बांग्लादेशी रिटायर्ड
बांग्लादेश के रिटायर्ड ब्रिगेडियर जनरल अब्दुल्लाहिल अमान आजमी ने एक बार फिर भारत के खिलाफ जहर उगला है। एक वायरल वीडियो में उन्होंने साफ कहा, “जब तक भारत के टुकड़े-टुकड़े नहीं हो जाते, बांग्लादेश में संपूर्ण शांति स्थापित नहीं हो सकती।” उनका दावा है कि भारत बांग्लादेश को कयामत तक शांतिपूर्वक नहीं रहने देगा। यह बयान न केवल भारत को धमकी देता है, बल्कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर की ‘ब्लीड इंडिया विद अ थाउसैंड कट्स’ रणनीति से प्रेरित लगता है। आजमी के ये ‘सपने’ दक्षिण एशिया की शांति के लिए खतरा बन चुके हैं, खासकर जब बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद अस्थिरता का दौर चल रहा है।
आजमी का भारत-विरोधी बयान: मुख्य दावे
*आजमी ने वीडियो में भारत पर कई गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि भारत बांग्लादेश की मीडिया, सांस्कृतिक दुनिया और बुद्धिजीवियों के संसार में हर जगह दखल देता है। पानी के मुद्दों पर अड़चनें पैदा करता है, बांग्लादेशी लोगों को मारता है और व्यापारिक असमानता थोपता है। “इन सब को छोड़ भी दें, समस्या और बड़ी है,” उन्होंने कहा। यह बयान भारत को बांग्लादेश की आंतरिक शांति का दुश्मन बताता है, जो न केवल अतिशयोक्ति है, बल्कि क्षेत्रीय तनाव को बढ़ावा देने वाला है।
आजमी का यह रुख नया नहीं है। सितंबर 2024 में उन्होंने दावा किया था कि 1971 के युद्ध में भारत ने बांग्लादेश पर अपना राष्ट्रगान थोपा था, जो बंगाल विभाजन का प्रतीक है और स्वतंत्र बांग्लादेश के खिलाफ है। उन्होंने पाकिस्तान के अत्याचारों की संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर बताने का भी आरोप लगाया। शेख मुजीब के पतन के बाद भारत पर इल्जाम लगाया कि उसने विरोधियों को आश्रय, हथियार और प्रशिक्षण देकर साजिश रची। 1975 से 1996 तक चटगांव पहाड़ी क्षेत्रों में भारत की कथित साजिशों का जिक्र करते हुए, उन्होंने 1997 के शांति समझौते को ‘दिखावा’ बताया।
आसिम मुनीर से तुलना: समान ‘सपने’
आजमी की टिप्पणियां पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर से मिलती-जुलती हैं। मुनीर की रणनीति भारत को सीधी जंग के बजाय प्रॉक्सी युद्ध, आतंकवाद, अलगाववाद और आंतरिक अस्थिरता से ‘हजार कटों’ से खून बहाने की है। इसका मकसद भारत को आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से टुकड़ों में बांटना है। आजमी भी यही ‘खतरनाक सपना’ देख रहे हैं – भारत के विघटन को बांग्लादेश की शांति से जोड़कर। दोनों की सोच दक्षिण एशिया में अस्थिरता फैलाने वाली है, जहां भारत क्षेत्र का स्थिर स्तंभ है। मुनीर की तरह आजमी भी ऐतिहासिक घावों को कुरेदकर नफरत भड़का रहे हैं।
पृष्ठभूमि: आजमी कौन हैं?
अब्दुल्लाहिल अमान आजमी जमात-ए-इस्लामी के पूर्व नेता गुलाम आजम के बेटे हैं। उनके पिता को 1971 के युद्ध में हिंदुओं और आजादी समर्थकों के नरसंहार का दोषी ठहराया गया था। शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद आजमी सक्रिय हो गए।
उन्होंने बांग्लादेश के राष्ट्रगान और संविधान बदलने की मांग की
, जो भारत-विरोधी ताकतों को मजबूत करने का प्रयास लगता है।
वर्तमान बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के नेतृत्व में बदलाव आया है
, लेकिन ऐसे बयान सीमा पर तनाव बढ़ा सकते हैं।
प्रतिक्रियाएं और प्रभाव
इस बयान पर भारत में आक्रोश है। सोशल मीडिया पर लोग इसे ‘देशद्रोही सोच’ बता रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है
कि यह बांग्लादेश में उभरती कट्टरपंथी ताकतों का संकेत है
, जो भारत के खिलाफ प्रचार से लाभ उठा रही हैं।
भारत ने हाल ही में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को वापस भेजा है
, और पीएम मोदी के संदेशों से संबंध सुधारने की कोशिश हो रही है।
लेकिन हसीना के प्रत्यर्पण जैसे मुद्दे लटके हैं।