24 जनवरी 2026 को गोरखपुर शहर ने एक बार फिर युद्धकालीन स्थिति का अनुभव किया। शाम के समय अचानक सायरन बजते ही पूरे शहर में ब्लैकआउट कर दिया गया – सभी स्ट्रीट लाइटें, दुकानों की लाइटें और घरों की बाहरी रोशनी एक साथ बंद हो गईं। यह उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित राज्यव्यापी ब्लैकआउट मॉक ड्रिल का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य हवाई हमले, आतंकी घटना या किसी बड़े संकट की स्थिति में नागरिकों और सुरक्षा एजेंसियों की त्वरित प्रतिक्रिया का परीक्षण करना था। यह अभ्यास गोरखपुर के अलावा बरेली, बुलंदशहर, लखनऊ, लखीमपुर खीरी, आजमगढ़, वाराणसी समेत कई जिलों में एक साथ चलाया गया।
ड्रिल का घटनाक्रम
शाम करीब 7 बजे सायरन की तेज आवाज गूंजी। इसके साथ ही पूरे शहर में ब्लैकआउट लागू हो गया। कुछ ही मिनटों में एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड, पुलिस और सिविल डिफेंस की टीमें निर्धारित स्थानों पर पहुंच गईं। तय स्क्रिप्ट के अनुसार “हवाई हमले” में घायल हुए लोगों को रेस्क्यू करने, आग बुझाने और अस्पताल पहुंचाने का रिहर्सल किया गया। गोरखपुर के प्रमुख चौक-चौराहों, रेलवे स्टेशन और अस्पतालों के आसपास यह ड्रिल सबसे ज्यादा सक्रिय दिखी।
स्कूलों में भी बच्चों को पहले से सूचित कर अलर्ट रहने को कहा गया था। कई स्कूलों में बच्चों को “सायरन बजने पर क्या करें” की ट्रेनिंग दी गई – जैसे खिड़कियां बंद करना, लाइटें बंद करना और सुरक्षित स्थान पर जाना। यह ड्रिल करीब 30-45 मिनट तक चली, जिसके बाद सामान्य स्थिति बहाल की गई।
राज्यव्यापी अभ्यास और अन्य जिले
यह मॉक ड्रिल सिर्फ गोरखपुर तक सीमित नहीं थी। उत्तर प्रदेश के कम से कम 20 जिलों में एक साथ ब्लैकआउट और रेस्क्यू ऑपरेशन का अभ्यास हुआ। बरेली में एयरपोर्ट के पास, बुलंदशहर में इंडस्ट्रियल एरिया में और लखीमपुर खीरी के ग्रामीण इलाकों में भी यही ड्रिल दोहराई गई। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के निर्देश पर यह अभ्यास हर साल किया जाता है, लेकिन इस बार इसे और व्यापक और गंभीरता से लिया गया।
पिछले अभ्यास से तुलना
गोरखपुर में इससे पहले 7 मई 2025 को भी इसी तरह का ब्लैकआउट मॉक ड्रिल हुआ था, जिसमें शहर की सभी लाइटें बंद कर हवाई हमले का सिमुलेशन किया गया था। उस समय भी लोगों ने इसे काफी गंभीरता से लिया था। 2026 का अभ्यास उससे कहीं ज्यादा यथार्थवादी और तेज था। फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस की रिस्पॉन्स टाइम में सुधार देखा गया।
उद्देश्य और महत्व
इस ड्रिल का मुख्य उद्देश्य:
- नागरिकों में जागरूकता बढ़ाना
- सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता जांचना
- युद्ध या आतंकी हमले की स्थिति में ब्लैकआउट का पालन सुनिश्चित करना
- स्कूलों-कॉलेजों में बच्चों को बचाव की बेसिक ट्रेनिंग देना
जिलाधिकारी और एसएसपी ने बताया कि यह अभ्यास इसलिए जरूरी है क्योंकि
वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति में किसी भी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता।
गोरखपुर का 24 जनवरी 2026 का ब्लैकआउट मॉक ड्रिल एक बार फिर साबित करता है कि
प्रशासन किसी भी आपात स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है।
सायरन की आवाज और अचानक छा गया अंधेरा भले ही कुछ पलों के लिए डरावना लगा हो,
लेकिन यह अभ्यास आने वाले खतरे से बचाव की मजबूत तैयारी का संकेत है।
उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र के इस प्रयास से नागरिकों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है
