कुशीनगर बिजली विभाग की लापरवाही ने एक परिवार को सदमे में डाल दिया है। विभाग ने मृतक व्यक्ति से 4 लाख रुपये का बिजली बिल वसूलने का प्रयास किया। यह घटना विभाग की गलत रिकॉर्डिंग और सिस्टम की कमजोरी को उजागर करती है। मृतक की मौत कई साल पहले हो चुकी थी, लेकिन बिल उनके नाम पर चलता रहा। परिवार को नोटिस मिला तो वे हैरान रह गए। यह मामला कुशीनगर के एक गांव का है, जहां मृतक के परिवार ने शिकायत की। बिजली विभाग ने गलती स्वीकार की है, लेकिन कार्रवाई में देरी से लोग गुस्से में हैं। परिवार ने कहा कि मृतक के नाम पर बिल कैसे चल सकता है और विभाग ने कभी चेक नहीं किया।
यह लापरवाही बिजली उपभोक्ताओं के साथ अन्याय है। सोशल मीडिया पर मामला वायरल हो गया और लोग विभाग की आलोचना कर रहे हैं। उच्च अधिकारियों ने जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया है। यह घटना यूपी बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। कई जगह ऐसी गलतियां सामने आ चुकी हैं। परिवार ने बिल माफ करने और मुआवजे की मांग की है। यह मामला उपभोक्ता अधिकारों और विभागीय जवाबदेही पर बहस छेड़ रहा है। इस ब्लॉग में हम कुशीनगर बिजली बिल कांड की पूरी डिटेल्स, परिवार का दर्द, विभाग की गलती, जांच अपडेट और उपभोक्ता सलाह बताएंगे। यदि आप बिजली उपभोक्ता हैं, तो यह अपडेट आपके लिए जरूरी है।
घटना का विवरण: मृतक से बिल वसूली
कुशीनगर में यह शर्मनाक घटना सामने आई। मुख्य बातें:
- मृतक की मौत सालों पहले।
- नाम पर बिल चलता रहा।
- 4 लाख का बकाया नोटिस।
- परिवार को वसूली का दबाव।
- गलत रीडिंग या मीटर।
- विभाग की लापरवाही।
- परिवार सदमे में।
परिवार ने नोटिस मिलते ही शिकायत की।
विभाग की गलती: रिकॉर्डिंग में चूक
बिजली विभाग की बड़ी लापरवाही:
- मृतक का नाम नहीं हटाया।
- बिल जनरेट होता रहा।
- मीटर रीडिंग गलत।
- कोई चेकिंग नहीं।
- सिस्टम में त्रुटि।
- उपभोक्ता सूचना अनदेखी।
- कई ऐसे मामले।
यह गलती उपभोक्ताओं का विश्वास तोड़ रही है।

परिवार का दर्द: सदमा और गुस्सा
*परिवार पर असर:
- मृतक की याद से दुख।
- बिल से आर्थिक दबाव।
- मानसिक तनाव।
- शिकायतों का दौर।
- न्याय की उम्मीद।
- समाज का समर्थन।
परिवार ने कहा, “मृतक से बिल कैसे?”
जांच और कार्रवाई: अपडेट
विभाग ने कदम उठाए:
- जांच शुरू।
- गलती स्वीकार।
- बिल माफ करने की प्रक्रिया।
- दोषी कर्मचारियों पर एक्शन।
- उच्च अधिकारियों का निर्देश।
- सिस्टम सुधार।
कार्रवाई जल्द होने की उम्मीद।