बांग्लादेश के टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर में इन दिनों हड़कंप मचा हुआ है। प्रमुख कपड़ा मालिकों और फैक्ट्री ओनर्स ने अपनी यूनिट्स बंद करने की खुली धमकी दे दी है। उनका मुख्य आरोप है कि भारत से आने वाला सस्ता यार्न (धागा) उनके स्थानीय उद्योग को पूरी तरह बर्बाद कर रहा है। बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (BGMEA) और अन्य संगठनों ने इस मुद्दे पर जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। वे सरकार से भारतीय धागे पर टैक्स छूट हटाने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि इस संकट से करीब 10 लाख नौकरियां सीधे खतरे में पड़ गई हैं।
फैक्ट्रियां बंद करने की धमकी क्यों?
बांग्लादेश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेडीमेड गारमेंट (RMG) निर्यातक देश है। इस सेक्टर से देश का लगभग 80% निर्यात होता है और अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा इसी पर टिका है। लेकिन कच्चे माल यानी यार्न का करीब 60% हिस्सा भारत से आयात किया जाता है। हाल के महीनों में भारतीय धागे की कीमतें बांग्लादेशी उत्पादकों से 20-30% तक कम हो गई हैं।
इसके पीछे मुख्य कारण हैं:
- भारत में बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता
- सरकारी सब्सिडी और इंसेंटिव
- कुशल श्रमिक और बेहतर टेक्नोलॉजी
बांग्लादेशी मालिकों का दावा है कि यह “अनुचित प्रतिस्पर्धा” है, जिसने उनकी मशीनरी और फैक्ट्रियों को बेकार कर दिया है। BGMEA के चेयरमैन ने हाल ही में कहा, “भारतीय यार्न ने पहले हमारी लागत कम की थी, लेकिन अब यह हमारे लिए हथियार बन गया है। अगर टैक्स छूट नहीं हटाई गई, तो हम मजबूरन उत्पादन रोक देंगे।”
10 लाख नौकरियों पर मंडराया संकट
ढाका, चट्टोग्राम, नारायंगंज और गाजीपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में लाखों मजदूर इस सेक्टर पर निर्भर हैं। ज्यादातर मजदूर महिलाएं हैं, जो परिवार की मुख्य कमाई का स्रोत हैं। अगर फैक्ट्रियां बंद हुईं या उत्पादन काफी कम हुआ, तो इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी फैल सकती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 8-10 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।
टैक्स छूट हटाने की मांग का पूरा सच
बांग्लादेशी टेक्सटाइल मालिकों की मुख्य मांग है कि भारतीय यार्न पर मौजूदा टैक्स छूट (ड्यूटी फ्री या कम ड्यूटी) को तुरंत हटाया जाए। इससे आयातित धागा महंगा हो जाएगा और स्थानीय स्पिनिंग मिलों को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, दूसरी तरफ से चिंता है कि टैक्स बढ़ने से गारमेंट उत्पादन की कुल लागत 5-7 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।
यह बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय बाजार में बांग्लादेशी गारमेंट्स की प्रतिस्पर्धात्मकता को कमजोर कर सकती है,
खासकर यूरोप और अमेरिका जैसे बड़े बाजारों में, जहां वियतनाम, चीन और भारत जैसे प्रतिद्वंद्वी पहले से मजबूत हैं।
सरकार की स्थिति और आगे क्या?
अभी तक बांग्लादेश सरकार ने कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। अर्थ मंत्री ने BGMEA और
अन्य हितधारकों के साथ आपात बैठक बुलाई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करेगी—न तो स्थानीय स्पिनर्स को
पूरी तरह बर्बाद होने देगी और न ही RMG निर्यात को जोखिम में डालेगी।
संभावित समाधान के रूप में:
- आयात पर आंशिक टैक्स बढ़ोतरी
- स्थानीय स्पिनिंग मिलों के लिए सब्सिडी
- भारत के साथ द्विपक्षीय बातचीत