डीएम दिव्या मित्तल
शिक्षक आत्महत्या मामले में डीएम की कड़ी फटकार
बीएसएनएल में मृत शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह के आत्महत्या प्रकरण में प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है।
जिला मजिस्ट्रेट दिव्या मित्तल ने बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) को कड़ी फटकार लगाई।
डीएम ने पूछा कि पटल परिवर्तन के मामले में निर्णय लेने में इतना विलंब क्यों हुआ।
BSA ने जवाब दिया कि पटल परिवर्तन के चलते कार्रवाई में देरी हुई।
इस पर डीएम ने गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में भी निर्णय लेने में 1 वर्ष का समय लगा दिया गया।
हाईकोर्ट आदेश की अनदेखी पर नाराजगी
डीएम दिव्या मित्तल ने स्पष्ट कहा कि पटल परिवर्तन कोई बहाना नहीं हो सकता।
हाईकोर्ट के आदेश को लागू करने में 1 साल की देरी बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
उन्होंने BSA को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह के परिवार ने लंबे समय से न्याय की गुहार लगाई थी।
परिवार का आरोप है कि पटल परिवर्तन के नाम पर शिक्षक को परेशान किया गया।
इससे मानसिक दबाव बढ़ा और आत्महत्या जैसी कदम उठाना पड़ा।
प्रशासनिक स्तर पर बैठक और फटकार
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने BSA के साथ विशेष बैठक की।
बैठक में डीएम ने पूरे प्रकरण की विस्तृत जानकारी ली।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों जैसे सम्मानित वर्ग के साथ इस तरह की लापरवाही अस्वीकार्य है।
पटल परिवर्तन जैसे मामलों में समयबद्ध निर्णय जरूरी है।
डीएम ने चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
शिक्षक परिवार की स्थिति
कृष्ण मोहन सिंह के परिवार का कहना है कि लंबी कानूनी लड़ाई और प्रशासनिक उदासीनता ने उन्हें तोड़ दिया।
परिवार ने न्याय की उम्मीद जताई है।
डीएम की फटकार से परिवार को कुछ राहत मिली है।
वे चाहते हैं कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।
शिक्षा विभाग में सुधार की जरूरत
यह घटना उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में सुधार की जरूरी बताती है।
पटल परिवर्तन, स्थानांतरण और अन्य मामलों में देरी आम शिकायत है।
शिक्षकों पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है।
ऐसे मामलों में त्वरित सुनवाई और निष्पक्ष जांच जरूरी है।
डीएम दिव्या मित्तल की सख्ती से विभाग में सकारात्मक संदेश गया है।
आगे क्या होगा?
डीएम ने BSA को निर्देश दिया कि प्रकरण की जांच पूरी कर जल्द रिपोर्ट सौंपें।
परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिया गया है।
शिक्षक संगठनों ने भी मामले को उठाया है।
यह प्रकरण विभागीय सुधारों की मांग को और तेज कर सकता है।
शिक्षकों की सुरक्षा और सम्मान के लिए सख्त कदम जरूरी हैं।
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