UGC Bill Row, UGC नए नियम
देश भर में UGC (University Grants Commission) के नए नियमों का विरोध तेज हो गया है। उच्च शिक्षा में कथित रूप से केंद्रीय नियंत्रण बढ़ाने वाले इन नियमों के खिलाफ छात्र, शिक्षक और राजनीतिक दल एकजुट हो रहे हैं। अब इस विवाद में नया मोड़ आया है—भाजपा के अंदरूनी स्तर पर भी विरोध शुरू हो गया है। कई भाजपा नेता और सहयोगी संगठनों के पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। उत्तर प्रदेश और दिल्ली में प्रदर्शन चरम पर हैं, जबकि कुछ प्रभावशाली नेता निलंबन के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।
UGC के नए नियम क्या हैं?
UGC ने हाल ही में उच्च शिक्षा संस्थानों में नियुक्ति, प्रवेश, पाठ्यक्रम और फंडिंग से जुड़े नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इनमें मुख्य रूप से:
- विश्वविद्यालयों में कुलपति और शिक्षकों की नियुक्ति में राज्य सरकार की भूमिका कम करना
- केंद्रीय स्तर पर एकीकृत नियंत्रण बढ़ाना
- कुछ विषयों में अनिवार्य पाठ्यक्रम और राष्ट्रीय परीक्षा पैटर्न लागू करना
विरोधियों का आरोप है कि ये नियम संघीय ढांचे के खिलाफ हैं और राज्य विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता छीन रहे हैं।
भाजपा में भी विरोध: इस्तीफों का दौर
भाजपा के कई नेता और सहयोगी संगठनों के पदाधिकारी इन नियमों से नाखुश हैं। खासकर उत्तर प्रदेश में भाजपा के युवा मोर्चा, महिला मोर्चा और शिक्षक सेल के कुछ प्रमुख पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया। सूत्रों के अनुसार, इस्तीफा देने वाले नेताओं में शामिल हैं:
- UP भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व जिला अध्यक्ष
- दिल्ली भाजपा के एक पूर्व विधायक
- ABVP से जुड़े कई पूर्व नेता
इन नेताओं ने कहा कि “भाजपा की शिक्षा नीति हमेशा से विकेंद्रीकरण और राज्य अधिकारों की रक्षा करती आई है, लेकिन UGC के ये नए नियम विपरीत दिशा में जा रहे हैं।”
यूपी और दिल्ली में प्रदर्शन चरम पर
उत्तर प्रदेश में वाराणसी, लखनऊ, प्रयागराज और गोरखपुर जैसे शहरों में छात्र-शिक्षक संगठनों ने UGC नियमों के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया। दिल्ली में JNU, DU और Jamia Millia Islamia के छात्रों ने भी मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए—“UGC Bill वापस लो, शिक्षा बचाओ!”
अलंकार यूजीसी के निलंबन के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी
इस विवाद का सबसे चर्चित नाम रहा अलंकार, जो एक प्रमुख UGC-विरोधी नेता हैं। उन्हें हाल ही में UGC ने निलंबित कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने इसे “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” बताया। अलंकार ने घोषणा की है कि वे उच्च न्यायालय में याचिका दायर करेंगे और निलंबन को चुनौती देंगे। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ मेरे खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे विपक्षी आवाज के दमन का मामला है।”
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और आगे क्या?
विपक्षी दल कांग्रेस, सपा और AAP ने भाजपा पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “
भाजपा के नेता इस्तीफा दे रहे हैं, लेकिन सरकार चुप है। यह दिखाता है कि नियमों में खामी है।”
भाजपा नेतृत्व ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि
UGC नियमों पर संशोधन की चर्चा चल रही है।
यह विवाद उच्च शिक्षा में केंद्रीकरण vs स्वायत्तता की बहस को फिर से जीवित कर रहा है।
आने वाले दिनों में कोर्ट, प्रदर्शन और राजनीतिक बयानबाजी से स्थिति और गर्म होने की संभावना है।