सहारनपुर के छुटमलपुर में
युद्ध ने रोकी एक शादी की खुशी
सहारनपुर जिले के छुटमलपुर इलाके में एक दर्दनाक घटना ने सबको भावुक कर दिया। ईरान और इस्राइल के बीच चल रहे युद्ध के कारण कुवैत में नौकरी करने वाला दूल्हा अपनी ही शादी में घर नहीं पहुंच सका। दुल्हन मेहंदी रचाए, सज-धजकर इंतजार करती रही, लेकिन बरात नहीं आई। आखिरकार शादी को ऐन वक्त पर स्थगित करना पड़ा। यह मामला सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि वैश्विक युद्ध के आम लोगों पर पड़ने वाले असर की मिसाल है।
शादी की पूरी तैयारी और अचानक झटका
छुटमलपुर गांव मुसैल निवासी करणी सेना के ब्लॉक अध्यक्ष जबर सिंह की बेटी पारुल की शादी अंबाला के बतौड़ निवासी राजीव राणा के साथ तय हुई थी। राजीव कई साल से कुवैत में नौकरी कर रहे हैं। पिछले साल जब वह पारुल को देखने भारत आए थे, तब रिश्ता पक्का हुआ और शादी की तारीख मार्च 2026 तय की गई। परिवार ने पूरी तैयारी की—मेहंदी, सजावट, मेहमानों की व्यवस्था, ढोल-नगाड़े और दुल्हन की शानदार सज-धज। गांव में उत्साह का माहौल था।
लेकिन ईरान-इस्राइल युद्ध तेज होने के बाद कई देशों में फ्लाइट्स कैंसिल हो गईं। कुवैत से भारत आने वाली उड़ानें प्रभावित हुईं। राजीव बरात लेकर आने की योजना बना रहे थे, लेकिन फ्लाइट कैंसिल होने से वे कुवैत में ही फंस गए। परिजनों को आखिरी समय पर सूचना मिली कि दूल्हा नहीं आ पाएगा।
दुल्हन का इंतजार और परिवार का दर्द
दुल्हन पारुल मेहंदी रचवाकर, लहंगा पहनकर, सजी-धजी बैठी रही। मेहमान आ चुके थे, घर सजा था, लेकिन बरात का इंतजार बढ़ता गया। जब पता चला कि राजीव नहीं आ पाएंगे, तो पूरा परिवार सदमे में आ गया। पारुल की आंखों में आंसू थे, जबकि परिवार वाले शादी स्थगित करने का फैसला लेने को मजबूर हुए। मेहंदी लगी हुई थी, लेकिन उत्सव की जगह मातम छा गया।
परिवार ने बताया कि राजीव ने कई बार प्रयास किया, लेकिन कोई फ्लाइट उपलब्ध नहीं थी। युद्ध के कारण एयरस्पेस बंद होने और उड़ानें रद्द होने से हजारों भारतीय प्रवासी प्रभावित हुए हैं। यह घटना उन सभी परिवारों की याद दिलाती है जो विदेश में काम करने वाले सदस्यों के कारण ऐसे हालात से गुजर रहे हैं।
युद्ध का आम लोगों पर असर
ईरान-इस्राइल संघर्ष ने न सिर्फ मध्य पूर्व को प्रभावित किया, बल्कि दुनिया भर में यात्रा, शादियां और रोजगार को
ठप कर दिया। भारत से हजारों लोग कुवैत, सऊदी अरब जैसे देशों में काम करते हैं।
फ्लाइट कैंसिलेशन से कई शादियां टल गईं, परिवार बिछड़ गए और
आर्थिक नुकसान हुआ। सहारनपुर जैसे छोटे शहरों में भी इसका असर साफ दिख रहा है।
परिवार की अपील और भविष्य की उम्मीद
जबर सिंह ने कहा कि वे समझते हैं कि यह युद्ध की वजह से हुआ है,
लेकिन परिवार का दर्द बहुत गहरा है।
पारुल और राजीव दोनों ही निराश हैं।
परिवार अब नई तारीख तय करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन स्थिति सामान्य होने का इंतजार है।
स्थानीय लोग और रिश्तेदार इस घटना पर दुख जता रहे हैं और
दंपति के जल्द मिलन की कामना कर रहे हैं।
युद्ध की कीमत आम इंसान चुकाता है
यह कहानी सिर्फ एक शादी स्थगित होने की नहीं, बल्कि युद्ध के कारण टूटते सपनों की है।
पारुल मेहंदी रचाए इंतजार करती रही, जबकि राजीव कुवैत में फंसे रहे। उम्मीद है कि
जल्द ही शांति स्थापित होगी और ऐसे परिवार फिर से खुशियां मना सकेंगे।
