राजकपूर निषाद जी, फिशरमैन आर्मी उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में निषाद समाज के लिए प्रेरक नेतृत्व का प्रतिमान हैं। उन्होंने सदैव समाज की एकता, अधिकार और पहचान के लिए संघर्ष किया है। उनके जीवन में समर्पण, नेतृत्व शक्ति, और अपने समुदाय के उत्थान के लिए की गई अथक तपस्या निषाद समाज सहित समूचे प्रदेश के लिए प्रेरणा का स्रोत है
सामाजिक संघर्ष और सफलता
राजकपूर निषाद जी ने अपने नेतृत्व में आर्थिक, शैक्षिक, और सामाजिक स्तर पर निषाद समाज को मजबूत करने के लिए अनेक प्रयास किए हैं उन्होंने निषाद समाज के बच्चों की शिक्षा के लिए अनेक जागरूकता अभियान चलाए, जिससे आज समाज में शिक्षा का स्तर बढ़ रहा है। उन्होंने सदैव मछुआरा समुदाय की पारंपरिक पहचान को राष्ट्र निर्माण से जोड़ा और “अपना दीपक स्वयं बने” जैसे आदर्श वाक्य से समाज को आत्मनिर्भरता की प्रेरणा दी
ऐतिहासिक चेतना और सांस्कृतिक गर्व
राजकपूर निषाद जी हमेशा निषाद समुदाय की प्राचीन गौरवशाली परंपरा का स्मरण कराते हैं। वे रामायणकालीन निषादराज गुह, महर्षि बाल्मीकि, एवं वेदव्यास जैसे ऐतिहासिक महानुभावों को समाज के आदर्श बताते हैं
। उनके नेतृत्व में गंगा, यमुना की तराई में बसे निषाद समुदाय के लोग सांस्कृतिक कार्यक्रमों और उत्सवों का आयोजन कर रहे हैं, जिससे सामाजिक एकता और आत्मसम्मान को दृढ़ किया जा रहा है।
दीपदानोत्सव दिवस – प्रेरणा और जागरूकता
दीपदानोत्सव दिवस के अवसर पर राजकपूर निषाद जी ने समाज को ज्ञान, समरसता और नई चेतना की ज्योति जलाने का आह्वान किया। यह पर्व न केवल बौद्धिक और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक है, बल्कि त्यसमें समाज के हर व्यक्ति को आत्मगौरव से भरने का संदेश निहित है उनके अनुसार, जैसे दीप रात्रि के अंधकार को दूर करता है, वैसे ही शिक्षा और संगठन समाज के जीवन में उजियारा ला सकते हैं।
निषाद समाज की भूमिका और भविष्य
उनकी सोच के केंद्र में समाज के सबसे कमजोर वर्गों को संगठित करना और संविधान प्रदत्त अधिकार दिलाने का संकल्प है। राजकपूर निषाद जी मानते हैं कि निषाद समाज के आर्थिक और राजनीतिक उत्थान के लिए व्यापक स्तर पर संगठन, प्रशिक्षण और प्रतिनिधित्व जरूरी है। उन्होंने सदैव सशक्त नेतृत्व और सहभागिता को आगे बढ़ाया है, जिससे समाज की हर पीढ़ी देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।
प्रेरक विचार और आदर्श
राजकपूर निषाद जी का जीवन उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो कठिनाइयों के बावजूद अपने समुदाय और देश के लिए कुछ बड़ा करना चाहते हैं। वे गहरी मानवीय संवेदनाओं, समाज-सुधार की दृढ़ता और नेतृत्व की जिम्मेदारी का अनुपम उदाहरण हैं। उनकी सोच ने निषाद जाति को भेदभाव से ऊपर उठकर नई दिशा में अग्रसर किया है
सामाजिक एकता की अपील
राजकपूर निषाद जी सदैव यह संदेश देते हैं कि निषाद समाज उपजाति, कुरी, गौत्र जैसे छोटे-छोटे भेदभाव को दूर कर एकजुट रहे। वे हर स्तर पर समाज को संगठित कर समृद्ध और सम्मानित बनाना चाहते हैं। उनका मानना है कि समाज के सभी वर्ग मिलकर ही बदलाव और अधिकार की नई रोशनी ला सकते हैं।
निषाद समाज का धर्म, संस्कृति और सामाजिक उत्तरदायित्व
राजकपूर निषाद जी धर्म और संस्कृति के सच्चे संवाहक हैं। उन्होंने समाज को बौद्ध धम्म की चेतना से जोड़कर समता, प्रेम और करुणा के मूल्यों को मजबूत किया है। उनके सहयोग से निषाद समाज ने सामाजिक आंदोलनों, त्यौहारों, और प्रशासकीय अधिकार की लड़ाई में अभूतपूर्व एकता दिखाई है।