पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर
देवरिया/लखनऊ: पूर्व आईपीएस अधिकारी और आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर देवरिया जिला कारागार से रिहा हो गए हैं। उनकी रिहाई की जानकारी बृहस्पतिवार की सुबह सार्वजनिक हुई। हालांकि, वे बुधवार की रात में ही निकल गए थे। पूर्व आईजी अमिताभ ठाकुर 11 दिसंबर से देवरिया जेल में निरुद्ध थे। विभिन्न मामलों में न्यायालयों से जमानत एवं अन्य विधिक राहत मिलने के बाद 11 फरवरी की शाम सात बजे के बाद उनकी रिहाई हुई।
रिहाई की चुपके से प्रक्रिया
अमिताभ ठाकुर की रिहाई जेल प्रशासन ने बेहद गोपनीय तरीके से की। जेल सूत्रों के अनुसार, बुधवार शाम 7 बजे के बाद सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें रिहा किया गया। जेल के बाहर कोई भीड़ या समर्थक नहीं थे, जिससे रिहाई की खबर तुरंत नहीं फैली। ठाकुर के करीबी सहयोगियों ने बताया कि रिहाई के बाद वे सीधे लखनऊ की ओर रवाना हो गए। रिहाई की कोई आधिकारिक घोषणा या प्रेस नोट जारी नहीं किया गया, जिससे यह प्रक्रिया और भी गोपनीय बनी रही।
निरुद्ध होने का कारण और जमानत
अमिताभ ठाकुर को 11 दिसंबर 2025 को देवरिया में विभिन्न मामलों में गिरफ्तार किया गया था। इनमें मुख्य रूप से धारा 153A, 295A और अन्य धाराओं के तहत मामले शामिल थे, जो सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने से जुड़े थे। ठाकुर ने इन आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध बताया था। उनके खिलाफ कई राज्यों में कुल 20 से अधिक मामले दर्ज थे, जिनमें से अधिकांश में उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी थी। अंतिम जमानत 11 फरवरी को मिलने के बाद जेल प्रशासन ने रिहाई की प्रक्रिया पूरी की।
आजाद अधिकार सेना और ठाकुर की सक्रियता
अमिताभ ठाकुर आजाद अधिकार सेना के माध्यम से लंबे समय से सामाजिक न्याय, पुलिस सुधार, भ्रष्टाचार विरोध और अल्पसंख्यक-दलित अधिकारों के मुद्दों पर आवाज उठाते रहे हैं। उनकी गिरफ्तारी के दौरान सेना के कार्यकर्ताओं ने कई विरोध प्रदर्शन किए थे। रिहाई के बाद ठाकुर ने कहा कि वे अब और मजबूती से अपने संघर्ष को जारी रखेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पर संदेश दिया, “सत्य की जीत होती है, जेल की दीवारें नहीं रोक सकतीं।”
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
ठाकुर की रिहाई उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गई है। कई लोग इसे न्याय की जीत मान रहे हैं,
जबकि कुछ इसे राजनीतिक दबाव का परिणाम बता रहे हैं। देवरिया जेल प्रशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं कि
रिहाई इतनी गोपनीय क्यों रखी गई। ठाकुर के समर्थक इसे उनकी सुरक्षा के लिए जरूरी बता रहे हैं
, क्योंकि रिहाई के समय किसी भीड़ या विरोध की आशंका थी।
आगे क्या?
रिहाई के बाद अमिताभ ठाकुर की अगली योजनाओं पर सबकी नजरें टिकी हैं।
वे लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं,
जहां वे अपने मामलों और भविष्य की रणनीति पर बात करेंगे। आजाद अधिकार सेना के
कार्यकर्ताओं में उत्साह है और वे राज्यव्यापी अभियान की तैयारी कर रहे हैं। यह रिहाई
उत्तर प्रदेश में सामाजिक कार्यकर्ताओं और पूर्व अधिकारियों के संघर्ष को नई ऊर्जा दे सकती है।
अमिताभ ठाकुर की रिहाई एक बार फिर साबित करती है कि न्यायिक प्रक्रिया अंततः
अपना काम करती है। फिशरमैन वर्ल्ड न्यूज इस मामले पर आगे के अपडेट्स देता रहेगा।
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