रॉबर्ट वाड्रा
देश के चर्चित शिकोहपुर लैंड डील मामले में अहम मोड़ आ गया है। रॉबर्ट वाड्रा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है और अब अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मामले में अगली सुनवाई और फैसले के लिए 15 अप्रैल की तारीख तय की गई है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला साल 2008 का है, जब गुरुग्राम के शिकोहपुर इलाके में करीब 3.53 एकड़ जमीन का सौदा हुआ था। प्रवर्तन निदेशालय ने आरोप लगाया है कि इस जमीन खरीद-फरोख्त में मनी लॉन्ड्रिंग और कई तरह की अनियमितताएं हुईं।
जांच एजेंसी के अनुसार, रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने यह जमीन खरीदी थी, लेकिन उस समय कंपनी के पास इतनी पूंजी नहीं थी। इसके बावजूद सौदा किया गया, जिससे कई सवाल खड़े हुए।
ईडी के आरोप क्या हैं
प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि इस जमीन सौदे में कई तरह की गड़बड़ियां की गईं। आरोप है कि
असली भुगतान नहीं किया गया और सेल डीड में गलत जानकारी दी गई।
इतना ही नहीं, एक ऐसे चेक का भी जिक्र किया गया जो कभी जारी ही नहीं हुआ या कैश नहीं हुआ।
इससे यह संदेह और मजबूत होता है कि सौदे में पारदर्शिता नहीं थी।
जांच एजेंसी का यह भी दावा है कि जमीन की कीमत जानबूझकर कम दिखाई गई,
ताकि स्टाम्प ड्यूटी की चोरी की जा सके। इस आधार पर
इसे भारतीय दंड संहिता की धारा 423 के तहत अपराध माना गया है।
करोड़ों की संपत्तियां अटैच
ईडी की जांच में करीब 58 करोड़ रुपये की कथित अपराध से अर्जित आय सामने आई है।
इसके आधार पर एजेंसी ने लगभग 38.69 करोड़ रुपये की 43 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है।
इन संपत्तियों का संबंध रॉबर्ट वाड्रा, उनकी कंपनियों जैसे आर्टेक्स और स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी सहित अन्य फर्मों से बताया गया है।
अशोक खेमका की भूमिका
इस मामले में हरियाणा के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक खेमका की भूमिका भी अहम रही है।
उन्होंने 2012 में इस जमीन सौदे में गड़बड़ियों का हवाला देते हुए इसे रद्द कर दिया था।
हालांकि बाद में एक सरकारी पैनल ने वाड्रा और डीएलएफ को क्लीन चिट दे दी थी, लेकिन हरियाणा में
सरकार बदलने के बाद इस मामले में फिर से जांच शुरू हुई और पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।
अब क्या होगा आगे
अब अदालत इस बात पर फैसला करेगी कि ईडी द्वारा दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया जाए या नहीं।
यदि अदालत संज्ञान लेती है तो मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी और आरोप तय किए जा सकते हैं।
इस केस का फैसला राजनीतिक और कानूनी दोनों ही दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है
, क्योंकि इसमें बड़े नाम और करोड़ों रुपये का लेन-देन शामिल है।
शिकोहपुर लैंड डील मामला पिछले कई वर्षों से चर्चा में बना हुआ है।
अब जब सुनवाई पूरी हो चुकी है और फैसला सुरक्षित रखा गया है, तो सभी की नजर 15 अप्रैल पर टिकी है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है।
