उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP), प्रयागराज ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के छात्रों को महंगी और अनधिकृत किताबों से राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने स्पष्ट आदेश जारी कर दिया है कि 2025-26 सत्र में केवल एनसीईआरटी आधारित मानक पाठ्यपुस्तकें ही मान्य होंगी। अनधिकृत प्रकाशकों की किताबें बेचने, महंगी दरों पर बिक्री करने या गाइड/सॉल्यूशन बुक को मुख्य किताब के रूप में थोपने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अनधिकृत किताबों पर पूर्ण प्रतिबंध
परिषद के सचिव दिव्यकांत शुक्ला ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS), बेसिक शिक्षा अधिकारियों और पुस्तक विक्रेताओं को सर्कुलर जारी किया है। इसमें कहा गया है कि:
- हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा के लिए केवल UPMSP द्वारा अधिकृत प्रकाशित या एनसीईआरटी की किताबें ही वैध होंगी।
- बाजार में उपलब्ध सॉल्यूशन बुक, गाइड, रेफरेंस बुक, प्रश्न बैंक या नोट्स को मुख्य पाठ्यपुस्तक के रूप में नहीं बेचा जाएगा।
- कोई भी प्रकाशक या विक्रेता अनधिकृत किताब को बोर्ड की किताब का नाम देकर नहीं बेच सकता।
- किताबों पर अधिकृत मूल्य (MRP) से ज्यादा चार्ज करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
महंगी किताबों पर जुर्माना और कार्रवाई
परिषद ने साफ कहा है कि उल्लंघन करने वाले प्रकाशकों, डिस्ट्रीब्यूटरों और पुस्तक विक्रेताओं पर कड़ी कार्रवाई होगी। इसमें शामिल है:
- 50,000 से 5 लाख रुपये तक का जुर्माना
- किताबों की जब्ती
- दुकान/प्रकाशन का लाइसेंस रद्द करना
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मुकदमा
खासकर प्रयागराज, वाराणसी, लखनऊ, कानपुर, आगरा, मेरठ, गोरखपुर जैसे बड़े शहरों में विशेष निगरानी टीम बनाई गई है। ये टीमें बाजार में छापेमारी कर अनधिकृत किताबें जब्त कर रही हैं।
छात्र-माता-पिता के लिए राहत
बोर्ड का यह फैसला लाखों छात्रों और अभिभावकों के लिए बड़ी राहत है। पिछले सालों में कई अभिभावकों ने शिकायत की थी कि:
- एक ही किताब की 3-4 अलग-अलग प्रकाशकों की किताबें 800-1200 रुपये तक बिक रही थीं।
- स्कूल और कोचिंग सेंटर अनिवार्य रूप से महंगी गाइड खरीदने को मजबूर कर रहे थे।
- गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा था।
अब परिषद ने स्पष्ट किया है कि एक किताब एक मूल्य नीति लागू रहेगी। एनसीईआरटी आधारित किताबें सरकारी दरों पर उपलब्ध होंगी और कोई भी स्कूल या कोचिंग उन्हें अनिवार्य नहीं करा सकता।
अभियान और जागरूकता
परिषद ने सभी DIOS को निर्देश दिया है कि वे स्कूलों में अभिभावक-शिक्षक बैठक में इस आदेश की जानकारी दें।
साथ ही छात्रों को UPMSP की आधिकारिक वेबसाइट (upmsp.edu.in) से सिलेबस और
किताबों की सूची डाउनलोड करने की सलाह दी गई है।
निष्कर्ष: शिक्षा में पारदर्शिता और किफायत
यह कदम उत्तर प्रदेश सरकार की शिक्षा को सुलभ और किफायती बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
अनधिकृत और महंगी किताबों पर रोक से न केवल छात्रों का आर्थिक बोझ कम होगा,
बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता भी बनी रहेगी।
अभिभावकों से अपील है कि वे केवल अधिकृत किताबें ही खरीदें और किसी भी उल्लंघन की शिकायत
UPMSP हेल्पलाइन या स्थानीय DIOS कार्यालय में करें