संभल के बदनपुर
आस्था का अनोखा संगम: बुर्के में कांवड़ ला रही तमन्ना
उत्तर प्रदेश के संभल जिले के बदनपुर बसी गांव में रहने वाली मुस्लिम समुदाय की तमन्ना मलिक इन दिनों सोशल मीडिया और स्थानीय समाचारों में छाई हुई हैं। बुर्का पहने हुए तमन्ना कंधे पर कांवड़ उठाए हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गांव की ओर पैदल यात्रा कर रही हैं। उनके साथ उनके जीवनसाथी भी पैदल चल रहे हैं। यह दृश्य धार्मिक आस्था और सामाजिक सद्भाव का अनोखा उदाहरण पेश कर रहा है। जहां एक तरफ तमन्ना भगवान शिव को जल अर्पित करने का संकल्प लेकर कांवड़ यात्रा पर निकली हैं, वहीं दूसरी तरफ उनका पति उनके साथ हर कदम पर साथ दे रहा है।
यात्रा का विवरण और उद्देश्य
तमन्ना ने हरिद्वार के गंगाघाट से पवित्र गंगाजल भरा और कांवड़ पर लादकर संभल के अपने गांव बदनपुर बसी की ओर प्रस्थान किया। यह यात्रा कई दिनों से चल रही है और पैदल होने के कारण काफी थकान भरी है। तमन्ना का कहना है कि यह उनकी लंबे समय से मन में चली आ रही आस्था है। वह भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने के लिए यह कठिन यात्रा कर रही हैं। बुर्का पहनकर कांवड़ उठाना उनके लिए कोई बाधा नहीं, बल्कि आस्था का हिस्सा है। उनके पति ने भी इस संकल्प का पूरा समर्थन किया और खुद भी पैदल चलकर उनकी सुरक्षा और साथ निभा रहे हैं। यह जोड़ी पूरे रास्ते में लोगों की प्रशंसा और आशीर्वाद पा रही है।
पुलिस द्वारा सुरक्षा व्यवस्था
धार्मिक यात्रा के दौरान किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए प्रशासन ने सतर्कता बरती है। सुरक्षा की दृष्टि से जगह-जगह पुलिसकर्मी तमन्ना और उनके पति की निगरानी में तैनात किए गए हैं। संभल पुलिस ने विशेष टीम गठित की है जो उनकी यात्रा के दौरान उनके साथ चल रही है। यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि ऐसी अनोखी यात्रा में भीड़, मौसम और अन्य चुनौतियां हो सकती हैं। पुलिस का कहना है कि तमन्ना की यात्रा शांतिपूर्ण और प्रेरणादायक है, इसलिए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना उनका कर्तव्य है।
सामाजिक सद्भाव का संदेश
यह घटना उत्तर प्रदेश में धार्मिक सद्भाव का जीता-जागता प्रमाण बन गई है। जहां हिंदू-मुस्लिम समुदाय के बीच कभी-कभी तनाव की खबरें आती हैं, वहीं तमन्ना जैसी घटनाएं एकता और आपसी सम्मान का संदेश देती हैं। मुस्लिम महिला द्वारा हिंदू देवता के लिए गंगाजल लाना और बुर्के में कांवड़ यात्रा करना समाज में सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। स्थानीय लोग, सोशल मीडिया यूजर्स और धार्मिक संगठन इस जोड़े की सराहना कर रहे हैं। कई लोगों ने कहा कि आस्था किसी धर्म की बंधन नहीं होती, बल्कि यह दिल की पुकार है। तमन्ना की यह यात्रा लाखों लोगों को प्रेरित कर रही है कि धर्म के नाम पर एक-दूसरे का सम्मान करें।
यात्रा का महत्व और प्रभाव
तमन्ना की कांवड़ यात्रा सिर्फ एक व्यक्तिगत संकल्प नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव की मिसाल है।
कांवड़िया सीजन में हजारों लोग हरिद्वार-गंगोत्री से जल लाते हैं, लेकिन तमन्ना का यह रूप अनोखा है।
बुर्का और कांवड़ का संयोजन समाज में संवाद पैदा कर रहा है। उनके पति का
साथ निभाना भी परिवारिक एकता को दर्शाता है। यह घटना मीडिया में छाई हुई है और कई चैनलों ने
इसे प्रमुखता से दिखाया। सोशल मीडिया पर #TamannaKanwarYatra और #HinduMuslimEkta जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
आस्था से ऊपर सद्भाव
तमन्ना मलिक की बुर्के में कांवड़ यात्रा उत्तर प्रदेश के लिए एक प्रेरणादायक कहानी है। यह दिखाती है कि
सच्ची आस्था और सद्भाव किसी भी बाधा से परे होते हैं। पुलिस की सुरक्षा, पति का साथ और समाज का समर्थन
इस यात्रा को और खास बना रहा है। तमन्ना जल्द ही अपने गांव
पहुंचकर भगवान शिव को गंगाजल अर्पित करेंगी और उनका संकल्प पूरा होगा।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता और एकता में है
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