बांग्लादेश चुनाव
बांग्लादेश में आज (12 फरवरी 2026) को आम चुनाव कराए जा रहे हैं। बांग्लादेश का ये चुनाव बिल्कुल अलग परिदृश्य में कराया जा रहा है। जहां देश पर दो दशक तक शासन करने वाली शेख हसीना अब अपदस्थ होकर भारत में निर्वासित हैं तो वहीं उनकी पार्टी आवामी लीग को बांग्लादेश में चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया गया है। उनके अलावा बांग्लादेश की राजनीति का दूसरा अहम चेहरा- खालिदा जिया का भी कुछ दिन पहले निधन हो गया। इस बार चुनाव में उनकी पार्टी की कमान उनके बेटे तारिक रहमान संभाल रहे हैं। वहीं, कुछ और नए दलों की राजनीति में एंट्री हुई है। यानी बांग्लादेश के लिए अब आगे की राजनीति भी कुछ नए चेहरों के नेतृत्व में होगी।
बांग्लादेश में मौजूदा परिदृश्य कैसा है?
*बांग्लादेश में 2024 के छात्र-आंदोलन के बाद शेख हसीना की सरकार गिर गई थी, जिसके बाद मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी। यह चुनाव 18 महीनों की अस्थिरता के बाद हो रहा है, जहां अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और लोकतंत्र की बहाली मुख्य मुद्दे हैं। देश में 12.77 करोड़ मतदाता हैं, जिसमें 1.83 करोड़ युवा पहली बार वोट डालेंगे। चुनाव के साथ एक राष्ट्रीय जनमत संग्रह भी हो रहा है, जिसमें संवैधानिक सुधारों पर वोटिंग होगी। सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं, लेकिन BNP और जमात-ए-इस्लामी समर्थकों के बीच झड़पें रिपोर्ट हुई हैं।
यहां चुनावी ढांचा कैसा है?
बांग्लादेश की संसद (जातीय संसद) में 350 सीटें हैं, जिसमें 300 प्रत्यक्ष निर्वाचित और 50 महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। मतदान सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक होता है। चुनाव आयोग ने 42,779 मतदान केंद्र बनाए हैं। यह चुनाव ‘फर्स्ट पास्ट द पोस्ट’ सिस्टम पर आधारित है। अंतरिम सरकार ने निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सुधार किए हैं, लेकिन वोटर फ्रॉड के आरोप लग रहे हैं।
यहां कितने राजनीतिक दल हैं और कितने चुनाव लड़ रहे हैं?
बांग्लादेश में 51 से ज्यादा पंजीकृत राजनीतिक दल हैं, लेकिन इस चुनाव में करीब 1981 उम्मीदवार मैदान में हैं। मुख्य रूप से 44 दल चुनाव लड़ रहे हैं। नए दलों में छात्र-आंदोलन से निकली नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) शामिल है, जो जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन में है।
इनमें प्रमुख पार्टियां कौन सी हैं?
प्रमुख पार्टियां हैं- बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP), जिसकी कमान तारिक रहमान के हाथ में है। जमात-ए-इस्लामी, जो 11 दलों के गठबंधन का नेतृत्व कर रही है। आवामी लीग प्रतिबंधित है। BNP अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर फोकस कर रही है, जबकि जमात इस्लामी कानून पर आधारित समाज की वकालत करती है।
बांग्लादेश में बीते चुनावों के क्या नतीजे रहे थे?
2024 के चुनाव में आवामी लीग ने 272 सीटें जीतीं, लेकिन विपक्ष ने बहिष्कार किया था।
2018 में आवामी ने 293 सीटें जीतीं।
बीते चुनावों में हिंसा और धांधली के आरोप लगे। 2008 से आवामी लीग सत्ता में थी।
बीते वर्षों में और अब के चुनावों में मुख्य तौर पर क्या अंतर आया है?
*बीते चुनावों में आवामी लीग का दबदबा था, विपक्ष कमजोर। अब आवामी प्रतिबंधित,
चुनाव प्रतिस्पर्धी। छात्र-आंदोलन से नई पार्टियां उभरीं।
अर्थव्यवस्था और रोजगार मुख्य मुद्दे बने। पहले हिंसा राजनीतिक थी, अब सांप्रदायिक हमलों की चिंता।
हिंदुओं के पास क्या विकल्प?
बांग्लादेश में 10% हिंदू आबादी है, जो परंपरागत रूप से आवामी लीग का समर्थन करती थी।
अब आवामी प्रतिबंधित होने से हिंदू अल्पसंख्यक डरे हुए हैं,
क्योंकि हसीना के पतन के बाद हमले बढ़े। BNP ने 6 अल्पसंख्यक उम्मीदवार उतारे,
जबकि जमात ने पहली बार एक हिंदू प्रत्याशी (कृष्णा नंदी) को टिकट दिया। विशेषज्ञों के अनुसार,
हिंदू BNP की ओर झुक सकते हैं, लेकिन जमात से दूरी बनाए रखेंगे। अधिकार कार्यकर्ता कहते हैं कि हिंदू ‘
अस्तित्व के संकट’ में हैं, क्योंकि हमलों में कोई सजा नहीं मिलती।
आइये जानते हैं… यह चुनाव बांग्लादेश के लोकतंत्र की परीक्षा है। नतीजे 13 फरवरी को आ सकते हैं।
BNP की जीत की संभावना ज्यादा है, लेकिन जमात मजबूत चुनौती दे रही है।
हिंदू समुदाय की सुरक्षा और प्रतिनिधित्व मुख्य चिंता बने हुए हैं।
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