देश में मौसम बदलाव के बीच H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में तेजी देखी जा रही है। IMA ने लोगों को सतर्क रहने के साथ बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक्स और एंटीवायरल दवाएं नहीं लेने की चेतावनी दी है। विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल किसी नए H1N1 स्ट्रेन की पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए सावधानी जरूरी है लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है।
नई दिल्ली। मौसम में बदलाव और मानसून के बीच देश के कई हिस्सों में Influenza A (H1N1), जिसे आमतौर पर स्वाइन फ्लू कहा जाता है, के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। बढ़ते मामलों के बीच इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है, लेकिन साथ ही अनावश्यक डर और घबराहट से बचने की सलाह दी है।
IMA ने खास तौर पर लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक्स और एंटीवायरल दवाएं लेने से बचने को कहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक H1N1 एक वायरल संक्रमण है और सामान्य स्थिति में एंटीबायोटिक्स वायरस पर काम नहीं करतीं। जरूरत पड़ने पर ही चिकित्सक की सलाह से दवाओं का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
H1N1 के बढ़ते मामलों के बीच IMA की एडवाइजरी
IMA की ओर से जारी सलाह में कहा गया है कि वर्तमान में H1N1 संक्रमण में बढ़ोतरी मौसमी गतिविधि का हिस्सा है। उपलब्ध निगरानी के आधार पर किसी नए या असामान्य H1N1 म्यूटेशन की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है, लेकिन इसे लेकर पैनिक करने की आवश्यकता नहीं है।
अधिकांश H1N1 संक्रमण हल्के होते हैं और समय के साथ ठीक हो सकते हैं। हालांकि बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में फ्लू गंभीर रूप ले सकता है। ऐसे लोगों में लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।
एंटीबायोटिक क्यों नहीं लेनी चाहिए?
H1N1 एक वायरल बीमारी है, जबकि एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल बैक्टीरियल संक्रमण के इलाज के लिए किया जाता है। इसलिए सिर्फ बुखार, खांसी या फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर अपने स्तर से एंटीबायोटिक शुरू करना सही नहीं है।
IMA ने चेतावनी दी है कि Azithromycin, Amoxicillin-Clavulanate और Cefixime जैसी एंटीबायोटिक्स का अनावश्यक इस्तेमाल एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस यानी दवाओं के खिलाफ बैक्टीरिया में प्रतिरोध बढ़ा सकता है। यदि डॉक्टर को किसी मरीज में सेकेंडरी बैक्टीरियल संक्रमण की आशंका होती है, तभी जांच और चिकित्सकीय मूल्यांकन के आधार पर एंटीबायोटिक दी जा सकती है।
एंटीवायरल दवा भी खुद से न लें
IMA ने केवल एंटीबायोटिक्स ही नहीं, बल्कि एंटीवायरल दवाओं के मामले में भी सावधानी बरतने को कहा है। Oseltamivir जैसी एंटीवायरल दवाएं डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही ली जानी चाहिए।
हर व्यक्ति में फ्लू के लक्षण एक जैसे नहीं होते और हर मरीज को एंटीवायरल दवा की जरूरत भी नहीं होती। मरीज की उम्र, लक्षण, जोखिम और बीमारी की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सक उपचार का फैसला करते हैं।
H1N1 के सामान्य लक्षण क्या हैं?
स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य फ्लू या अन्य वायरल संक्रमणों से मिलते-जुलते हो सकते हैं।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
तेज बुखारसूखी खांसी
गले में खराश
सिरदर्द
शरीर में दर्द और थकान
नाक बहना या नाक बंद होना
कमजोरी
कुछ मामलों में सांस लेने में परेशानी
सिर्फ लक्षणों के आधार पर H1N1 की पुष्टि नहीं की जा सकती। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर जांच की सलाह दे सकते हैं।
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?
H1N1 संक्रमण ज्यादातर मामलों में हल्का हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में जटिलताओं का खतरा अपेक्षाकृत अधिक रहता है। बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और पहले से हृदय, फेफड़े या अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को फ्लू जैसे लक्षण होने पर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
यदि सांस लेने में परेशानी, लगातार तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी या हालत तेजी से बिगड़ने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
H1N1 से बचाव के लिए क्या करें?
फ्लू के संक्रमण से बचने के लिए सामान्य सावधानियां काफी महत्वपूर्ण हैं। भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतें, हाथों को नियमित रूप से साफ करें और खांसते या छींकते समय मुंह-नाक को ढकें।
फ्लू जैसे लक्षण होने पर दूसरों के संपर्क में आने से बचना और पर्याप्त आराम करना संक्रमण के प्रसार को कम करने में मदद कर सकता है। बंद जगहों में बेहतर वेंटिलेशन और जरूरत के अनुसार मास्क का इस्तेमाल भी उपयोगी हो सकता है।
नए H1N1 स्ट्रेन को लेकर क्या है स्थिति?
H1N1 के बढ़ते मामलों के बीच एक महत्वपूर्ण बात यह है कि ICMR की निगरानी में फिलहाल किसी नए H1N1 स्ट्रेन या नए जेनेटिक म्यूटेशन की पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों ने मौजूदा स्थिति को मौसमी फ्लू से जोड़ते हुए लोगों से सतर्क रहने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।
दिल्ली समेत कई राज्यों में बढ़े मामले
H1N1 संक्रमण के बढ़ते मामलों की खबरें दिल्ली सहित कई राज्यों से सामने आ रही हैं। दिल्ली में 27 अगस्त तक H1N1 के कुल मामलों की संख्या 2,612 बताई गई, जबकि इन्फ्लुएंजा-ए के मामले 3,300 तक पहुंचने की रिपोर्ट है। अन्य राज्यों में भी संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं।
निष्कर्ष
स्वाइन फ्लू के मामलों में बढ़ोतरी के बीच सबसे जरूरी है कि लोग सावधानी बरतें, लेकिन घबराएं नहीं। फ्लू जैसे लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लें और अपनी मर्जी से एंटीबायोटिक या एंटीवायरल दवा शुरू न करें। खासकर जोखिम वाले समूहों को लक्षण गंभीर होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।