गोरखपुर जिले की जीवनरेखा कहलाने वाली अमी नदी इन दिनों मौत बनी हुई है। सहजनवा, पिपरौली, खोराबार और शहर के कई इलाकों से गुजरने वाली इस नदी में पिछले तीन दिनों से अचानक भयंकर प्रदूषण बढ़ गया है। नतीजा – सतह पर सैकड़ों-हजारों मरी हुई मछलियाँ तैर रही हैं। नदी का पानी पूरी तरह काला पड़ चुका है और दूर तक तेज दुर्गंध फैल रही है। स्थानीय मछुआरे और नदी किनारे बसे ग्रामीण दहशत में हैं कि उनकी रोजी-रोटी अब खत्म हो जाएगी।
ग्रामीणों ने बताया – “रातोंरात नदी काला पानी बन गई”
नदी किनारे बसे बरगदवा गांव के मछुआरे रामप्रवेश निषाद ने बताया, “26 नवंबर की शाम तक सब ठीक था। सुबह जब हम जाल डालने आए तो देखा कि सारी मछलियाँ मरी पड़ी हैं। रोहू, कतला, नैन, सिंघी – कोई भी नहीं बची। पानी में ऑक्सीजन खत्म हो गया है, ऐसा लग रहा है किसी ने जहर घोल दिया हो।” उनकी पत्नी संगीता देवी रोते हुए बोलीं, “हमारे घर में सिर्फ मछली पकड़कर ही चूल्हा जलता है। अब क्या खाएंगे? बच्चे स्कूल की फीस कहाँ से देंगे?”
बरगदवा, जंगल तुलसीराम, कौडीराम, बेलिपार समेत दर्जनों गांवों के लोग नदी किनारे जमा होकर प्रदूषण का जिम्मेदार खोज रहे हैं। उनका आरोप है कि ऊपर की तरफ से कोई बड़ा फैक्ट्री या डिस्टलरी अपना जहरीला कचरा रात में छोड़ रही है।
क्या है प्रदूषण का कारण? ये हैं बड़े संदेह
- शराब फैक्ट्री का केमिकल वेस्ट: खोराबार और सहजनवा क्षेत्र में कई डिस्टलरी और शुगर मिलें हैं। ग्रामीणों का दावा है कि ये फैक्ट्रियाँ रात में गुपचुप तरीके से अपना काला पानी (spent wash) नदी में डाल रही हैं।
- सीवर और नाला का पानी: गोरखपुर शहर का कई ट्रीटमेंट प्लांट ठप पड़ा है, जिससे सारा सीवरेज बिना ट्रीटमेंट के अमी नदी में जा रहा है।
- अवैध डंपिंग: नदी के ऊपरी हिस्से में कई जगहों पर प्लास्टिक, केमिकल ड्रम और औद्योगिक कचरा डंप किया जा रहा है।
जल विशेषज्ञों के अनुसार, जब नदी में BOD (Biological Oxygen Demand) लेवल 30 mg/L से ऊपर चला जाता है
तो मछलियाँ कुछ ही घंटों में मरने लगती हैं।
अमी नदी में अभी BOD लेवल 80 से 100 mg/L तक पहुँच चुका है, जो बेहद खतरनाक है।
प्रशासन की सुस्ती, मछुआरों में गुस्सा
घटना की सूचना मिलते ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम और मत्स्य विभाग के अधिकारी मौके पर पहुँचे
। नमूने लिए गए हैं, रिपोर्ट 4-5 दिन में आएगी। लेकिन ग्रामीणों का कहना है
कि हर बार यही होता है – नमूना लो, रिपोर्ट का इंतजार करो,
तब तक नदी मर चुकी होती है। मत्स्य विभाग
के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “पिछले साल भी यही हुआ था।
हमने रिपोर्ट दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब फिर वही सिलसिला।”
मछुआरों की मांग – तत्काल राहत और सख्त कार्रवाई
- दोषी फैक्ट्रियों पर तुरंत FIR और सीजिंग की कार्रवाई हो।
- प्रभावित मछुआरा परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता दी जाए।
- नदी की लगातार मॉनिटरिंग के लिए रियल-टाइम वॉटर क्वालिटी सेंसर लगाए जाएं