नई दिल्ली, 25 नवंबर 2025: सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए आज का दिन इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों से लिखा जाएगा। अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर पर आज ध्वजारोहण का शुभ कार्य संपन्न होगा। यह घटना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है,
बल्कि ज्योतिषीय संयोगों से भी ओत-प्रोत है। राम मंदिर का निर्माण, जो लंबे संघर्ष के बाद साकार हुआ, अब पूर्ण रूप से तैयार है।
पिछले पांच वर्षों से अधिक समय की मेहनत के बाद यह मंदिर भक्तों के लिए खुल चुका है। आज के ध्वजारोहण को विशेष रूप से अभिजीत मुहूर्त में अंजाम दिया जाएगा, जो हिंदू पंचांग का सबसे शुभ काल माना जाता है।
इसके साथ ही आज विवाह पंचमी का पावन पर्व भी है, जिस दिन त्रेतायुग में भगवान राम और माता सीता का विवाह संपन्न हुआ था।
इस दुर्लभ संयोग के बीच मंगलवार का दिन भगवान राम के जन्म और विवाह से जुड़ा होने से और भी खास हो जाता है। आइए, इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं।
अभिजीत मुहूर्त: शुभ कार्यों का सर्वोत्तम समय
हिंदू ज्योतिष शास्त्र में मुहूर्त का विशेष महत्व है। इनमें अभिजीत मुहूर्त को सबसे ऊंचा स्थान प्राप्त है। सरल शब्दों में कहें तो अभिजीत मुहूर्त दिन का
वह स्वर्णिम क्षण होता है, जब ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति अत्यंत अनुकूल रहती है। ज्योतिषियों के अनुसार, यह मुहूर्त दोपहर के आसपास पड़ता है
और इसकी अवधि लगभग 48 मिनट की होती है। इस समय को भगवान विष्णु का सबसे प्रिय काल माना जाता है, क्योंकि विष्णु जी ही संरक्षण और समृद्धि के देवता हैं। प्राचीन ग्रंथों जैसे मुहूर्त चिंतामणि में वर्णित है कि
अभिजीत मुहूर्त में आरंभ किए गए किसी भी कार्य में विघ्न-बाधाएं नहीं आतीं। यह समय नई शुरुआत, विवाह, गृह प्रवेश या मंदिरों के शुभ कार्यों के लिए आदर्श है।
आज अयोध्या के राम मंदिर में ध्वजारोहण का मुहूर्त ठीक 11:45 बजे से 12:29 बजे तक निर्धारित है। इस समय सूर्य देव की किरणें मंदिर के शिखर पर पड़ेंगी, जो एक दैवीय दृश्य पैदा करेगी।
ज्योतिषी गरिमा सिंह बताती हैं, “अभिजीत मुहूर्त में किया गया ध्वजारोहण मंदिर को दैवीय
ऊर्जा से संतृप्त कर देगा। यह न केवल मंदिर की पवित्रता बढ़ाएगा, बल्कि आने वाले वर्षों में यहां
आने वाले भक्तों को विशेष आशीर्वाद प्रदान करेगा।” इस मुहूर्त की पसंद राम मंदिर ट्रस्ट
द्वारा ज्योतिषियों की सलाह पर ली गई है, जो प्रभु राम की जन्म कुंडली से भी मेल खाती है।
दुर्लभ संयोग: मंगलवार का राम से गहरा जुड़ाव
आज का दिन केवल ध्वजारोहण तक सीमित नहीं है; यह कई दुर्लभ ज्योतिषीय
संयोगों का संगम है। सबसे पहले, आज मंगलवार है। क्या आप जानते हैं कि
भगवान राम का जन्म भी मंगलवार को ही चैत्र मास की नवमी तिथि पर हुआ था?
त्रेतायुग में माता कौशल्या ने जिस दिन पुत्र प्राप्ति का आनंद मनाया,
वह भी मंगलवार था। इसी प्रकार, भगवान राम और माता सीता का विवाह विवाह
पंचमी पर मंगलवार को ही संपन्न हुआ।
मंगलवार को हिंदू धर्म में मंगल ग्रह का दिन माना जाता है, जो साहस, शक्ति और विजय का प्रतीक है।
लेकिन राम भक्तों के लिए यह दिन भगवान हनुमान का भी है, जो राम के परम भक्त हैं।
हनुमान जी को मंगलवार का आराध्य कहा जाता है,
क्योंकि उनकी पूजा इस दिन विशेष फलदायी होती है।
यह संयोग इतना दुर्लभ है कि ज्योतिष शास्त्र में इसे ‘राम-मंगल योग’ कहा जा सकता है।
आज की पूजा-अर्चना का फल वैवाहिक सुख, संतान प्राप्ति और पारिवारिक समृद्धि के रूप में मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस योग में मंदिर पर ध्वज फहराने से देश भर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा।
विवाह पंचमी के अवसर पर भक्तों को राम-सीता की कथा का पाठ करने और हनुमान
चालीसा का जाप करने की सलाह दी जाती है। इस संयोग से न केवल अयोध्या में उत्साह व्याप्त है,
बल्कि पूरे भारत में राम भक्त जागरण मचा रहे हैं।
मंदिर ध्वज का आध्यात्मिक महत्व: विजय और शक्ति का प्रतीक
अब सवाल उठता है कि मंदिर के शिखर पर ध्वज क्यों फहराया जाता है? यह केवल सजावट नहीं,
बल्कि गहन आध्यात्मिक परंपरा का हिस्सा है।
वास्तु शास्त्र और अग्नि पुराण में वर्णित है कि ध्वज देवता की उपस्थिति का संकेत है।
यह सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है और नकारात्मक शक्तियों को दूर भगाता है।
राम मंदिर के संदर्भ में यह ध्वज भगवान राम की विजय का प्रतीक होगा,
जो रावण पर उनकी जीत की याद दिलाएगा। ध्वज को पवित्र सामग्री से बनाया जाता है,
जिसमें रेशम, सोना-चांदी के तार और विशेष मंत्रों का प्रयोग होता है।
फहराते समय विशेष मंत्रोच्चार के साथ पूजा की जाती है।
इस ध्वजारोहण से राम मंदिर का वैभव और बढ़ जाएगा। मंदिर के मुख्य पुजारी ने बताया,
“यह ध्वज भक्तों को एकजुट करेगा और प्रभु राम के आदर्शों को जीवंत रखेगा।”
पर्यावरण के लिहाज से भी यह ध्वज जैविक रंगों से रंगा गया है, जो सनातन मूल्यों का प्रतीक है।