अमेरिका ने भारत को
अमेरिका ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता के बीच भारत को बड़ी खुशखबरी दी है। अमेरिका ने रूस को 30 दिनों के लिए समुद्र में फंसे अपने तेल को भारत को बेचने की अनुमति दी है। बीते दिनों सामने आया था कि भारत रूसी तेल खरीदने की तैयारी कर रहा है। रूस ने भी भारत को करीब 95 लाख बैरल कच्चा तेल भेजने की बात कही थी।
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारत को समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट देने का फैसला किया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बनाए रखने के लिए यह अस्थायी कदम उठाया गया है। यह छूट ईरान युद्ध और मिडिल ईस्ट संकट के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में डिसरप्शन से उत्पन्न ऊर्जा संकट को कम करने के लिए है।
अमेरिका की 30-दिन की वेवर: क्या है पूरा मामला?
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने रूस से जुड़ी जनरल लाइसेंस 133 जारी की है। यह लाइसेंस 5 मार्च 2026 तक जहाजों पर लोड किए गए रूसी क्रूड ऑयल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की डिलीवरी और सेल को भारत में अनुमति देता है। यह छूट 4 अप्रैल 2026 तक वैध रहेगी। स्कॉट बेसेंट ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया, “वैश्विक बाजार में तेल के प्रवाह को बनाए रखने के लिए ट्रेजरी विभाग भारतीय रिफाइनर्स को रूसी तेल खरीदने की अस्थायी 30-दिन की छूट जारी कर रहा है।”
यह कदम जानबूझकर अल्पकालिक है और रूसी सरकार को महत्वपूर्ण वित्तीय लाभ नहीं देगा, क्योंकि यह केवल समुद्र में पहले से फंसे तेल पर लागू होता है। बेसेंट ने कहा कि यह ईरान के “वैश्विक ऊर्जा को बंधक बनाने” के प्रयास से उत्पन्न दबाव को कम करेगा। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, और मिडिल ईस्ट से आने वाले अधिकांश क्रूड होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है, जो ईरान युद्ध से प्रभावित है।
भारत के लिए फायदे और रूसी तेल की स्थिति
यह वेवर भारत को रूसी तेल की आपूर्ति जारी रखने का मौका देता है, खासकर जब मिडिल ईस्ट संकट से क्रूड की कीमतें बढ़ रही हैं और शिपमेंट्स में देरी हो रही है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 1.2 करोड़ बैरल रूसी क्रूड पहले से समुद्र में फंसा हुआ था।
भारत ने पहले रूसी तेल पर 25% पेनल्टी टैरिफ का सामना किया था,
लेकिन अब यह छूट रिफाइनर्स को राहत देगी।
रूस ने भारत को करीब 95 लाख बैरल तेल भेजने की पेशकश की थी, और यह वेवर
उन शिपमेंट्स को पूरा करने में मदद करेगा। भारत के पास 25 दिनों का क्रूड रिजर्व है,
लेकिन यह कदम कीमतों में स्थिरता और सप्लाई चेन को मजबूत करेगा।
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर प्रभाव
ईरान-इजराइल संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट की समस्या से वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो रही है। अमेरिका का
यह कदम तेल की कीमतों को नियंत्रित रखने और बाजार में स्थिरता लाने का प्रयास है।
हालांकि, यह रूस पर प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाने वाला नहीं है –
केवल अस्थायी राहत है। भारत-अमेरिका संबंधों में भी यह सकारात्मक कदम माना जा रहा है,
जहां भारत अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाने का वादा कर सकता है।
यह फैसला भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर जब वैश्विक संकट गहरा रहा है।
30 दिनों में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है, लेकिन भारत को वैकल्पिक स्रोतों पर भी ध्यान देना होगा।
