गोरखपुर विश्वविद्यालय में हंगामा: UGC रेगुलेशन 2026 विरोध शुरू
गोरखपुर विश्वविद्यालय के कैंपस में UGC रेगुलेशन 2026 के खिलाफ SC, ST और OBC छात्रों का जोरदार प्रदर्शन शुरू हो गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में इस रेगुलेशन पर लगाई गई अंतरिम रोक के बावजूद छात्र इसे आरक्षण विरोधी साजिश बता रहे हैं। बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतर आए हैं और विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर धरना दे रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने जय संविधान, जय लोकतंत्र के नारे लगाते हुए प्रशासन के खिलाफ रोष जताया। पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए बल तैनात कर दिया है और बैरिकेडिंग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला और छात्रों का गुस्सा
सुप्रीम कोर्ट ने UGC रेगुलेशन 2026 पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसे छात्र सामाजिक न्याय के पक्ष में जीत मान रहे हैं। इस रेगुलेशन में PhD प्रवेश के लिए NET स्कोर को अनिवार्य बनाने, फैकल्टी भर्ती और प्रमोशन के नए नियम प्रस्तावित थे। छात्र संगठन इसे SC/ST/OBC आरक्षण को कमजोर करने वाला बता रहे हैं। प्रदर्शन में प्लेकार्ड्स के साथ नारे गूंज रहे हैं—“सामाजिक न्याय जिंदाबाद, UGC रेगुलेशन 2026 मुर्दाबाद!”। छात्रों का कहना है कि यह नियम असंवैधानिक हैं और उच्च शिक्षा में समान अवसर छीनने की कोशिश है।
SC-ST-OBC छात्र संगठनों की एकजुटता
प्रदर्शन में अंबेडकर स्टूडेंट्स यूनियन, भीम आर्मी स्टूडेंट विंग, OBC महासभा सहित कई संगठन सक्रिय हैं। गोरखपुर विश्वविद्यालय के सैकड़ों छात्रों ने कैंपस को घेर लिया है। महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल हुई हैं और समानता की मांग कर रही हैं। छात्र नेताओं ने कहा, “संविधान हमें आरक्षण का अधिकार देता है, इसे छीनने की कोई साजिश बर्दाश्त नहीं होगी।” प्रदर्शन अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है, जहां वीडियो और फोटो तेजी से शेयर हो रहे हैं।
UGC रेगुलेशन 2026 क्या है? प्रदर्शन का मुख्य कारण
UGC रेगुलेशन 2026 उच्च शिक्षा में सुधार के नाम पर लाया गया था। इसमें PhD प्रवेश के लिए NET स्कोर को अनिवार्य करने का प्रावधान था, जिसे SC/ST/OBC छात्र आरक्षण विरोधी मानते हैं। सुप्रीम कोर्ट की रोक से छात्र उत्साहित हैं,
लेकिन वे इसे स्थायी समाधान नहीं मानते। विशेषज्ञों का कहना है कि
यह रेगुलेशन सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। छात्रों ने मांग की है कि
UGC नए नियम बनाने से पहले पुरानी नीति लागू रखे और आरक्षण सुनिश्चित करे।
प्रदर्शन का राजनीतिक प्रभाव और भविष्य
गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रदर्शन अब राजनीतिक रंग ले चुका है। विपक्षी दल इसे खुलकर समर्थन दे रहे हैं,
जबकि सत्ताधारी पार्टी चुप्पी साधे हुए है।
प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय कुलपति से मुलाकात की मांग की है।
SC ST OBC छात्र आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता कहते हैं कि यह लड़ाई लंबी चलेगी।
आंदोलन उत्तर प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों तक फैलने की कगार पर है।
यदि सरकार ने जल्द हस्तक्षेप नहीं किया तो यह देशभर के 50 से अधिक विश्वविद्यालयों में फैल सकता है।
यह प्रदर्शन सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक बन चुका है
