उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से जुड़ी एक बड़ी राहत वाली खबर सामने आई है। गोरखपुर-देवरिया मार्ग पर स्थित लगभग 100 साल पुराना जर्जर पुल अब ध्वस्त किया जाएगा। इसकी जगह एक आधुनिक, मजबूत और सुरक्षित नया पुल बनाया जाएगा। यह पुल वर्षों से यातायात के लिए बड़ा खतरा बना हुआ था, लेकिन अब स्थानीय निवासियों को बड़ी राहत मिलने वाली है। प्रतिदिन हजारों वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं, इसलिए इस पुल का महत्व बहुत अधिक है।
पुराने पुल की समस्या
यह पुल ब्रिटिश काल में बना था और करीब एक सदी पुराना हो चुका है। लंबे समय से इसकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई थी। भारी बारिश, नदी के तेज बहाव और लगातार भारी वाहनों के दबाव से पुल की नींव कमजोर हो गई थी। कई बार छोटी-मोटी दरारें आईं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया। स्थानीय लोग और वाहन चालक अक्सर शिकायत करते थे कि पुल पर चलना जोखिम भरा है। पिछले कुछ वर्षों में कई हादसे भी हुए, जिसमें वाहन क्षतिग्रस्त हुए और कुछ मामलों में चोटिल भी हुए। जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने कई बार निरीक्षण किया और पुल को जर्जर घोषित कर दिया था। लेकिन अब ठोस कदम उठाया गया है।
ध्वस्त करने और नए पुल का फैसला
जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग ने संयुक्त रूप से इस पुराने पुल को पूरी तरह ध्वस्त करने का निर्णय लिया है। ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया जल्द शुरू हो जाएगी, ताकि यातायात में ज्यादा व्यवधान न आए। इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था और ट्रैफिक डायवर्जन प्लान तैयार किया जा रहा है। नया पुल बनाने की योजना पहले से ही तैयार है। यह पुल आधुनिक तकनीक से बनेगा, जिसमें मजबूत फाउंडेशन, बेहतर डिजाइन और उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री का इस्तेमाल होगा। नया पुल न केवल वर्तमान यातायात को संभालेगा, बल्कि भविष्य में बढ़ते वाहनों की संख्या को भी आसानी से झेल सकेगा।
लाभ और महत्व
नए पुल के बनने से गोरखपुर और देवरिया के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी। यह मार्ग पूर्वांचल का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और दैनिक आवागमन के लिए इस्तेमाल होता है। पुराने पुल के कारण जाम, हादसे और यात्रा में देरी आम बात थी। नया पुल बनने से समय की बचत होगी, ईंधन की खपत कम होगी और दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
स्थानीय किसान, व्यापारी और छात्रों को सबसे ज्यादा फायदा होगा।
साथ ही, यह विकास कार्य योगी सरकार की इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर देने वाली नीति का हिस्सा है,
जिसमें पूर्वांचल के सड़क नेटवर्क को मजबूत बनाना शामिल है।
निर्माण प्रक्रिया और समयसीमा
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ध्वस्तीकरण के बाद तुरंत नए पुल का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और फंड भी आवंटित हो गए हैं।
अनुमान है कि निर्माण कार्य 18-24 महीनों में पूरा हो जाएगा।
इस दौरान यातायात को सुचारू रखने के लिए टेम्परेरी बैलेंस ब्रिज या अन्य वैकल्पिक रूट का इस्तेमाल किया जाएगा।
विभाग ने आश्वासन दिया है कि काम में कोई देरी नहीं होगी और गुणवत्ता पर पूरा ध्यान दिया जाएगा।