समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सख्त निर्देश पर लखनऊ महानगर इकाई ने जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआईसी) को पार्किंग स्थल बनाने के प्रस्ताव का जमकर विरोध किया है। 5 फरवरी 2026 को लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार को महानगर अध्यक्ष फाखिर सिद्दीकी की अगुवाई में एक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में मांग की गई कि जेपीएनआईसी का मूल उद्देश्य बरकरार रखा जाए, अधूरे निर्माण कार्य पूरे किए जाएं, अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुरक्षा सुनिश्चित हो और इसे सांस्कृतिक, साहित्यिक व सामाजिक गतिविधियों के लिए उपयोग किया जाए। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि बजट जारी न हुआ तो इसका घोर विरोध किया जाएगा। यह घटना लखनऊ की राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां जेपीएनआईसी विवाद ने फिर से सुर्खियां बटोरी हैं।
जेपीएनआईसी का निर्माण इतिहास: अखिलेश सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना
जेपीएनआईसी की आधारशिला वर्ष 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गोमतीनगर, लखनऊ में रखी थी। यह परियोजना सम्पूर्ण क्रांति के प्रणेता जयप्रकाश नारायण के जीवन दर्शन, स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका और समग्र विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई गई थी। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस यह अंतरराष्ट्रीय स्तर का केंद्र 2017 तक 80 प्रतिशत पूरा हो चुका था। समाजवादी पार्टी का दावा है कि यह केंद्र जेपी का स्मारक बनेगा, जहां युवा पीढ़ी उनके आदर्शों से प्रेरणा ले सकेगी। हालांकि, सत्ता परिवर्तन के बाद इसकी उपेक्षा हुई, जो अब पार्किंग प्रस्ताव के रूप में चरम पर पहुंच गई है। लखनऊ विकास प्राधिकरण जेपीएनआईसी विवाद ने स्थानीय निवासियों और राजनीतिक दलों के बीच बहस छेड़ दी है।
भाजपा सरकार पर राजनीतिक द्वेष का गंभीर आरोप
ज्ञापन में भाजपा सरकार पर राजनीतिक विद्वेष का संगीन आरोप लगाया गया है। वर्ष 2017 में सत्ता में आने के बाद भाजपा ने जेपीएनआईसी को बर्बाद करने का एजेंडा अपना लिया। परिसर में स्थापित लोकनायक जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर अखिलेश यादव को माल्यार्पण करने से रोका जाता है। रखरखाव की कमी से केंद्र खंडहर में तब्दील हो रहा है, कीमती सामान व मशीनें बर्बाद हो चुकी हैं। अब 8 वर्षों बाद खबरें हैं कि यहां पार्किंग स्थल बनेगा, जो सेंटर के मूल उद्देश्य को नष्ट कर देगा। समाजवादी पार्टी ने कहा कि यह जेपी के सम्मान पर सीधा प्रहार है। लखनऊ जेपीएनआईसी पार्किंग विवाद में भाजपा सरकार की मंशा पर सवाल उठे हैं, जो उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को प्रभावित कर सकता है। कार्यकर्ताओं ने एलडीए पर दबाव बनाने का फैसला किया है।
ज्ञापन सौंपने में प्रमुख नेता सक्रिय, 700 से अधिक कार्यकर्ता शामिल
कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के लखनऊ महानगर महासचिव गौरव सिंह, वीर बहादुर सिंह, प्रदीप कनौजिया, राम सागर यादव, विजय सिंह यादव, देवेंद्र सिंह, महानगर उपाध्यक्ष अमित सक्सेना, रजी अहमद, राजकुमार मौर्या, राजकुमार सिंह राजा, प्रशांत यादव, शफाअत हुसैन कुरैशी, तारा चंद्र यादव, मनीष यादव, सतीश रावत, राकेश कुमार रावत, महानगर कोषाध्यक्ष राजवीर सिंह, महानगर सचिव विनय कुमार यादव, आनंद कुमार श्रीवास्तव, निर्वाचन प्रभारी कलीम-उर-रहमान, अनीस अहमद लारी, उपेंद्र कुमार सिंह, विधानसभा अध्यक्ष मिर्जा जफर इकराम, हरिश्चंद्र लोधी, मोहम्मद अहमद, संतोष रावत, कैंट उपाध्यक्ष इमरान खान, पूर्वी उपाध्यक्ष अमित तिवारी रौनक समेत बड़ी संख्या में नेता व कार्यकर्ता उपस्थित रहे। अनुमान है कि 700 से अधिक लोग इस प्रदर्शन में शामिल हुए।
यह एकता समाजवादी पार्टी की संगठनात्मक ताकत को दर्शाती है।
फाखिर सिद्दीकी ने कहा कि जेपीएनआईसी को बचाना पार्टी का संकल्प है।
आगे की रणनीति: विरोध प्रदर्शन और आंदोलन की चेतावनी
समाजवादी पार्टी ने स्पष्ट किया कि यदि जेपीएनआईसी के अधूरे कार्यों के लिए बजट जारी न हुआ और
पार्किंग प्रस्ताव लागू हुआ तो statewide आंदोलन छेड़ा जाएगा।
अखिलेश यादव के नेतृत्व में पार्टी उत्तर प्रदेश में सांस्कृतिक
परियोजनाओं को प्राथमिकता देने का वादा करती रही है।
यह मुद्दा विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा के लिए चुनौती बन सकता है।
लखनऊ समाचार स्रोतों के अनुसार, एलडीए ने अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
जेपीएनआईसी को पुनर्जीवित करने की मांग अब सोशल मीडिया पर भी ट्रेंड कर रही है।