आज़म ख़ान को क्वालिटी बार मामले में मिली ज़मानत : सियासी सफर, कानूनी पेच और रिहाई की उलझनें
प्रस्तावना
प्रयागराज से लेकर रामपुर और सीतापुर तक समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आज़म ख़ान का नाम वर्षों से सुर्खियों में रहा है। कभी विकास योजनाओं को लेकर, तो कभी अपने बयानों की वजह से। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से वे लगातार अदालतों और जेल की खबरों में बने हुए हैं। उन पर करीब 96 मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें ज़मीन कब्ज़ा, किताब चोरी, भैंस चोरी, बिजली चोरी से लेकर गम्भीर आपराधिक धाराएँ भी शामिल हैं। इन्हीं में से एक चर्चित केस “क्वालिटी बार” कब्ज़ा प्रकरण का है। अब इस केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट से उन्हें ज़मानत मिल गई है।
अदालत का आदेश और ज़मानत की राह
न्यायमूर्ति समीर जैन की एकल पीठ ने आज़म ख़ान की जमानत याचिका पर सुनवाई की। लंबी बहस और दस्तावेज़ों के अवलोकन के बाद अदालत ने माना कि फिलहाल इस केस में उनकी जमानत दी जा सकती है। इसके साथ ही उनकी जेल से बाहर आने की राह आसान हो गई है।
उनके अधिवक्ता मोहम्मद खालिद ने कोर्ट में दलील रखी थी कि सभी मामलों में पहले ही ज़मानत मिल चुकी है, और इस केस में भी कोई ऐसा आधार नहीं है जिससे उन्हें और जेल में रखा जाए। अदालत ने तर्कों को स्वीकार करते हुए ज़मानत प्रदान की।
मुकदमे की पृष्ठभूमि
क्वालिटी बार, रामपुर का एक पुराना और चर्चित बार है। इस पर कब्ज़े को लेकर साल 2019 में विवाद खड़ा हुआ था। उस समय सय्यद जफर अली जाफ़री, डॉ. तंजीन फातिमा और अब्दुल्ला आज़म ख़ान के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। आरोप था कि दबंगई दिखाते हुए बार पर कब्ज़ा किया गया। पुलिस ने गंभीर धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर जांच शुरू की।
आज़म ख़ान की लंबी कानूनी जंग
आजम ख़ान पर कुल मिलाकर लगभग 96 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें ज़्यादातर जमीन कब्ज़ा, अवैध निर्माण और सत्ता का दुरुपयोग जैसे आरोप हैं। कई मामलों में उन्हें पहले ही ज़मानत मिल चुकी है। इस बार “क्वालिटी बार” केस आखिरी प्रमुख केस माना जा रहा था। अब इसमें भी राहत मिलने के बाद उनकी रिहाई की संभावना मजबूत हो गई है।
हालाँकि, कानूनी प्रक्रिया पूरी करने में एक-दो दिन और लग सकते हैं। जमानत आदेश की प्रति तैयार होगी, उसे जेल प्रशासन तक पहुंचाया जाएगा और फिर औपचारिकताएँ पूरी की जाएंगी।
सीतापुर जेल से बाहर आने की उम्मीद
आजम ख़ान सीतापुर जेल में बंद हैं। यहाँ से उनकी रिहाई का रास्ता साफ़ तो हो गया है, लेकिन अभी एक नया पेच सामने आ गया है। अदालत में एमपी-एमएलए कोर्ट ने उनके खिलाफ एक और गंभीर केस की सुनवाई तेज कर दी है। यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 467 (दस्तावेज़ की जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज़ का प्रयोग) और 201 (साक्ष्य मिटाना) से जुड़ा है।
कहा जा रहा है कि इस केस में 2025 तक पेशी हो सकती है और फिलहाल इसकी कार्यवाही आगे बढ़ रही है। अगर अदालत सख्ती दिखाती है तो उनकी रिहाई फिलहाल टल सकती है।
आज़म की रिहाई पर राजनीतिक नजर
समाजवादी पार्टी के लिए आज़म ख़ान सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि मुस्लिम समाज में प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं। रामपुर की राजनीति में उनका दबदबा कई दशकों से कायम रहा है। बार-बार जेल में जाना और मुकदमों से जूझना उनकी सियासी छवि पर असर जरूर डाल रहा है, लेकिन उनके समर्थकों में आज भी वही जोश और उम्मीद बनी हुई है।
जमानत की खबर मिलते ही रामपुर और आसपास के क्षेत्रों में समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। लोग मान रहे हैं कि अब उनका क़ायदे से राजनीति में वापसी करना आसान होगा।
कानूनी प्रक्रिया की जटिलता
किसी भी जमानत आदेश के बाद तुरन्त जेल से रिहाई नहीं होती। आदेश की कॉपी, जमानती दस्तावेज़, ज़मानतदार, पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया होती है। इसमें समय लगता है। कभी-कभी एक ही दिन में आदेश जेल प्रशासन तक नहीं पहुँच पाता।
आजम ख़ान के मामले में भी यही हो रहा है। वकील मानते हैं कि अगर बीच में कोई नया केस सामने नहीं आया तो एक-दो दिन में वे जेल से बाहर होंगे। लेकिन अगर एमपी-एमएलए कोर्ट का नया आदेश अटक गया तो मामला लंबा खिंच सकता है।