समाजवादी पार्टी (सपा) के कद्दावर नेता, पूर्व मंत्री और रामपुर के विधायक आज़म खान को लगभग 23 महीने बाद जेल से रिहाई मिल गई। 22 अक्टूबर 2023 से वह सीतापुर जिला कारागार में बंद थे। मंगलवार दोपहर करीब 12:15 बजे जेल से बाहर आते ही उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। सीतापुर से रामपुर तक कार्यकर्ताओं ने उत्साह और जोश के साथ उनका स्वागत किया।
लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मिली राहत
आजम खान के खिलाफ रामपुर समेत विभिन्न थानों में कुल 104 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें से कई मामलों में उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी थी, लेकिन कुछ मामलों में अदालती प्रक्रिया लंबी चलने के कारण उन्हें जेल से बाहर आने में देर हुई। उनके अधिवक्ताओं की लगातार पैरवी और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई याचिकाओं के बाद अंततः उन्हें राहत मिली।
जेल से बाहर आने का पल
सीतापुर जेल के गेट पर मंगलवार को जैसे ही घड़ी की सुई 12:15 पर पहुंची, आजम खान गाड़ी से बाहर निकले। समर्थकों ने फूलों की वर्षा की, नारे लगाए और उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। गाड़ियों का काफिला रामपुर की ओर बढ़ा। शाम लगभग 5:30 बजे जब आजम अपने रामपुर स्थित घर पहुंचे, तो पहले से मौजूद हजारों समर्थकों ने उनका ज़ोरदार स्वागत किया।
कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर
रामपुर समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में आजम खान की रिहाई को लेकर कार्यकर्ताओं में गहरा उत्साह देखने को मिला। कई जगह ढोल-नगाड़ों की थाप पर जश्न मनाया गया। मिठाई बांटी गई और समर्थकों ने इसे सपा की मजबूती का संकेत बताया।
विरोधियों पर हमला
आजम खान ने जेल से बाहर आते ही विरोधियों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “अन्याय और अत्याचार का समय अब खत्म होना चाहिए। जो मेरे साथ हुआ वह लोकतंत्र पर हमला है। लेकिन सच की जीत होती है और झूठ हारता है।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।
सपा संस्थापक सदस्य
आजम खान समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। 1980 के दशक में उन्होंने रामपुर से राजनीति की शुरुआत की थी और मुलायम सिंह यादव के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते रहे। लंबे समय तक वे सपा की राजनीति के केंद्रीय चेहरे बने रहे।
अब भी 104 मुकदमे दर्ज
आजम खान की रिहाई के बावजूद उनकी मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। रामपुर और आसपास के जिलों में उनके खिलाफ कुल 104 मामले दर्ज हैं। इनमें से 93 केस रामपुर के अलग-अलग थानों में दर्ज हैं। इनमें जमीन से जुड़े विवाद, सरकारी संपत्ति पर कब्ज़ा और धोखाधड़ी जैसे मामले शामिल हैं।
रामपुर में दर्ज मुकदमे – 93
जिला रामपुर से बाहर के मामले – 11
फैसला सुनाया जा चुका – 12
अभी विचाराधीन मुकदमे – 81
इन मामलों की अगली सुनवाई आने वाले महीनों में होगी।
भविष्य की रणनीति
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि आजम खान की रिहाई का असर प्रदेश की राजनीति पर पड़ेगा। सपा पहले ही आगामी चुनाव की तैयारियों में जुटी है और आजम खान के आने से मुस्लिम समाज में सपा की पकड़ और मज़बूत होगी। हालांकि, उनके खिलाफ दर्ज मामलों को देखते हुए राजनीतिक भविष्य को लेकर संशय भी बना हुआ है।
परिवार की भूमिका
आजम खान के परिवार ने उनकी अनुपस्थिति में सक्रिय राजनीति संभाली। उनकी पत्नी तजीन फातिमा और बेटा अब्दुल्ला आजम लगातार उनके समर्थन में खड़े रहे। अब रिहाई के बाद आजम खान खुद राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय होंगे।
न्यायपालिका में भरोसा
आजम खान ने जेल से बाहर आने के बाद कहा –
“मैंने हमेशा न्यायपालिका का सम्मान किया है। अदालत ने मुझे न्याय दिया। यह मेरे लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र के लिए जीत है। मैं अपने समर्थकों और शुभचिंतकों का आभारी हूं जिन्होंने मेरा साथ कभी नहीं छोड़ा।”
समर्थकों का संदेश
समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कहा कि आजम खान की रिहाई सपा के लिए नई ऊर्जा लेकर आई है। उन्होंने इसे लोकतंत्र की जीत बताया और कहा कि प्रदेश की जनता अन्याय और दमनकारी नीतियों के खिलाफ खड़ी है।
निष्कर्ष
आजम खान की रिहाई न सिर्फ एक नेता की व्यक्तिगत आज़ादी है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत भी मानी जा रही है। आने वाले चुनावों में उनका क्या रोल रहेगा और मुकदमों का क्या नतीजा निकलेगा, यह समय ही बताएगा। लेकिन 23 महीने जेल में रहने के बाद उनकी वापसी ने सपा कार्यकर्ताओं में जोश और ऊर्जा भर दी है।