सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एक धांसू प्लान लॉन्च किया है, जो अगले तीन सालों में देश भर में ट्रेन और फ्लाइट का सफर भूल जाने को मजबूर कर देगा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के नेतृत्व में तैयार इस योजना के तहत 50,000 किलोमीटर से अधिक हाई-स्पीड रोड नेटवर्क बिछाया जाएगा। सड़क परिवहन मंत्रालय प्लान का लक्ष्य है कि दिल्ली से मुंबई का सफर महज 12 घंटे में पूरा हो, जो अभी ट्रेन से 16-20 घंटे और फ्लाइट से 2 घंटे (प्लस ट्रैवल टाइम) लेता है। यह भारतमाला परियोजना का परिशिष्ट है, जिसमें 1.4 लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्लान न केवल यात्रा को तेज बनाएगा, बल्कि रोजगार और आर्थिक विकास को भी बूस्ट देगा।
तीन साल का रोडमैप: कौन-कौन से हाईवे बनेंगे तैयार?
ट्रेन फ्लाइट सफर भूलें का नारा अब हकीकत बनने को है। पहले चरण में 2026 तक दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (1350 KM) पूर्ण होगा, जिसकी स्पीड लिमिट 120 KM/h होगी। दूसरा, चेन्नई-बेंगलुरु कॉरिडोर (260 KM) और दिल्ली-कोलकाता हाईवे पर काम तेज। हाई स्पीड हाईवे भारत के तहत 20 नए ग्रीनफील्ड कॉरिडोर बनेंगे, जहां इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए फास्ट चार्जिंग स्टेशन लगेंगे। मंत्रालय के अनुसार, 2027 तक 30,000 KM नई सड़कें बनेंगी, जिसमें टनल और ब्रिज शामिल हैं। उत्तर प्रदेश में गोरखपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का विस्तार होगा, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा। यह प्लान PM गतिशक्ति से जुड़ा है, जो मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा।
आखिर क्यों ट्रेन और फ्लाइट से बेहतर साबित होगा सड़क सफर?
ट्रेनों में देरी, फ्लाइट्स में ऊंची कीमतें- इन समस्याओं का अंत होगा। सड़क परिवहन मंत्रालय प्लान में कार या बस से सफर करने पर ईंधन खर्च 30% कम होगा, क्योंकि हाईवे पर एवरेज स्पीड 100 KM/h रहेगी। पर्यावरण के लिहाज से इलेक्ट्रिक हाईवे पर सोलर पैनल लगेंगे, जो बिजली जनरेट करेंगे। यात्रियों को मिलेंगी रेस्ट एरिया, हॉस्पिटल और Wi-Fi सुविधाएं। उदाहरणस्वरूप, दिल्ली-मुंबई रूट पर अब 24 घंटे लगते हैं, लेकिन नया हाईवे इसे 12 घंटे में सिमटाएगा। इससे टूरिज्म बूम होगा- गोरखपुर से वाराणसी या नेपाल बॉर्डर तक 4 घंटे में पहुंचना आसान। विशेषज्ञ कहते हैं, यह हाई स्पीड हाईवे भारत को अमेरिका-चीन जैसे देशों के बराबर लाएगा।
लागत, चुनौतियां और लाभ: पूरी डिटेल में जानें
इस भारतमाला प्रोजेक्ट 2026 की कुल लागत 1.4 लाख करोड़ है, जिसमें 40% केंद्र सरकार, 30% राज्य और बाकी PPP मॉडल से आएगा। चुनौतियां हैं भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण क्लियरेंस, लेकिन डिजिटल टेंडरिंग से काम तेज होगा। लाभ? 2 करोड़ नौकरियां सृजित होंगी, GDP में 2% इजाफा।
ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ेगी, जैसे यूपी के पूर्वांचल में। ट्रेन फ्लाइट सफर भूलें से
लॉजिस्टिक्स कॉस्ट 20% घटेगी, जो निर्यात को बूस्ट देगी। गडकरी जी ने कहा, “सड़कें भारत की रीढ़ हैं,
यह प्लान आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार करेगा।”
भविष्य की सड़कें: स्मार्ट और सस्टेनेबल
तीन साल बाद भारत में हाई स्पीड रोड नेटवर्क इतना मजबूत होगा कि
ट्रेनें माल ढोने और फ्लाइट्स लक्जरी के लिए रहेंगी।
स्मार्ट टोल सिस्टम, AI ट्रैफिक मैनेजमेंट और ड्रोन सर्विलांस शामिल।
गोरखपुर जैसे शहरों में लोकल हाईवे से ट्रैफिक जाम खत्म।
यह प्लान न केवल यात्रा बदलेगा,
बल्कि जीवनशैली को भी। क्या आप तैयार हैं ट्रेन फ्लाइट सफर भूल करने को