यूपी में सड़क हादसों का कहर
उत्तर प्रदेश में सड़क हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। राजमार्गों से लेकर एक्सप्रेसवे तक हर दिन औसतन 2 लोगों की मौत हो रही है। 11 महीने में 1360 हादसे हुए, जिसमें 694 लोगों ने जान गंवाई। यह आंकड़े राज्य में सड़क सुरक्षा की गंभीर स्थिति को उजागर करते हैं। तेज रफ्तार, लापरवाही और खराब सड़कें मुख्य कारण हैं। एक्सप्रेसवे पर हादसे सबसे ज्यादा हैं, जहां चेन रिएक्शन से कई वाहन प्रभावित होते हैं। कोहरे के मौसम में खतरा और बढ़ गया है। पुलिस और प्रशासन ने अभियान चलाए हैं, लेकिन हादसे कम नहीं हो रहे। यह स्थिति आम आदमी की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। परिवारों पर सदमा और आर्थिक नुकसान हो रहा है।
आंकड़े चौंकाने वाले: 11 महीने में 694 मौतें
यूपी में सड़क हादसे की स्थिति गंभीर है। मुख्य आंकड़े:
- कुल हादसे: 1360।
- मौतें: 694।
- हर दिन औसतन 2 मौतें।
- घायल: हजारों।
- एक्सप्रेसवे पर सबसे ज्यादा हादसे।
यह आंकड़े पुलिस रिपोर्ट पर आधारित हैं।
मुख्य कारण: तेज रफ्तार और लापरवाही
हादसों के पीछे मुख्य वजहें:
- तेज रफ्तार – स्पीड लिमिट की अनदेखी।
- ओवरटेकिंग की कोशिश।
- कोहरा और कम विजिबिलिटी।
- ओवरलोडिंग और खराब वाहन।
- ड्राइवर की नींद या शराब।
एक्सप्रेसवे पर लंबे स्ट्रेट रोड से खतरा बढ़ता है।
प्रभावित क्षेत्र: एक्सप्रेसवे सबसे खतरनाक
सबसे ज्यादा हादसे:
- यमुना एक्सप्रेसवे।
- लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे।
- पूर्वांचल एक्सप्रेसवे।
- राजमार्ग और नेशनल हाईवे।
- कोहरे में चेन रिएक्शन।
इन रूट पर ट्रक और बस हादसे ज्यादा।
पुलिस और प्रशासन कार्रवाई: अभियान और सख्ती
प्रशासन ने उपाय किए:
- स्पीड गन और चेकिंग बढ़ाई।
- कोहरे में अलर्ट।
- चालान और जागरूकता अभियान।
- हेलमेट और सीट बेल्ट पर फोकस।
- हादसा बाहुल्य क्षेत्रों में विशेष टीम।
लेकिन हादसे कम नहीं हो रहे।