गोरखपुर में SIR
उत्तर प्रदेश में चल रहे संक्षिप्त पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान गोरखपुर जिले में मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम कटने की प्रक्रिया तेज हो गई है। जिले में कुल 62 हजार से अधिक नाम कटने की संभावना है, जबकि 2022 विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो कई सीटों पर जीत का अंतर एक लाख से भी ज्यादा वोटों का था। ऐसे में SIR का असर आने वाले चुनावों पर पड़ना तय माना जा रहा है।
गोरखपुर की प्रमुख विधानसभा सीटों का हाल
विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सीट शहर विधानसभा और पिपराइच विधानसभा क्षेत्र ही ऐसे हैं, जहां कटे नामों से ज्यादा वोटों से जीत हुई थी। इन दोनों सीटों पर 2022 में जीत का अंतर काफी मजबूत था और कटने वाले नामों की संख्या भी अपेक्षाकृत कम है।
लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा वाली सीट चिल्लूपार है। यहां 2022 विधानसभा चुनाव में जीत का अंतर महज 21,645 वोटों का था, जबकि SIR प्रक्रिया में इस सीट से अकेले 87,732 नाम कटने जा रहे हैं। यह संख्या जीत के अंतर से कहीं ज्यादा है, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है।
अन्य प्रमुख सीटों का हाल भी कम दिलचस्प नहीं है:
- सहजनवा – जीत का अंतर करीब 45 हजार वोट, कटने वाले नामों की संख्या 50 हजार से अधिक।
- कैंपियरगंज – जीत का अंतर 38 हजार के आसपास, कटने वाले नाम 42 हजार से ज्यादा।
- बांसगांव – जीत का अंतर 55 हजार से अधिक, लेकिन कटने वाले नाम 60 हजार के पार।
- रुद्रपुर – जीत का अंतर 72 हजार वोट, कटने वाले नाम 65 हजार के आसपास।
इन आंकड़ों से साफ है कि ज्यादातर सीटों पर कटने वाले नामों की संख्या जीत के अंतर से कहीं ज्यादा है, सिवाय शहर और पिपराइच के।
SIR का उद्देश्य और प्रभाव
संक्षिप्त पुनरीक्षण का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध करना है। इसमें मृतक मतदाताओं, स्थानांतरित व्यक्तियों, दोहरे नाम और फर्जी प्रविष्टियों को हटाया जा रहा है। गोरखपुर में BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) घर-घर जाकर सत्यापन कर रहे हैं और रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पहले ही सख्त निर्देश दिए हैं कि 31 जनवरी 2026 तक 95% सत्यापन पूरा हो।
राजनीतिक दलों का कहना है कि यह प्रक्रिया निष्पक्ष होनी चाहिए। कुछ दल दावा कर रहे हैं कि कटने वाले नामों में ज्यादातर अल्पसंख्यक और गरीब वर्ग के लोग हैं, जबकि प्रशासन इसे पूरी तरह कानूनी और तथ्य आधारित बता रहा है।
राजनीतिक मायने
2022 में गोरखपुर की 9 विधानसभा सीटों में से अधिकांश पर बीजेपी ने मजबूत जीत हासिल की थी।
लेकिन SIR के बाद अगर इतनी बड़ी संख्या में नाम कटते हैं, तो
2027 के विधानसभा चुनाव में वोट बैंक पर असर पड़ सकता है।
खासकर चिल्लूपार जैसी सीटों पर जहां मार्जिन पहले से ही कम था, वहां स्थिति और नाजुक हो सकती है।
वहीं, बीजेपी का कहना है कि शुद्ध मतदाता सूची से चुनाव और भी निष्पक्ष होंगे।
विपक्षी दल इस प्रक्रिया पर नजर रखे हुए हैं
और किसी भी तरह की गड़बड़ी पर शोर मचाने को तैयार हैं।
SIR गोरखपुर में अब तक के सबसे बड़े मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान के रूप में देखा जा रहा है।
आने वाले दिनों में कटे नामों की अंतिम सूची जारी होने के बाद ही
असली तस्वीर साफ होगी। फिलहाल, 62 हजार कटने वाले नाम और
2022 के चुनावी अंतर के बीच का यह गैप राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है।