सहारा ने एंबी वैली अदाणी को बेचने की अनुमति सुप्रीम कोर्ट से मांगीकुल 88 संपत्तियों की बिक्री की तैयारी, कहा – कोर्ट आदेशों का पालन होगा, निवेशकों को लौटाई जाएगी रकमनई दिल्ली, अमर उजाला ब्यूरो।देश का चर्चित सहारा समूह एक बार फिर सुर्खियों में है। लंबे समय से निवेशकों का बकाया लौटाने में असफल रहे सहारा समूह ने अब अपनी महत्वाकांक्षी और लग्जरी परियोजना एंबी वैली सहित कुल 88 संपत्तियों को अदाणी समूह को बेचने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मांगी है। समूह का कहना है कि इस बिक्री से प्राप्त रकम सीधे निवेशकों के खाते में जाएगी और अदालत के आदेशों का पालन पूरी तरह किया जाएगा।—पृष्ठभूमि : सहारा और निवेशकों का बकायासहारा समूह पर हजारों करोड़ रुपये निवेशकों का बकाया लौटाने का दबाव है।सुप्रीम कोर्ट ने साल 2012 में ही सहारा को आदेश दिया था कि वह निवेशकों का पैसा वापस करे।सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि वह निवेशकों को रकम लौटाए।सहारा की ओर से अब तक करीब 5,000 करोड़ रुपये सेबी को जमा कराए जा चुके हैं।लेकिन अब भी लगभग 24,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि निवेशकों को लौटाई जानी बाकी है।—एंबी वैली : सपनों का शहरएंबी वैली महाराष्ट्र के लोणावला के पास बसा एक भव्य टाउनशिप प्रोजेक्ट है।इसे सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता था।इसमें झील, गोल्फ कोर्स, आलीशान होटल, बंगले, क्लब और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएँ मौजूद हैं।यह प्रोजेक्ट अरबों रुपये की लागत से तैयार किया गया था।एक समय इसे भारत की सबसे महंगी और आलीशान टाउनशिप माना जाता था।लेकिन सहारा की वित्तीय दिक्कतों के चलते यह प्रोजेक्ट भी संकट में फंस गया।—अदाणी की एंट्री : सहारा के लिए राहत की उम्मीदसुप्रीम कोर्ट में दाखिल अर्जी में सहारा ने कहा है कि:अदाणी समूह ने उसकी 88 संपत्तियों को खरीदने में रुचि दिखाई है।अदाणी का प्रस्ताव निवेशकों का पैसा लौटाने का सबसे व्यावहारिक तरीका है।इससे न केवल अदालत के आदेश का पालन होगा, बल्कि समूह पर वर्षों से बना दबाव भी कम होगा।सहारा ने कोर्ट से आग्रह किया है कि अदाणी को संपत्तियां बेचने की अनुमति शीघ्र दी जाए।—अदालत का रुख और पिछले आदेशसुप्रीम कोर्ट पहले भी कई बार सहारा को संपत्तियां बेचकर बकाया लौटाने का निर्देश दे चुका है।अदालत ने एंबी वैली की नीलामी भी कराई थी।2017 और 2018 में नीलामी की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन खरीदार नहीं मिले।बाद में बाजार की स्थितियों और कानूनी जटिलताओं के कारण बिक्री अटक गई।सहारा का कहना है कि अब अदाणी जैसे बड़े समूह की रुचि मिलना निवेशकों के लिए शुभ संकेत है।—निवेशकों की उम्मीदेंनिवेशक लंबे समय से अपने पैसे का इंतजार कर रहे हैं।छोटे शहरों और गांवों के लाखों लोगों ने सहारा की योजनाओं में निवेश किया था।कई निवेशक बुजुर्ग हो चुके हैं, कुछ की मृत्यु भी हो चुकी है।परिवारों को अब भी अपनी मेहनत की कमाई वापसी का इंतजार है।सहारा की यह डील पूरी होती है तो हजारों निवेशकों की उम्मीदें पूरी हो सकती हैं।—समूह का तर्क : पालन करेंगे हर आदेश कासहारा समूह ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि –हम कोर्ट के आदेशों का अक्षरशः पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।संपत्तियों की बिक्री से मिली रकम सीधे निवेशकों को लौटाई जाएगी।अदाणी जैसे बड़े और सक्षम खरीदार का प्रस्ताव अस्वीकार करना निवेशकों के साथ अन्याय होगा।अदालत अगर तुरंत अनुमति देती है तो सौदा जल्द से जल्द पूरा किया जा सकता है।—विशेषज्ञों की रायवित्तीय मामलों के जानकार मानते हैं कि –अदाणी समूह के आने से सहारा की संपत्तियों को बाजार मूल्य मिल सकता है।बिक्री की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, तभी निवेशकों का भरोसा लौटेगा।अदालत को सुनिश्चित करना होगा कि बिक्री से प्राप्त रकम सीधे सेबी या निवेशकों तक पहुंचे।अगर यह डील सफल रही तो सहारा पर वर्षों से चला आ रहा विवाद सुलझ सकता है।—आगे की राहसुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई जल्द कर सकता है।अगर अनुमति मिल जाती है तो अदाणी और सहारा के बीच डील को औपचारिक रूप से अंतिम रूप दिया जाएगा।बिक्री से मिली रकम से सेबी निवेशकों को पैसा लौटाना शुरू करेगी।अदालत समय-समय पर इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगी।—निष्कर्षसहारा समूह की ओर से एंबी वैली और अन्य 88 संपत्तियों को अदाणी को बेचने की मांग ने एक बार फिर निवेशकों और बाजार की नजरें इस डील पर टिका दी हैं। सुप्रीम कोर्ट की अनुमति पर ही इस सौदे का भविष्य टिका है। अगर अदालत हरी झंडी देती है, तो यह सौदा न सिर्फ सहारा बल्कि करोड़ों निवेशकों के लिए राहत लेकर आ सकता है।