कुशीनगर में पराली की चिंगारी
घटना का विवरण: चिंगारी से शुरू हुई आग
कुशीनगर जिले में एक छोटी सी चिंगारी ने बड़ा हादसा कर दिया। पराली जलाने या अन्य कारण से निकली एक चिंगारी ने चार गांवों – माघी मठिया, बंधवा, परगन छपरा और भूईसोहरा – की खेतों में फैलकर आग लगा दी। गन्ने की तैयार फसल पूरी तरह जलकर राख हो गई।
आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते 400 एकड़ क्षेत्र प्रभावित हो गया। किसानों की मेहनत की कमाई पलभर में स्वाहा हो गई। वीडियो में साफ दिख रहा है कि धुआं-धुआं कर आग 3 घंटे तक जलती रही। ग्रामीणों ने पानी और अन्य तरीकों से बुझाने की कोशिश की, लेकिन काबू नहीं पाया।
फायर ब्रिगेड की अनुपस्थिति: लापरवाही का आरोप
सबसे बड़ा सवाल फायर ब्रिगेड की देरी पर है। सूचना मिलने के बावजूद फायर ब्रिगेड नहीं पहुंची। किसानों ने बताया कि 3 घंटे तक आग जलती रही, लेकिन कोई मदद नहीं आई। ग्रामीणों ने खुद मशक्कत की, लेकिन आग का विकराल रूप देखकर असहाय हो गए।
किसान गुस्से में हैं। वे कह रहे हैं कि प्रशासनिक लापरवाही से इतना बड़ा नुकसान हुआ। पराली जलाने पर सख्ती है, लेकिन आग बुझाने की व्यवस्था कमजोर है। यह घटना किसानों की उम्मीदों पर पानी फेरने वाली है।
नुकसान का आकलन: लाखों का आर्थिक झटका
400 एकड़ गन्ने की फसल जलने से किसानों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। गन्ना कुशीनगर की प्रमुख फसल है, जहां चीनी मिलों के कारण किसान ज्यादा लगाते हैं। तैयार फसल जलने से कर्ज और परिवार की आजीविका पर संकट आ गया है।
किसानों का कहना है कि सरकार पराली न जलाने की अपील करती है, लेकिन ऐसी घटनाओं में सहायता नहीं पहुंचती। मुआवजे की मांग तेज हो गई है। प्रशासन से जांच और तत्काल मदद की अपील की जा रही है।
पराली प्रबंधन की समस्या: बार-बार दोहराई जा रही गलती
कुशीनगर में पराली जलाने की घटनाएं आम हैं। प्रशासन जुर्माना लगाता है,
लेकिन रोकथाम के लिए पर्याप्त यंत्र या जागरूकता नहीं।
इस बार चिंगारी से फैली आग ने दिखाया कि छोटी लापरवाही बड़ा नुकसान करती है।
सरकार बायो डीकंपोजर, सुपर सीडर जैसे विकल्प दे रही है, लेकिन किसान समय और संसाधन की कमी से परेशान हैं।
यह घटना पर्यावरण और कृषि दोनों के लिए चेतावनी है।
किसानों की मांग: जांच और मुआवजा
प्रभावित किसान प्रशासन से मांग कर रहे हैं:
- फायर ब्रिगेड की देरी की जांच
- तत्काल मुआवजा
- पराली प्रबंधन के बेहतर उपाय
- भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम
किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। वे कह रहे हैं कि अब तक… (जैसा पोस्ट में लिखा)। आशा है प्रशासन जल्द एक्शन लेगा।
यह घटना उत्तर प्रदेश के किसानों की दुर्दशा दिखाती है।
मजबूत व्यवस्था और सहायता से ऐसी तबाही रोकी जा सकती है