स्वास्थ्य विभाग में हुए करोड़ों रुपये के गबन और भ्रष्टाचार से जुड़ी इस खबर में बताया गया है कि सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) की जांच के बाद सपा के पूर्व विधायक समेत दो सीएमओ और कई अन्य अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
भ्रष्टाचार का मामला
बलरामपुर, गोंडा और बहराइच जिलों के स्वास्थ्य विभाग में मरम्मत और विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितता और गबन हुआ। विजिलेंस जांच में पता चला कि इन कामों के लिए नियमों को ताक पर रखकर खर्च दिखाया गया, जिसमें टेंडर प्रक्रिया को भी दरकिनार किया गया। इन मामलों में बहराइच के सपा के पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव, उनके पिता और तत्कालीन सीएमओ डॉ. संजीव कुमार श्रीवास्तव तथा डॉ. आभा अस्थाना समेत कई अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ।
आरोपियों पर कार्रवाई
इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने मरम्मत और विकास कार्यों में मिलाभगत कर बड़े पैमाने पर घोटाला किया। यह कार्रवाई तब शुरू हुई जब भाजपा विधायक सुभाष तिवारी ने शिकायत की थी। इसके बाद जांच अधिकारी ध्रुव चंद्र मौर्य ने विस्तृत जांच की।
जांच के निष्कर्ष
विजिलेंस जांच में यह तथ्य सामने आया कि 2017-18 के दौरान बहराइच के एसआरएससी हहरहमद, कट्टा बाजार में मरम्मत व विकास के नाम पर फर्जी भुगतान हुए। तत्कालीन सीएमओ ने नियुक्तियों और ठेके में घोटाले किए। इस दौरान बिना टेंडर के काम कराया गया और 92 लाख रुपये से अधिक का एस्टीमेट तो स्वीकृत किया, लेकिन मौके की जांच में कामाधारित अनियमितता पाई गई।
निष्कर्ष
इस खबर से स्पष्ट है कि विजिलेंस की जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग में हुए करोड़ों रुपये के गबन और घोटाले का पर्दाफाश हुआ और संबंधित अधिकारियों व पूर्व विधायक के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की गई है।