इज़राइल में रोजगार के नए अवसर खोलने जा रही है। हाल ही में मिली जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश से लगभग 1000 श्रमिकों को इज़राइल भेजा जाएगा। यह पहल भारत और इज़राइल के बीच हुए द्विपक्षीय समझौते के तहत की जा रही है।
इसके तहत भारत से प्रशिक्षित, कुशल और मेहनती श्रमिकों को इज़राइल में निर्माण क्षेत्र में रोजगार मिलेगा। इस योजना के सफल संचालन के लिए केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NSDC) मिलकर काम कर रहे हैं।
योजना की शुरुआत और उद्देश्यइस योजना का मुख्य उद्देश्य भारतीय युवाओं को विदेशों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। बढ़ती बेरोजगारी और सीमित अवसरों को देखते हुए यह पहल युवाओं के लिए एक बड़ा मौका साबित हो सकती है। इज़राइल में निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले कुशल श्रमिकों की भारी कमी है, और भारत इस आवश्यकता को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सौजन्य से भारत सरकार ने अप्रैल 2024 में “भारत-इज़राइल श्रमिक समझौते” पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके अंतर्गत तय हुआ कि भारत से पहली खेप में 1000 श्रमिक उत्तर प्रदेश से भेजे जाएंगे।राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी। उम्मीदवारों के कौशल, योग्यता और शारीरिक फिटनेस के आधार पर चयन किया जाएगा ताकि केवल योग्य लोग ही इस अंतरराष्ट्रीय रोजगार कार्यक्रम में शामिल हों।
स्क्रीनिंग की प्रक्रिया और तारीखेंउत्तर प्रदेश के श्रम एवं रोजगार विभाग ने घोषणा की है कि श्रमिकों की स्क्रीनिंग की प्रक्रिया दिसंबर 2025 के पहले सप्ताह से शुरू की जाएगी। स्क्रीनिंग प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होगी।सबसे पहले अभ्यर्थियों का पंजीकरण होगा।इसके बाद उनके दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा।फिर टेक्निकल स्किल टेस्ट और भाषा परीक्षा होगी।
शारीरिक फिटनेस और स्वास्थ्य परीक्षण के बाद ही अंतिम चयन किया जाएगा।स्क्रीनिंग के लिए प्रदेश के कई शहरों में कैंप लगाए जाएंगे ताकि अभ्यर्थियों को लंबी दूरी तय न करनी पड़े। गोरखपुर, लखनऊ, वाराणसी, कानपुर और मेरठ को मुख्य केंद्र बनाया गया है।चयनित श्रमिकों को मिलने वाले लाभइज़राइल जाने वाले श्रमिकों को निर्माण कार्य जैसे प्लास्टरिंग, मिस्त्री कार्य, टाइल फिटिंग, लोहे की ग्रिलिंग और पेंटिंग से जुड़ी नौकरियां मिलेंगी।
चयनित श्रमिकों को आकर्षक वेतन, सुरक्षित आवास, मेडिकल सुविधा और बीमा कवरेज दिया जाएगा। बताया जा रहा है कि श्रमिकों को मासिक वेतन लगभग 1.5 लाख रुपये तक मिल सकता है।इसके अलावा, वहां काम करने वाले श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए इज़राइल सरकार और भारत के दूतावास की ओर से एक हेल्पडेस्क भी बनाया जाएगा। इससे प्रवासी कामगार किसी समस्या का तुरंत समाधान पा सकेंगे।
प्रशिक्षण और भाषा दक्षताइज़राइल में काम करने से पहले सभी चयनित श्रमिकों को बेसिक हिब्रू भाषा का प्रशिक्षण और सुरक्षा मानकों की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य के कई स्किल डेवलपमेंट केंद्रों पर आयोजित होंगे। NSDC की मदद से श्रमिकों को आधुनिक निर्माण तकनीक, मशीनरी संचालन और सुरक्षा नियमों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
सरकारी रुख और प्रतिक्रियाउत्तर प्रदेश के श्रम मंत्री ने कहा कि यह परियोजना राज्य के युवाओं के लिए ऐतिहासिक अवसर है। इससे न केवल युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी, बल्कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा। केंद्र सरकार की “स्किल इंडिया मिशन” और “विदेशी रोजगार योजना” को यह कदम मजबूती देगा।
इज़राइल के साथ भारत के श्रमिक समझौते का महत्वभारत और इज़राइल के बीच यह श्रमिक समझौता दक्षिण एशिया में अपनी तरह का अनोखा प्रयास है। दोनों देशों के बीच यह तय हुआ है कि मजदूरों की भर्तियां किसी निजी दलाल या एजेंट के जरिए नहीं होंगी, बल्कि सरकारी एजेंसियों के जरिए पारदर्शी तरीके से की जाएंगी। इससे धोखाधड़ी और शोषण की संभावनाएं खत्म होंगी।इज़राइल ने पहले ही कहा था कि उसे कुशल निर्माण श्रमिकों की बड़ी आवश्यकता है, और भारतीय श्रमिक अपनी मेहनत, ईमानदारी और तकनीकी दक्षता के कारण पसंद किए जाते हैं।
ग्रामीण इलाकों के लिए बड़ा अवसरउत्तर प्रदेश के पूर्वी जिलों जैसे गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, बलिया और बस्ती जैसे क्षेत्रों से अधिकतर अभ्यर्थी आने की संभावना है। इन जिलों में बड़ी संख्या में लोग मजदूरी करते हैं और कई व्यक्ति पहले से ही खाड़ी देशों में कार्यरत हैं।
यह योजना उन्हें एक बेहतर और सुरक्षित विकल्प देगा।सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी उम्मीदवार से चयन या काम दिलाने के नाम पर रुपये नहीं लिए जाएंगे। आवेदन पूरी तरह निशुल्क होंगे और चयन प्रक्रिया सरकारी पोर्टल के माध्यम से होगी।
