मान्यवर कांशीराम जयंती के अवसर पर देशभर में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें सामाजिक न्याय, समानता और संविधान की रक्षा के संकल्प को दोहराया गया। इस खास अवसर पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Rahul Gandhi मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके आगमन से कार्यक्रम में विशेष ऊर्जा और उत्साह देखने को मिला। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि मान्यवर कांशीराम ने समाज के दबे-कुचले और वंचित वर्गों को आवाज दी और उन्हें मुख्यधारा में लाने का ऐतिहासिक कार्य किया।
कांशीराम जयंती पर राहुल गांधी का बड़ा बयान, बोले – “समानता के बिना विकास अधूरा”
कांशीराम जयंती केवल एक स्मरण दिवस नहीं बल्कि सामाजिक चेतना का प्रतीक है। इस दिन लोग उनके विचारों और संघर्षों को याद करते हुए समाज में समानता और न्याय स्थापित करने का संकल्प लेते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि आज भी देश में सामाजिक असमानता और भेदभाव की चुनौतियां मौजूद हैं, जिन्हें खत्म करने के लिए हमें एकजुट होकर काम करना होगा। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे कांशीराम के आदर्शों को अपनाएं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए आगे आएं।
कांशीराम जयंती समारोह में राहुल गांधी मुख्य अतिथि, दलित समाज को दिया बड़ा संदेश
कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और युवाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। मंच से वक्ताओं ने कांशीराम के जीवन और उनके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने बहुजन समाज को संगठित कर उन्हें राजनीतिक पहचान दिलाई। राहुल गांधी ने अपने भाषण में संविधान की रक्षा को सबसे बड़ी जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि जब तक हर व्यक्ति को समान अधिकार और अवसर नहीं मिलेंगे, तब तक देश का विकास अधूरा रहेगा।
संविधान बचाना है तो एकजुट हों” – कांशीराम जयंती पर राहुल गांधी का जोरदार संबोधन
इस अवसर पर कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जिसमें लोकगीत, नाटक और भाषण प्रतियोगिता शामिल थीं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाना और कांशीराम के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना था। राहुल गांधी ने कहा कि देश की असली ताकत उसकी विविधता और एकता में है, और हमें इसे बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए।
कांशीराम जयंती पर गरजे राहुल गांधी, सामाजिक न्याय को लेकर कही बड़ी बात
अंत में उन्होंने सभी लोगों से अपील की कि वे सामाजिक समरसता और भाईचारे को मजबूत करें और कांशीराम के सपनों का भारत बनाने में अपना योगदान दें। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ और उपस्थित लोगों ने सामाजिक न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
