लखनऊ, 11 जनवरी 2026 – उत्तर प्रदेश की राजधानी में आज एक ऐसी घटना घटी जिसने पूरे प्रदेश की राजनीति और सोशल मीडिया को हिला कर रख दिया। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से जुड़े चर्चित धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न मामले के मुख्य आरोपी डॉक्टर रमीज मलिक (रमीजुद्दीन नाइक उर्फ रमीज मलिक) को लखनऊ पुलिस ने सरेंडर करने से ठीक पहले ही दबोच लिया। आरोपी लंबे समय से फरार चल रहे थे और कोर्ट में सरेंडर करने की पूरी प्लानिंग कर चुके थे, लेकिन पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई ने उनकी सारी तैयारी पर पानी फेर दिया।
मामला क्या है? KGMU में शुरू हुई सनसनी
यह पूरा कांड दिसंबर 2025 में तब सामने आया जब KGMU की एक जूनियर महिला रेजिडेंट डॉक्टर ने आरोप लगाया कि आरोपी डॉक्टर रमीज ने शादी का झांसा देकर उसके साथ यौन शोषण किया, गर्भपात करवाया और जबरन धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया। पीड़िता ने बताया कि आरोपी ने अपनी पहले से चली आ रही शादी की जानकारी छिपाई और उसे मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। इतना ही नहीं, जब पीड़िता ने धर्मांतरण से इनकार किया तो मानसिक तनाव के कारण उसने आत्महत्या का प्रयास भी किया।
विशाखा कमेटी की जांच में आरोपी को दोषी पाया गया। KGMU प्रशासन ने 22 दिसंबर 2025 को उन्हें सस्पेंड कर दिया, कैंपस में प्रवेश पर रोक लगा दी और MD डिग्री पूरी तरह रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने साफ कहा कि आरोपी अब कभी KGMU से कोई डिग्री नहीं ले पाएगा।
50 हजार का इनामी फरार, फिर सरेंडर की प्लानिंग
मुकदमा दर्ज होने के बाद डॉक्टर रमीज 16 दिनों तक फरार रहे। पुलिस ने उनके खिलाफ नॉन-बेलेबल वारंट जारी किया और 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया। उनके माता-पिता (पिता सलीमुद्दीन और माता खतीजा) को भी गिरफ्तार किया गया। घरों पर कुर्की के नोटिस चस्पा किए गए। पुलिस की कई टीमें UP, दिल्ली, उत्तराखंड और अन्य राज्यों में तलाश में जुटी रहीं।
जानकारी के मुताबिक, आरोपी कोर्ट में सरेंडर करने की तैयारी में थे। उनके समर्थक भी इस प्लानिंग में जुटे हुए थे। लेकिन 9 जनवरी 2026 को लखनऊ की चौक पुलिस और सर्विलांस सेल ने ठाकुरगंज इलाके में उनके किराए के फ्लैट से सामान निकालने आए रमीज को दबोच लिया। सरेंडर की प्लानिंग धरी की धरी रह गई!
PFI कनेक्शन और बड़ा नेटवर्क का खुलासा
गिरफ्तारी के बाद जांच में बड़े सुराग मिले हैं। आरोपी के मोबाइल फोन से PFI (प्रतिबंधित संगठन) के पदाधिकारियों से संपर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस का दावा है
कि आरोपी के पिता सलीमुद्दीन ने भी कई राज्यों (जम्मू-कश्मीर, पंजाब, उत्तराखंड, UP)
में हिंदू लड़कियों को फंसाकर धर्मांतरण का खेल खेला।
मोबाइल डेटा से पूरा नेटवर्क बेनकाब हो रहा है।
यह मामला अब सिर्फ एक व्यक्तिगत अपराध नहीं रह गया, बल्कि एक संगठित साजिश की तरफ इशारा कर रहा है।
पुलिस की पूछताछ जारी है और जल्द ही और खुलासे होने की उम्मीद है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
यह घटना उत्तर प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला सकती है।
‘लव जिहाद’ और जबरन धर्मांतरण जैसे संवेदनशील मुद्दे हमेशा चर्चा में रहते हैं।
सोशल मीडिया पर लोग पुलिस की कार्रवाई की तारीफ कर रहे हैं,
तो कुछ लोग आरोपी के समर्थन में भी आवाज उठा रहे हैं।
लेकिन सच्चाई सामने आते ही समाज में बड़ा बदलाव आ सकता है।
यह घटना महिला सुरक्षा, संस्थागत जवाबदेही और कानून के शासन की मिसाल बन सकती है।
पुलिस और प्रशासन की मुस्तैदी से अपराधियों को संदेश मिला है
कि सरेंडर की प्लानिंग चाहे जितनी पुख्ता हो, कानून से बचना नामुमकिन है।