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जाँच और कार्रवाई
- पुलिस, ड्रग विभाग और जिला अस्पताल प्रशासन की संयुक्त टीम ने अस्पताल के सामने स्थित मेडिकल स्टोर्स का निरीक्षण किया।
- दुकानों के लाइसेंस, पंजीकृत फार्मासिस्ट की उपलब्धता, कर्मचारियों की पहचान, स्टॉक रजिस्टर, खरीद–बिक्री के बिल, बिलिंग सिस्टम व सीसीटीवी आदि की जाँच की गई।
- अनेक स्थानों पर निम्न गड़बड़ियाँ पाई गईं—
- बिना पंजीकृत/उपस्थित फार्मासिस्ट के दवा वितरण।
- बिना पर्चे दवा देना और बिना बिल बिक्री।
- मरीजों को महंगे ब्रांड थमाना/जेनेरिक के नाम पर भ्रमित करना।
- एक्सपायरी के नज़दीक/अनुचित दवाइयों का स्टॉक।
- दुकानों के बाहर एजेंटों द्वारा मरीजों को अपनी “ख़ास” दुकान की ओर मोड़ना।
- जाँच रिपोर्ट के आधार पर सात मेडिकल दुकानों के विरुद्ध लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्यवाही की तैयारी है। संबंधित फाइलें लाइसेंसिंग अथॉरिटी/ड्रग विभाग को भेजी जा रही हैं। दोष साबित होने पर लाइसेंस रद्द होंगे और दंडात्मक कार्रवाई होगी।
“सस्ती दवा” के बहाने का खेल
- अस्पताल परिसर और गेट पर सक्रिय एजेंट “सस्ती दवा दिलाने” का झाँसा देकर तीमारदारों को कुछ चुनिंदा दुकानों पर ले जाते हैं।
- वहाँ कई बार बिल नहीं दिया जाता, डॉक्टर के पर्चे के बिना दवाएँ बेची जाती हैं या अनावश्यक महंगे ब्रांड दिए जाते हैं। इसी से बहस और मारपीट की नौबत आती है।
स्टोर कर्मचारियों का सत्यापन
- पुलिस ने दुकानों पर काम कर रहे कर्मचारियों का फिजिकल वेरिफ़िकेशन किया।
- टीम ने सख़्त निर्देश दिए कि बिना पंजीकृत फार्मासिस्ट दवा नहीं बाँट सकते। ओवरचार्जिंग, नकली/तारीख़ बदलकर बेची गई दवा, या मरीज/तीमारदार से बदसलूकी/मारपीट पर एफ़आईआर के साथ लाइसेंस रद्द किया जाएगा
- अख़बार में 20 अगस्त को प्रकाशित रिपोर्टों के बाद प्रशासन हरकत में आया। उसी क्रम में यह संयुक्त जाँच, सत्यापन और लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हुई है।
आगे क्या होगा
- ड्रग विभाग/लाइसेंसिंग अथॉरिटी जाँच रिपोर्ट के आधार पर निरस्तीकरण आदेश जारी करेगी।
- लगातार सीसीटीवी निगरानी, एजेंटों पर रोक और अस्पताल परिसर में सुव्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं।
- मरीजों से अपील है कि हमेशा डॉक्टर के पर्चे पर ही दवा लें, बिल ज़रूर माँगें, और कोई अनियमितता दिखे तो अस्पताल प्रशासन/पुलिस/ड्रग विभाग में शिकायत दर्ज कराएँ।
तस्वीरों के कैप्शन (कटिंग से)
- “जिला अस्पताल के पास मारपीट के मामले की जाँच करती पुलिस टीम।”
- “जिला अस्पताल के सामने मेडिकल स्टोर से दवा खरीदते लोग।”
संक्षेप में: मारपीट और अनियमितताओं के बाद जिला अस्पताल के सामने स्थित 7 दवा दुकानों पर शिकंजा कस रहा है—कर्मचारियों का सत्यापन हो चुका है, रिपोर्ट तैयार है, और लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।