रूस-यूक्रेन तनाव: रूसी ड्रोन हमलों के बीच पोलैंड में NATO विमान अलर्ट, पूर्वी सीमा पर बढ़ी निगरानी

गोरखपुर/नई दिल्ली। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी लगातार बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। यूक्रेन के पश्चिमी हिस्सों में रूस की ओर से बड़े पैमाने पर ड्रोन हमलों के बाद पोलैंड ने अपने हवाई क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करते हुए सैन्य विमानों को अलर्ट पर रखा। इस दौरान NATO से जुड़े विमान भी पोलिश हवाई क्षेत्र में सक्रिय किए गए।

पश्चिमी यूक्रेन में रूसी ड्रोन हमले से बढ़ी चिंता

हालिया हमलों में रूस ने यूक्रेन के कई इलाकों को ड्रोन से निशाना बनाया। यूक्रेनी वायुसेना के अनुसार एक रात में 149 ड्रोन लॉन्च किए गए थे, जिनमें Shahed ड्रोन के साथ कुछ जेट-संचालित ड्रोन भी शामिल थे। यूक्रेन ने बड़ी संख्या में ड्रोन को हवा में ही नष्ट करने का दावा किया, लेकिन कई स्थानों पर हमले और नुकसान की खबरें सामने आईं।

रूस की ओर से इस्तेमाल किए जा रहे जेट-संचालित ड्रोन ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ाई है। इनकी अधिक गति के कारण वायु रक्षा प्रणालियों के पास प्रतिक्रिया देने के लिए पहले की तुलना में कम समय रह जाता है।

पोलैंड ने क्यों बढ़ाई हवाई सुरक्षा?

पश्चिमी यूक्रेन के कई इलाके पोलैंड की सीमा के काफी करीब हैं। ऐसे में यूक्रेन पर होने वाले बड़े हवाई हमलों के दौरान ड्रोन या उनका मलबा पोलिश क्षेत्र तक पहुंचने का जोखिम बना रहता है।

इसी खतरे को देखते हुए पोलैंड के सशस्त्र बलों के ऑपरेशनल कमांड ने अपनी कुछ सैन्य क्षमताओं को उच्च तत्परता पर रखा। पोलैंड और NATO से जुड़े विमानों को संभावित खतरे की निगरानी तथा हवाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए सक्रिय किया गया। ग्राउंड-बेस्ड एयर डिफेंस और रडार सिस्टम भी तैयार रखे गए।

NATO के लिए क्यों महत्वपूर्ण है पोलैंड?

पोलैंड NATO के पूर्वी हिस्से का महत्वपूर्ण सदस्य है और उसकी सीमा यूक्रेन तथा बेलारूस दोनों के करीब है। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान पोलैंड की भौगोलिक स्थिति उसे NATO की पूर्वी सुरक्षा व्यवस्था में बेहद अहम बनाती है।

यदि यूक्रेन पर होने वाले हवाई हमलों का असर NATO के किसी सदस्य देश के हवाई क्षेत्र तक पहुंचता है, तो स्थिति केवल रूस-यूक्रेन संघर्ष तक सीमित नहीं रहती। यही वजह है कि

पोलैंड लगातार अपने एयर डिफेंस और निगरानी तंत्र को मजबूत रख रहा है।

NATO की रणनीति: सीधे टकराव से बचते हुए सुरक्षा मजबूत करना

पोलैंड में विमानों की तैनाती या अलर्ट का मुख्य उद्देश्य तत्काल रूस के साथ सीधा

सैन्य टकराव करना नहीं, बल्कि अपने हवाई क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हालिया कार्रवाई को भी

पोलिश अधिकारियों ने एहतियाती और सुरक्षा-केंद्रित कदम बताया था।

इसका अर्थ यह नहीं है कि NATO ने रूस के खिलाफ सीधे युद्ध की घोषणा कर दी है।

बल्कि गठबंधन का प्रयास है कि यूक्रेन में जारी युद्ध के दौरान किसी भी

संभावित हवाई घुसपैठ या आकस्मिक घटना का जवाब तेजी से दिया जा सके।

तनाव क्यों बढ़ रहा है?

रूस और यूक्रेन दोनों ही अब बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। यूक्रेन में हाल के हमलों में रूस ने सैन्य ठिकानों के अलावा ऊर्जा, परिवहन और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाने की कोशिश की है। दूसरी ओर, यूक्रेन भी रूस के भीतर सैन्य और औद्योगिक लक्ष्यों पर ड्रोन हमले कर रहा है।

इस लगातार बढ़ते ड्रोन युद्ध का असर दोनों देशों की सीमाओं से बाहर भी दिखाई दे रहा है। पोलैंड के अलावा यूरोप के अन्य देशों ने भी हाल के महीनों में ड्रोन गतिविधियों को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताई हैं।

पोलैंड-यूक्रेन सीमा पर भी बढ़ी सतर्कता

पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने हाल में चेतावनी दी थी कि रूस यूक्रेन से

जुड़े सीमा मार्गों और महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश कर सकता है।

इससे पोलैंड और NATO के पूर्वी हिस्से में सुरक्षा चिंताएं और गहरी हुई हैं।

विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि युद्ध क्षेत्र के

करीब होने के कारण किसी ड्रोन के रास्ता भटकने,

तकनीकी खराबी या जानबूझकर सीमा पार करने से NATO सदस्य देश सीधे घटनाक्रम में खिंच सकते हैं।

आगे क्या?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि रूस के बढ़ते ड्रोन हमलों और

NATO की बढ़ती हवाई निगरानी के बीच तनाव किस दिशा में जाता है। पोलैंड अपनी सीमा पर

निगरानी और एयर डिफेंस को मजबूत रखे हुए है, जबकि NATO पूर्वी हिस्से में

किसी भी संभावित खतरे के लिए अपनी प्रतिक्रिया क्षमता बनाए रखना चाहता है।

रूस-यूक्रेन युद्ध का यह नया चरण बताता है कि ड्रोन अब केवल

युद्धक्षेत्र का हथियार नहीं रह गए हैं। इनका इस्तेमाल क्षेत्रीय सुरक्षा, हवाई क्षेत्र और

NATO की सामूहिक रक्षा व्यवस्था के लिए भी नई चुनौती पैदा कर रहा है।

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