नमस्कार, मैं एडवोकेट पिंटू साहनी, फिशरमैन वर्ल्ड न्यूज़ चैनल से। आज हम आपको लिए चलते हैं बस्ती जिले के एक बड़े शिक्षा विवाद पर, जहाँ हाईकोर्ट ने सात साल पुराने केस में बड़ा निर्णय सुनाया है।
खेर इंडस्ट्रियल इंटर कॉलेज, बस्ती। यही वह कॉलेज है जहाँ वर्ष 2018 में एलटी ग्रेड के 21 शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। कॉलेज प्रबंधन समिति ने पूरे चयन की प्रक्रिया पूरी कर जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) को भेजा था। लेकिन डीआईओएस ने इसे पहले ही खारिज कर दिया था।
बावजूद इसके, प्रबंधन समिति ने शिक्षकों को कार्यभार दे दिया और उन्हें पढ़ाने भी लगा दिया। यहीं से विवाद शुरू हुआ।
मामला कैसे पहुँचा अदालत तक?
डीआईओएस ने साफ कहा था कि नियुक्ति प्रक्रिया नियमों के विपरीत है।
चयन में पारदर्शिता नहीं रही।
शिक्षा विभाग के आदेशों की अनदेखी हुई।
नियुक्ति को वैध ठहराने का कोई आधार नहीं था।
इसी के बाद पूरा मामला हाईकोर्ट पहुँच गया। कुल 21 में से 20 शिक्षक और प्रबंधन समिति कोर्ट पहुँची और कहा कि उनकी नियुक्ति वैध है।
हाईकोर्ट में सुनवाई
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं।
शिक्षकों का कहना था कि वे सात साल से सेवा कर रहे हैं, छात्रों को पढ़ा रहे हैं और अब अचानक नियुक्ति निरस्त करना उनके भविष्य से खिलवाड़ होगा।
वहीं शिक्षा विभाग ने ठोस सबूत रखे कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह अवैध थी और डीआईओएस ने पहले ही अस्वीकृत कर दिया था।
हाईकोर्ट का फैसला
सात साल बाद शनिवार को हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया।
नियुक्ति प्रक्रिया को अवैध करार दिया।
सभी 21 शिक्षकों की नियुक्ति निरस्त कर दी।
कहा कि नियमों और शिक्षा विभाग की मंज़ूरी के बिना नियुक्ति वैध नहीं मानी जा सकती।
कॉलेज प्रबंधन की प्रतिक्रिया
कॉलेज प्रबंधक हमीदुल्लाह खान और उर्फ बबलू खान का कहना है कि वे आदेश की कॉपी मिलते ही आगे की रणनीति बनाएँगे। उनका दावा है कि नियुक्ति नियमों के तहत की गई थी। अब वे सुप्रीम कोर्ट तक जाने की तैयारी करेंगे।
शिक्षकों की बेबसी
21 शिक्षक और उनके परिवार इस फैसले से सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं।
कई शिक्षक सात साल से पढ़ा रहे थे, छात्रों को पढ़ाई की जिम्मेदारी निभा रहे थे। अब उनकी नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है। शिक्षकों का कहना है कि वे निर्दोष हैं और अपील करेंगे।
शिक्षा विभाग का पक्ष
शिक्षा विभाग ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया। विभाग का कहना है कि यह फैसला उन प्रबंधन समितियों के लिए सबक है जो नियमों को ताक पर रखकर मनमानी नियुक्तियाँ करती हैं।
असर
बस्ती जिले में शिक्षा व्यवस्था पर तात्कालिक असर पड़ेगा।
छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है क्योंकि अचानक 21 शिक्षक हट गए।
दूसरी ओर, कॉलेज प्रबंधन समितियों को अब नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतनी ही पड़ेगी।
निष्कर्ष
फिशरमैन वर्ल्ड न्यूज़ की इस रिपोर्ट से यह साफ हो गया है कि शिक्षा व्यवस्था में नियम सर्वोपरि हैं। चाहे सात साल बीत जाएँ, न्याय देर से सही मगर मिलता ज़रूर है।
📺 फिशरमैन वर्ल्ड न्यूज़ चैनल की इस रिपोर्ट को आप देख रहे थे एडवोकेट पिंटू साहनी के साथ, दीवानी कचहरी गोरखपुर से।
👉 जुड़े रहिए, ताकि हर बड़ा अपडेट आप तक सबसे पहले पहुँचे।