यूपी रेलवे का नया अध्याय: 11 स्टेशन, 81 किमी लाइन से बदलेगी पूर्वांचल की तस्वीर
उत्तर प्रदेश में रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी सौगात मिलने वाली है। पूर्वोत्तर रेलवे की बहुप्रतीक्षित सहजनवा-दोहरीघाट नई रेल लाइन परियोजना के तहत 11 नए रेलवे स्टेशन बनाए जाएंगे। यह 81.17 किलोमीटर लंबी रेल लाइन गोरखपुर के दक्षिणांचल को वाराणसी, छपरा और प्रयागराज से जोड़ेगी, जिससे यात्रियों का समय बचेगा और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी। परियोजना पर कुल 1320 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत है, और यह तीन चरणों में पूरी होगी। 17 दिसंबर 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इसकी मंजूरी दी गई थी। अब भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जो पूर्वांचल के लाखों लोगों के लिए वरदान साबित होगी।
यह परियोजना न केवल कनेक्टिविटी सुधारेगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बूस्ट देगी। गोरखपुर जिले के 112 गांवों से 403.29 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा, जिसमें से 57.19 हेक्टेयर पहले ही हासिल हो चुका है। शेष भूमि की प्रक्रिया में तेजी लाई गई है, और रेलवे के स्पेशल प्रोजेक्ट में शामिल होने के बाद काम ने रफ्तार पकड़ ली है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे रोजगार के हजारों अवसर पैदा होंगे, खासकर ग्रामीण युवाओं के लिए।
परियोजना के तीन चरण: समयबद्ध तरीके से पूरा होगा निर्माण
सहजनवा-दोहरीघाट रेल लाइन को तीन फेज में विकसित किया जा रहा है, ताकि काम सुचारू रूप से चले।
- पहला चरण: सहजनवा से बांसगांव तक 32.95 किमी लाइन। यहां मिट्टी भराई और पुलिया निर्माण के टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। सहजनवा-पिपरौली खंड पर तिनहरा, बनौडा, बेलवा डाड़ी जैसे गांवों में मिट्टी कार्य शुरू हो गए हैं। इस चरण में 2027 तक लाइन बिछाने का लक्ष्य है।
- दूसरा चरण: बांसगांव से बड़हलगंज तक 36.80 किमी। भूमि अधिग्रहण में प्रगति अच्छी है, 185.78 हेक्टेयर में से 16 हेक्टेयर का अधिग्रहण पूरा।
- तीसरा चरण: बड़हलगंज से न्यू दोहरीघाट तक 11.42 किमी। यहां 12.82 हेक्टेयर भूमि पहले ही अधिग्रहीत हो चुकी है।
कुल मिलाकर, भूमि अधिग्रहण में 44.37 हेक्टेयर (पहला चरण) से लेकर 103.29 हेक्टेयर तक की प्रक्रिया चल रही है। रेलवे प्रशासन ने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत डॉ. रजनीश कुमार चतुर्वेदी को सभी डिटेल्स उपलब्ध कराई हैं, जिसमें स्टेशनों के प्रस्तावित स्थल भी शामिल हैं।
11 नए स्टेशन: गांवों को रेल से जोड़ेगी योजना
रेलवे ने 11 नए स्टेशनों के स्थलों को चिह्नित कर लिया है, जो स्थानीय लोगों को सीधा फायदा पहुंचाएंगे। ये स्टेशन हैं:
- पिपरौली (सहजनवा के पास)
- खजनी (छताई के पास)
- उनवल (बढ़नी के पास)
- बैदौली बाबू
- बांसगांव (मंझगांवा के पास)
- ऊरुवा बाजार (गौरखास के पास)
- बनवारपार (बाथखुर्द के पास)
- गोला बाजार (रीमा के पास)
- भरौली (मरचीयार बुजुर्ग के पास)
- बड़हलगंज (तिहा मोहम्मदपुर के पास)
- न्यू दोहरीघाट (बुढ़ावल के पास)
ये स्टेशन ग्रामीण इलाकों को रेल नेटवर्क से जोड़ेंगे, जिससे किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर का जलवा: सरयू पर 1200 मीटर का मेगा ब्रिज
परियोजना में इंजीनियरिंग का कमाल देखने को मिलेगा। सरयू नदी पर 1200 मीटर लंबा सबसे बड़ा पुल बनेगा, जो नदी पार करने का नया द्वार बनेगा। इसके अलावा:
- 2 उपरिगामी पुल
- 15 अंडरपास
- 11 बड़े पुल
- 47 छोटे पुल
ये सभी निर्माण कार्य शुरू हो चुके हैं, जो यात्रा को सुरक्षित और तेज बनाएंगे। भूमि अधिग्रहण में देरी न हो, इसके लिए रेलवे ने स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बढ़ाया है।
लाभ: पूर्वांचल का विकास, यात्रियों की राह आसान
यह रेल लाइन गोरखपुर से वाराणसी, छपरा और प्रयागराज के लिए वैकल्पिक मार्ग खोलेगी। पूर्वोत्तर रेलवे को नया रूट मिलेगा, जिससे ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी। गोरखपुर के दक्षिणांचल के लोग 50 किमी दूर स्टेशन जाने की मजबूरी से मुक्त हो जाएंगे। आर्थिक रूप से, इससे व्यापार, पर्यटन और कृषि को बढ़ावा मिलेगा। हजारों नौकरियां सृजित होंगी, और क्षेत्रीय असमानता कम होगी। स्थानीय निवासी उत्साहित हैं, क्योंकि यह परियोजना उनके गांवों को मुख्यधारा से जोड़ेगी।
भविष्य की उम्मीदें: समय पर पूरा हो परियोजना
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के नेतृत्व में रेलवे परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
सहजनवा-दोहरीघाट लाइन पूर्वांचल के विकास का प्रतीक बनेगी। भूमि अधिग्रहण पूरा होते ही निर्माण गति पकड़ेगा।
अगर सब कुछ योजना अनुसार चला
, तो 2027 तक पैसेंजर ट्रेनें चलने लगेंगी।
यह न केवल यूपी, बल्कि पूरे पूर्वी भारत के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
आइए, हम सब मिलकर इस विकास यात्रा का हिस्सा बनें!
