नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह ने संसद में शहीदों की विरासत पर जोरदार भाषण देकर सबका ध्यान खींचा है। 19 दिसंबर 2025 को राज्यसभा में अपने संबोधन में संजय सिंह ने शहीदों को याद करते हुए कहा, “खुशीराम बस शहीदों आज़म” – जो क्रांतिकारियों की विरासत को सम्मान देने का प्रतीक बना। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि शहीदों की कुर्बानी को भुलाया जा रहा है और इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। संजय सिंह का यह भाषण युवाओं को प्रेरणा देने वाला था, जिसमें उन्होंने खुशीराम बस और अन्य क्रांतिकारियों के योगदान को रेखांकित किया। यह भाषण संसद के शीतकालीन सत्र में हुआ, जहां शहीदों की याद में भावुक माहौल बना। विपक्ष ने इसका समर्थन किया, जबकि सत्ता पक्ष ने आपत्ति जताई।
संजय सिंह का भाषण: शहीदों की विरासत पर जोर
संजय सिंह ने अपने भाषण में शहीदों की विरासत को केंद्र में रखा। मुख्य अंश:
- “खुशीराम बस शहीदों आज़म” – क्रांतिकारियों की कुर्बानी को याद किया।
- इतिहास के साथ खिलवाड़ पर सरकार को घेरा।
- युवाओं को शहीदों से प्रेरणा लेने की अपील।
- स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को संरक्षित रखने की मांग।
- भावुक अंदाज में शहीदों को श्रद्धांजलि।
सिंह ने कहा कि शहीदों की विरासत से छेड़छाड़ राष्ट्रद्रोह है।
संसद का माहौल: भावुक और गर्म बहस
भाषण के दौरान संसद में भावुक माहौल बना। मुख्य बातें:
- विपक्ष ने डेस्क थपथपाकर समर्थन।
- सत्ता पक्ष ने आपत्ति जताई।
- स्पीकर ने शांत रहने की अपील।
- भाषण वायरल हो गया।
- इतिहास विरासत पर चर्चा छिड़ी।
यह भाषण सत्र की हाइलाइट बना।
शहीदों की विरासत: खुशीराम बस और आज़म
खुशीराम बस और शहीदों आज़म क्रांतिकारी आंदोलन के प्रतीक हैं। मुख्य योगदान:
- स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका।
- ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष।
- युवाओं को प्रेरणा।
- विरासत संरक्षण की जरूरत।
- इतिहास किताबों में जगह।
संजय सिंह ने इसे राष्ट्रीय गौरव बताया।
सरकार पर हमला: इतिहास तोड़-मरोड़ने का आरोप
संजय सिंह ने सरकार पर तीखा हमला बोला:
- इतिहास के साथ खिलवाड़।
- शहीदों की विरासत को नजरअंदाज।
- राजनीतिक लाभ के लिए बदलाव।
- युवाओं को गुमराह करना।
- संवैधानिक मूल्यों की अनदेखी।
यह हमला विपक्ष की रणनीति का हिस्सा है।
प्रतिक्रियाएं: सराहना और विवाद
भाषण पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं:
- AAP और विपक्ष: सराहना, “सच्चाई बोली।”
- BJP: “राजनीतिक बयान, इतिहास का सम्मान करते हैं।”
- जनता: सोशल मीडिया पर वायरल, समर्थन।
- विशेषज्ञ: “शहीदों की विरासत पर बहस जरूरी।”
