उत्तर प्रदेश में तेंदुओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है और वे गली-गली तक पहुंच रहे हैं। एक जिले में अकेले 444 तेंदुए हैं। मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने से वन विभाग ने नसबंदी की स्कीम बनाई है। यह योजना तेंदुओं की आबादी नियंत्रित करने और हादसे रोकने के लिए है। यह अपडेट जनवरी 2026 का है और विभाग सक्रिय हो गया है।
यूपी में तेंदुओं की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर है। जंगलों से निकलकर वे गांवों और शहरों के पास आ रहे हैं। एक जिले में 444 तेंदुए होने से खतरा बढ़ा है। लोग डरे हुए हैं। रात में तेंदुए दिखने की घटनाएं आम हो गई हैं। पशु और मनुष्य पर हमले बढ़े हैं। वन विभाग ने सर्वे कर संख्या पता की है।
नसबंदी स्कीम मुख्य योजना है। तेंदुओं को पकड़कर नसबंदी की जाएगी और जंगल में छोड़ा जाएगा। यह तरीका आबादी नियंत्रित करेगा। विभाग ने विशेष टीम बनाई है। ट्रैंकुलाइजर और केज का इस्तेमाल होगा। नसबंदी सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से होगी। अन्य उपाय जैसे बाड़ और जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे।
यह समस्या जंगल सिकुड़ने और भोजन कमी से है। तेंदुए भोजन तलाश में गांवों में आते हैं। विभाग ने ग्रामीणों को सावधानी की अपील की है। रात में बाहर न निकलें और पशुओं को सुरक्षित रखें। हादसे पर तुरंत सूचना दें।
स्कीम से संघर्ष कम होगा। तेंदुए संरक्षित हैं, इसलिए मारना नहीं, नियंत्रण जरूरी है। विभाग ने बजट और टीम तैयार की है। यह योजना अन्य जिलों में भी लागू हो सकती है।
ग्रामीणों ने राहत महसूस की है। पहले हादसे बढ़े थे। अब स्कीम से उम्मीद है। वन विभाग की यह पहल सराहनीय है। तेंदुए और मनुष्य दोनों सुरक्षित रहें।
तेंदुए संख्या: 444 एक जिले में
संख्या:
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संख्या चिंताजनक।
नसबंदी स्कीम: नियंत्रण योजना
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योजना महत्वपूर्ण।
संघर्ष कारण: जंगल कमी
कारण:
- जंगल सिकुड़न।
- भोजन तलाश।
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संघर्ष बढ़ा।
विभाग तैयारी: सक्रिय
तैयारी:
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