कश्मीर घाटी में बड़े पैमाने पर विरोध
वेस्ट एशिया संकट का असर कश्मीर पर: खामेनेई मौत पर बड़े प्रदर्शन
वेस्ट एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रही मिलिट्री स्ट्राइक्स को लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत (US-इजरायल जॉइंट स्ट्राइक्स में) के बाद कश्मीर घाटी में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन और शोक सभाएं हुई हैं। श्रीनगर, सोपोर, बारामूला और अन्य इलाकों में हजारों लोग सड़कों पर उतरे, जहां अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों ने नेतन्याहू और ट्रंप के पुतले जलाए और ईरान के साथ एकजुटता दिखाई।
कश्मीर घाटी में स्कूल-कॉलेज बंद: सुरक्षा के लिए सख्त कदम
प्रदर्शनों के बीच सुरक्षा स्थिति को देखते हुए जम्मू-कश्मीर सरकार ने कश्मीर डिवीजन में सभी स्कूलों और कॉलेजों (सरकारी और प्राइवेट) को इस हफ्ते के लिए बंद कर दिया है। शिक्षा मंत्री सकीना इतु ने घोषणा की कि सभी शिक्षा संस्थान 7 मार्च 2026 तक बंद रहेंगे। पहले दो दिनों के लिए बंद किया गया था, लेकिन प्रदर्शनों के बढ़ने पर इसे विस्तारित किया गया। यह फैसला छात्रों की सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए लिया गया है। कई यूनिवर्सिटी ने परीक्षाएं भी स्थगित कर दी हैं।
इंटरनेट स्पीड थ्रॉटलिंग और सख्त पाबंदियां
प्रदर्शनों के दौरान मोबाइल इंटरनेट स्पीड थ्रॉटल की गई है। कई इलाकों में धारा 144 लागू है और लाल चौक, श्रीनगर के संवेदनशील क्षेत्र सील कर दिए गए हैं। पुलिस ने आंसू गैस के गोले इस्तेमाल किए, लेकिन अब तक कोई बड़ी हिंसा की खबर नहीं है। कुछ प्रदर्शनों में 12 लोग घायल हुए, जिनमें 5 पुलिसकर्मी शामिल हैं। प्रशासन ने कहा है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रदर्शनों का कारण: खामेनेई की मौत पर शिया समुदाय का गुस्सा
कश्मीर में शिया समुदाय की बड़ी आबादी है और अयातुल्ला खामेनेई को धार्मिक नेता मानते हैं। उनकी मौत को US-इजरायल की साजिश बताकर विरोध हो रहा है। प्रदर्शन मुख्य रूप से शिया बहुल इलाकों में हुए। कुछ नेताओं ने कहा है कि
यह विरोध शांतिपूर्ण है और हिंसा नहीं होनी चाहिए। मध्य पूर्व संकट का
असर भारत में कश्मीर तक पहुंच गया है, जहां भावनात्मक रूप से लोग जुड़े हुए हैं।
सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य की स्थिति
कश्मीर में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने कहा है कि स्थिति नियंत्रण में है और
कोई बड़ी घटना नहीं हुई। प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं।
स्कूल-कॉलेज बंद होने से छात्रों को घर पर रहना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति कुछ दिनों तक बनी रह सकती है,
लेकिन सरकार शांति बनाए रखने के लिए पूरी तरह सतर्क है।
