दहेज प्रताड़ना से तंग आकर विवाहिता ने खाया जहर, मौत के बाद पति समेत चार लोगों पर दर्ज हुआ मुकदमा

गोरखपुर में दहेज उत्पीड़न का गंभीर मामला आया सामने

गोरखपुर जिले के गोला थाना क्षेत्र के चिलवां गांव से दहेज प्रताड़ना का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाने के बाद पुलिस ने पति समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मृतका के मायके पक्ष का आरोप है कि शादी के बाद से ही उसे अतिरिक्त दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था। लगातार मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न से परेशान होकर उसने जहर खा लिया, जिसके बाद उसकी मौत हो गई।

यह घटना एक बार फिर समाज में व्याप्त दहेज प्रथा की भयावह सच्चाई को उजागर करती है। कानून में दहेज लेना और देना दोनों अपराध हैं, इसके बावजूद ऐसे मामले लगातार सामने आते रहते हैं। मृतका के परिवार का कहना है कि यदि समय रहते ससुराल पक्ष के खिलाफ सख्त कार्रवाई हुई होती तो उनकी बेटी की जान बच सकती थी।

मृतका की मां ने दर्ज कराई शिकायत

जानकारी के अनुसार ग्राम बारानगर निवासी सुभद्रा देवी पत्नी रामबदन यादव ने गोला पुलिस को लिखित तहरीर देकर अपनी पुत्री की मौत के लिए ससुराल पक्ष को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी रेनू यादव की शादी चिलवां गांव निवासी पप्पू यादव के साथ हुई थी।

परिजनों के अनुसार शादी के कुछ समय बाद ही अतिरिक्त दहेज की मांग शुरू हो गई थी। जब परिवार मांग पूरी नहीं कर सका तो रेनू को प्रताड़ित किया जाने लगा। मायके पक्ष का आरोप है कि उसे लगातार मानसिक तनाव दिया जाता था और कई बार उसके साथ दुर्व्यवहार भी किया गया।

मृतका की मां का कहना है कि उनकी बेटी अक्सर फोन पर अपने साथ हो रहे अत्याचार की जानकारी देती थी और कई बार उसने अपने जीवन को लेकर चिंता भी जताई थी।

पति, सास, ननद और ननदोई पर गंभीर आरोप

तहरीर में पति पप्पू यादव, सास चनकली, ननद सुनीता यादव और ननदोई बालेंद्र यादव पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि सभी लोग मिलकर विवाहिता पर दहेज लाने का दबाव बनाते थे।

परिवार का कहना है कि रेनू को अक्सर अपमानित किया जाता था और छोटी-छोटी बातों पर उसे प्रताड़ित किया जाता था। कई बार उसके साथ मारपीट किए जाने की भी बात सामने आई है।

मृतका की मां के अनुसार उनकी बेटी ने कई बार ससुराल में हो रही प्रताड़ना के बारे में बताया था, लेकिन परिवार ने यह उम्मीद की कि समय के साथ हालात सुधर जाएंगे। दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं हुआ और प्रताड़ना का सिलसिला जारी रहा।

पहले भी सामने आई थी प्रताड़ना की शिकायत

परिजनों का दावा है कि यह पहला अवसर नहीं था जब रेनू के साथ हो रही प्रताड़ना की बात सामने आई हो। इससे पहले भी मामले की शिकायत स्थानीय पुलिस से की गई थी।

उस समय पुलिस के हस्तक्षेप के बाद कुछ दिनों तक स्थिति सामान्य रही, लेकिन बाद में फिर से विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि ससुराल पक्ष का व्यवहार लगातार कठोर होता गया और विवाहिता मानसिक रूप से टूटने लगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू हिंसा और दहेज प्रताड़ना के मामलों में शुरुआती शिकायतों को गंभीरता से लेना अत्यंत आवश्यक होता है। कई बार समय रहते हस्तक्षेप होने पर बड़ी घटनाओं को रोका जा सकता है।

प्रताड़ना से परेशान होकर उठाया आत्मघाती कदम

मायके पक्ष का आरोप है कि लगातार प्रताड़ना और मानसिक दबाव के कारण रेनू यादव गहरे तनाव में रहने लगी थी। तहरीर के अनुसार 4 जून की रात उसने जहर खा लिया।

परिवार के लोगों ने उसे बचाने का प्रयास किया और उपचार की व्यवस्था भी की गई, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। विवाहिता की मौत के बाद परिवार में मातम का माहौल है और परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं।

मृतका की मां का कहना है कि उनकी बेटी ने कभी अपने जीवन में ऐसा कदम उठाने की कल्पना भी नहीं की थी, लेकिन लगातार हो रहे उत्पीड़न ने उसे मजबूर कर दिया।

आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप

परिजनों ने आरोप लगाया है कि ससुराल पक्ष द्वारा लगातार दिए जा रहे

मानसिक दबाव और प्रताड़ना ने रेनू को आत्मघाती कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया।

मायके पक्ष का कहना है कि यदि उसे सम्मान और सुरक्षा का वातावरण मिलता तो

वह आज जीवित होती। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि दोषियों के

खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए दहेज प्रथा के

खिलाफ जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई है।

पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

गोला पुलिस ने मृतका की मां द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर पति, सास,

ननद और ननदोई के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 85 और 108 के साथ-साथ दहेज प्रतिषेध

अधिनियम 1961 की धारा 3 और 4 के तहत मामला दर्ज किया है। जांच अधिकारियों का कहना है कि

मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे।

पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

दहेज प्रथा पर फिर उठे सवाल

यह घटना एक बार फिर समाज में मौजूद दहेज प्रथा की गंभीर समस्या को उजागर करती है।

कानून के बावजूद आज भी कई परिवार दहेज की मांग के कारण बेटियों को प्रताड़ित करते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानूनी कार्रवाई ही नहीं बल्कि

सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है। जब तक समाज स्वयं दहेज प्रथा का बहिष्कार नहीं करेगा,

तब तक इस प्रकार की घटनाओं को पूरी तरह रोकना मुश्किल होगा।

महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रत्येक परिवार को अपनी बेटियों को उनके अधिकारों के

प्रति जागरूक करना चाहिए और प्रताड़ना की स्थिति में तुरंत कानूनी सहायता लेनी चाहिए।

गोरखपुर के चिलवां गांव में विवाहिता रेनू यादव की मौत ने एक बार फिर दहेज प्रताड़ना के

गंभीर परिणामों को सामने ला दिया है। मृतका के परिजनों ने पति समेत चार लोगों पर प्रताड़ना और

उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं, जिसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

अब सभी की नजर पुलिस जांच और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

यह घटना समाज के लिए भी एक चेतावनी है कि

दहेज जैसी कुप्रथा के खिलाफ सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।

FAQ

यह मामला कहां का है?

यह मामला गोरखपुर जिले के गोला थाना क्षेत्र के चिलवां गांव का है।

मृतका का नाम क्या था?

मृतका का नाम रेनू यादव बताया गया है।

किन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है?

पति, सास, ननद और ननदोई के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

पुलिस ने किन धाराओं में केस दर्ज किया है?

बीएनएस की धारा 85 और 108 तथा दहेज प्रतिषेध

अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

परिजनों ने क्या आरोप लगाया है?

परिजनों का आरोप है कि दहेज की मांग और लगातार प्रताड़ना के कारण विवाहिता ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली।

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