी नाराजगी है। कलेक्ट्रेट स्थित कोषागार हॉल में पेंशनर्स ने एकत्र होकर पुराने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को आयोग के दायरे से बाहर रखने का विरोध किया। उन्होंने आंदोलन का एलान करते हुए चेतावनी दी कि यदि न्याय नहीं मिला तो वे कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और जरूरत पड़ने पर वोट की ताकत से भी जवाब देंगे। यह मामला केंद्र सरकार द्वारा आठवें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) में पेंशन रिवीजन को स्पष्ट रूप से बाहर रखने से जुड़ा है, जिससे लाखों पुराने पेंशनर्स प्रभावित हो रहे हैं।
क्यों है पेंशनर्स में इतनी नाराजगी?
आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें मुख्य रूप से वर्तमान कर्मचारियों और भविष्य के रिटायर्ड कर्मचारियों पर केंद्रित मानी जा रही हैं। केंद्र सरकार के नवंबर 2025 में जारी ToR में पेंशन रिवीजन और पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) से जुड़े मुद्दों को स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया। इसमें “unfunded cost of non-contributory pension schemes” जैसी शर्तें जोड़ी गई हैं, जिसे पेंशनर्स भेदभावपूर्ण मान रहे हैं। उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में पेंशनर्स का आरोप है कि दिसंबर 2025 तक सेवानिवृत्त कर्मचारियों को आयोग के लाभ से वंचित किया जा रहा है। यह अन्याय है, क्योंकि पिछले वेतन आयोगों (5वें, 6वें, 7वें) में पेंशन रिवीजन शामिल होता था।
कोषागार हॉल में प्रदर्शन और चेतावनी
कलेक्ट्रेट कोषागार हॉल में आयोजित बैठक में पेंशनर्स ने जोरदार नारेबाजी की और ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि आठवें वेतन आयोग में पुराने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बाहर रखना सरासर भेदभाव है। यदि मांगें नहीं मानी गईं तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे, कोर्ट में याचिका दायर करेंगे और चुनाव में वोट की ताकत दिखाएंगे। पेंशनर्स का कहना है कि महंगाई से जूझते बुजुर्गों की पेंशन में संशोधन जरूरी है, लेकिन सरकार इसे नजरअंदाज कर रही है। यह प्रदर्शन उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में चल रहे विरोध का हिस्सा है, जहां पेंशनर्स संगठन एकजुट हो रहे हैं।
आठवें वेतन आयोग का बैकग्राउंड और प्रभाव
आठवां केंद्रीय वेतन आयोग 2026 से लागू होने की उम्मीद है, जो करीब 50 लाख कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स को प्रभावित करेगा। लेकिन ToR में पेंशन रिवीजन को बाहर रखने से पुराने रिटायर्ड कर्मचारियों में असंतोष बढ़ा है। पेंशनर्स संगठन जैसे भारत पेंशनर्स समाज (BPS) ने सरकार से ToR में संशोधन की मांग की है। उत्तर प्रदेश में यह मुद्दा और गर्म है
क्योंकि राज्य सरकार भी केंद्रीय पैटर्न पर पेंशन तय करती है।
यदि पुराने पेंशनर्स को लाभ नहीं मिला तो उनकी आर्थिक स्थिति और कमजोर होगी।
आगे क्या होगा?
पेंशनर्स ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे शांतिपूर्ण आंदोलन से लेकर कानूनी और राजनीतिक कदम उठाएंगे।
केंद्र सरकार से ToR में बदलाव और पेंशन रिवीजन शामिल करने की
मांग तेज हो रही है। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो
उत्तर प्रदेश सहित देशभर में बड़े प्रदर्शन हो सकते हैं।
यह मामला लाखों बुजुर्गों की गरिमा और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा है।
पेंशनर्स न्याय की उम्मीद में हैं और सरकार पर दबाव बढ़ा रहे हैं।
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