गोरखपुर में सरकारी एंबुलेंस सेवा को लेकर हाल ही में कई खबरें आई हैं, जिनमें कड़ाई और नियंत्रण बढ़ाने के बाद भी इस क्षेत्र में मरीज माफिया की सक्रियता और सरकारी एंबुलेंस के गलत उपयोग की शिकायतें सामने आ रही हैं।
गोरखपुर में 108 और 102 नंबर की सरकारी एंबुलेंसें निःशुल्क संचालित होती हैं, जिनका मकसद मरीजों को त्वरित और मुफ्त सेवा देना है। जिले में इन नंबरों पर कुल लगभग 96 एंबुलेंस चल रही हैं।
हाल ही में 65 नई एंबुलेंस भी मिली हैं, जिससे इस सेवा का विस्तार हुआ है।इन एंबुलेंसों की संख्या बढ़ाने के बावजूद, कई जगह इस सेवा का गलत फायदा उठाने की घटनाएं सामने आ रही हैं।
कुछ सरकारी एंबुलेंस चालक मरीजों को अस्पताल तक छोड़ने की बजाय निजी अस्पतालों की ओर ले जाकर कमीशन लेते पाए गए हैं। कभी-कभी मरीज माफिया और बिचौलिये भी इस खेल में शामिल होते हैं, जो सरकारी एंबुलेंस के इस्तेमाल से कमीशन कमाते हैं।
इसका एक कारण यही माना जा रहा है कि सरकारी एंबुलेंस का गलत उपयोग करके ज्यादा कमाई हो रही है, इसलिए यह गतिविधि बढ़ रही है। यानी जितनी सरकारी एंबुलेंसें अधिक चलाई जा रही हैं, उतनी ही कमाई इससे होने की संभावना बन रही है।
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने इस तरह की मनमानी और घोटाले की शिकायतों के बाद अभियान चलाकर कई संदिग्ध एंबुलेंसों को सीज भी किया है और चालकों के खिलाफ कार्रवाई भी हो रही है।मरीज माफिया और सरकारी नियंत्रणबीआरडी मेडिकल कॉलेज के आसपास मरीजों को सरकारी एंबुलेंस से लेकर निजी अस्पतालों में भर्ती कराने के मामले खूब चर्चा में हैं।
मरीजों और उनके परिजनों को कई बार ऑटो चालक और बिचौलिये बहला-फुसलाकर निजी अस्पतालों में भर्ती करवा देते हैं, जिससे मरीज माफिया को मोटा कमीशन मिलता है।पुलिस और चिकित्सा प्रशासन द्वारा लगातार सुराक्षा व्यवस्था दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जा रही है, लेकिन पूरी तरह नियंत्रण में अभी स्थिति नहीं आई है।
हाल ही में मेडिकल कॉलेज परिसर में गार्डों ने एक सरकारी एंबुलेंस जो मरीज को घर ले जाने की कोशिश कर रही थी, उसे रोककर पुलिस के हवाले कर दिया क्योंकि 108 नंबर की एंबुलेंस का यह प्रयोग नियमों के खिलाफ है।सारांशगोरखपुर में सरकारी एंबुलेंस सेवा विस्तार हुआ है और यह मरीजों को त्वरित और निशुल्क सेवा देने के लिए चलाई जा रही हैं।
परंतु इस सेवा के गलत इस्तेमाल और मरीज माफिया की सक्रियता के कारण, कमीशन के लिए सरकारी एंबुलेंस चलाने की घटना भी सामने आ रही है, जिससे कमाई का खेल भी बढ़ रहा है। इस स्थिति के कारण प्रशासन को एंबुलेंस पर सख्ती करनी पड़ रही है ताकि यह सेवा सही मायने में लाभार्थी तक पहुंचे।
इस पर लगातार निगरानी, जांच और कार्रवाई जारी है ताकि सरकारी एंबुलेंस का दुरुपयोग न हो और मरीजों को सही समय पर बेहतर इलाज मिल सके।यह पूरा मामला गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज और उसके आसपास के क्षेत्र से जुड़ा है जहां मरीजों की खरीद-फरोख्त और एंबुलेंस माफिया की सक्रियता पर बार-बार कार्रवाई की जा रही है