पूर्वोत्तर रेलवे में
गोरखपुर रेलवे में क्रांतिकारी बदलाव: एक ही पटरी पर 12 किमी तक ट्रेनें दौड़ेंगी
गोरखपुर और पूर्वांचल के रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। पूर्वोत्तर रेलवे ने ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग (ABS) सिस्टम के तहत महत्वपूर्ण प्रगति की है। वर्ष 2025-26 में गोविंदनगर-टिनिच-गौर-बभनान (24.64 किमी) और बभनान-स्वामी नारायण छपिया (12 किमी) खंड में कुल 36.64 किमी ABS का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। अब तक पूरे पूर्वोत्तर रेलवे पर 138.57 किमी का यह आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम लागू हो चुका है।
क्या है ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग और इसका फायदा?
ABS सिस्टम में ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी को स्वचालित रूप से मॉनिटर किया जाता है। इससे एक ही पटरी पर आगे-पीछे ट्रेनें तेजी से और सुरक्षित रूप से चल सकती हैं। खासकर बभनान-स्वामी नारायण छपिया के 12 किमी खंड में अब ट्रेनें पहले से कहीं ज्यादा रफ्तार से चल सकेंगी। इससे:
- ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी बढ़ेगी
- यात्रा समय में 15-25% तक की कमी आएगी
- लूप लाइन पर इंतजार खत्म होगा
- मालगाड़ियों की रफ्तार और संख्या बढ़ेगी
यह खंड गोरखपुर से अयोध्या, लखनऊ और बस्ती जाने वाले मुख्य मार्ग का हिस्सा है। ABS लागू होने से गोरखपुर-लखनऊ, गोरखपुर-अयोध्या और गोरखपुर-बस्ती रूट पर यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
2025-26 में पूरे हुए प्रमुख खंड
- गोविंदनगर-टिनिच-गौर-बभनान: 24.64 किमी
- बभनान-स्वामी नारायण छपिया: 12 किमी
- कुल इस वर्ष: 36.64 किमी
- अब तक कुल ABS: 138.57 किमी
ये सभी खंड पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल में आते हैं, जो गोरखपुर से जुड़े हैं। रेलवे ने इस परियोजना पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए हैं और अगले 2-3 वर्षों में पूरे पूर्वांचल में ABS को बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
यात्रियों और व्यापारियों के लिए फायदे
- गोरखपुर से लखनऊ का सफर पहले से तेज और सुरक्षित
- मालगाड़ियों की आवाजाही बढ़ने से औद्योगिक सामान की सप्लाई चेन मजबूत होगी
- गोरखपुर स्टेशन पर प्लेटफॉर्म और लूप लाइन का दबाव कम होगा
- पर्यटन को बढ़ावा – अयोध्या राम मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को फायदा
रेलवे का विजन और भविष्य की योजनाएं
पूर्वोत्तर रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि ABS सिस्टम से रेलवे की क्षमता दोगुनी हो सकती है। अगले चरण में गोरखपुर-बारहचकिया, गोरखपुर-बांसी और गोरखपुर-नौतनवा खंडों में भी यह सिस्टम लगाया जाएगा। यह कदम योगी सरकार की ‘बेहतर कनेक्टिविटी’ और ‘आत्मनिर्भर पूर्वांचल’ की नीति से जुड़ा है।
गोरखपुर की रेल यात्रा अब और तेज और सुरक्षित
12 किमी के इस छोटे से खंड में एक ही पटरी पर ट्रेनों का आगे-पीछे दौड़ना पूर्वांचल के रेलवे इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा। गोरखपुर से जुड़े लाखों यात्रियों को अब कम समय में गंतव्य तक पहुंचने का मौका मिलेगा। रेलवे की यह पहल न केवल यात्रा को आसान बनाएगी, बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और विकास को भी नई गति देगी।