दिवाली का शुभ मुहूर्त 2025 में 20 अक्टूबर की शाम 7:08 बजे से 8:18 बजे तक है। इस समय मां लक्ष्मी की पूजा सबसे उत्तम मानी जाती है। दिवाली से पहले प्रदोष काल शाम 5:46 बजे से शुरू होकर 8:18 बजे तक रहता है,
जो पूजा के लिए विशेष शुभ माना जाता है। वृषभ काल भी शाम 7:08 बजे से 9:03 बजे तक रहेगा, जो पूजा के लिए अनुकूल समय है। इसलिए 20 अक्टूबर 2025 को ही दिवाली का मुख्य पर्व मनाया जाएगा दिवाली का उद्देश्य:दिवाली अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक है।
यह पर्व भगवान राम की रावण पर विजय और अयोध्या वापसी के साथ, भगवान कृष्ण द्वारा राक्षस नरकासुर के वध और धनदेवी माता लक्ष्मी के आगमन की कथा से जुड़ा है। दिवाली का त्योहार सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है जिसमें लोग अपने घरों को साफ-सुथरा और दीयों से जगमगाते हैं
ताकि मां लक्ष्मी का वास हो सके। यह पर्व आनंद, प्रेम, सहिष्णुता और भाईचारे का संदेश देता है।दिवाली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है, जिसमें खरीदारी और वित्तीय समृद्धि के लिए पूजा होती है। इसके बाद छोटी दिवाली (नरक चतुर्दशी),
फिर दिवाली का मुख्य दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा, गोवर्धन पूजा और भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है। दिवाली मनाने का उद्देश्य नकारात्मक ऊर्जा को मिटाकर नए उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा के साथ जीवन को उज्जवल बनाना है। इस त्योहार पर लोग पुराने मतभेद भूलकर मिठाइयां बांटते हैं,
मिलजुलकर खुशियां मनाते हैं और अपने जीवन को प्रकाशमय करते हैं।दिवाली एक ऐसा त्योहार है जो अंधकार को दूर कर प्रकाश लाता है और जीवन में समृद्धि, सुख और शांति लेकर आता है। यह त्योहार आत्मिक शुद्धि, परिवार और समाज में सौहार्द बढ़ाने का भी माध्यम है।
दिवाली पूजा के दौरान विशेष रूप से लक्ष्मी माता से धन, समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है यदि 800 वाक्य में दिवाली का उद्देश्य लिखना हो तो यह उपरोक्त विषयों को विस्तार से धर्म, संस्कृति, लोक कथा, सामाजिक व्यवहार, आध्यात्मिकता और उत्सव के आयोजन की विधियों के संदर्भ में लिखा जा सकता है।
संक्षेप में, दिवाली का शुभ मुहूर्त है 20 अक्टूबर 2025 को शाम 7:08 से 8:18 बजे तक, और दिवाली का उद्देश्य अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और ज्ञान की विजय का उत्सव मनाना है, साथ ही सामाजिक मेलजोल और आर्थिक समृद्धि का पर्व है।
