फिशरमैन आर्मी की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने विगत दिनों कई बार सोशल मीडिया के जरिए एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) और सरकार के सभी विभागों को आमी नदी के प्रदूषण की गंभीर जानकारी मुहैया कराई। फेसबुक, ट्विटर (एक्स) और इंस्टाग्राम पर वीडियो, फोटो और रिपोर्ट शेयर की गईं, लेकिन अभी तक किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं हुई। नदी किनारे बसे गांवों में कैंसर, फेफड़े की बीमारियां और अन्य रोग फैलते जा रहे हैं। अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि अगर तत्काल कदम नहीं उठे, तो जन अभियान और तेज होगा। यह उदासीनता ग्रामीणों की जिंदगियों पर सवाल खड़े कर रही है।
आमी नदी के किनारे बसे गांवों में प्रदूषण का कहर मच रहा है।
फिशरमैन आर्मी की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने हाल ही में एचटी (हिंदुस्तान टाइम्स) से नाराजगी जताते हुए एक बड़ा जन अभियान चलाने की प्रतिज्ञा ली है। नदी के जल को जहरीला बनाने वाले कारखानों और अपशिष्टों से ग्रामीण कैंसर, फेफड़े की बीमारियों और अन्य जटिल रोगों का शिकार हो रहे हैं। यह अभियान न केवल सरकार की जिम्मेदारी को उजागर करता है, बल्कि नदी किनारे रहने वाले हर व्यक्ति को अपनी और अपनी आने वाली पीढ़ियों की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान करता है। फिशरमैन आर्मी सभी ग्रामीणों से निवेदन कर रही है कि अधिक से अधिक संख्या में इसमें भाग लें।
फिशरमैन आर्मी का जन अभियान: चंद्रभान निषाद की अगुवाई
फिशरमैन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रभान निषाद ने इस समस्या को गंभीरता से उठाया है। उन्होंने विगत दिनों फेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर कई वीडियो, फोटो और रिपोर्ट शेयर कीं, जिसमें नदी के भयानक प्रदूषण का सबूत दिया गया। एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) और संबंधित सरकारी विभागों को बार-बार जानकारी मुहैया कराई गई, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
अध्यक्ष चंद्रभान निषाद ने हिंदुस्तान टाइम्स को दिए बयान में नाराजगी जताते हुए कहा, “हम चुप नहीं बैठेंगे। अगर तत्काल कदम नहीं उठे तो जन अभियान और तेज होगा।” फिशरमैन आर्मी ने “मां आमी बचाओ यात्रा” शुरू की है, जिसमें नदी को जहरमुक्त करने की मांग की जा रही है। संगठन जनशक्ति सेना के साथ मिलकर सफाई अभियान, जागरूकता और कानूनी लड़ाई पर फोकस कर रहा है।
अभियान के मुख्य बिंदु और अपील
फिशरमैन आर्मी का जन अभियान निम्नलिखित गतिविधियों पर केंद्रित है:
- जल परीक्षण शिविर – हर गांव में मुफ्त पानी जांच, रिपोर्ट एनजीटी और कोर्ट में पेश।
- स्वच्छता अभियान – प्लास्टिक हटाओ, पेड़ लगाओ, नदी किनारे सफाई।
- कानूनी लड़ाई – प्रदूषण फैलाने वाले कारखानों पर मुकदमा और सख्त कार्रवाई।
- स्वास्थ्य कैंप – मुफ्त चेकअप, दवाएं और जागरूकता।
संगठन मछुआरों, किसानों, महिलाओं और युवाओं से अपील कर रहा है कि वे बड़ी संख्या में शामिल हों। यह सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि लाखों लोगों की जान-माल और आने वाली पीढ़ियों की रक्षा का सवाल है।
सरकार और एनजीटी की जिम्मेदारी
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हाल ही में आमी नदी के पानी के नमूने लिए हैं
और शासन गंभीरता दिखा रहा है।
लेकिन एनजीटी के पुराने आदेशों का पालन नहीं हो रहा। उद्योग लॉबी के आगे सरकार कमजोर पड़ रही है।
फिशरमैन आर्मी का कहना है कि नदी किनारे लाखों लोग खतरे में हैं – पीने का पानी, मछली, सब जहरीला।
अगर अब नहीं चेते तो आने वाली पीढ़ियां कैंसर जैसी बीमारियों से जूझेंगी।
अब समय है एकजुट होने का
आमी नदी प्रदूषण एक चुपके से फैल रहा महामारी है। फिशरमैन आर्मी के अध्यक्ष चंद्रभान निषाद का
जन अभियान उम्मीद की किरण है। सभी ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों को आगे आना होगा। नदी बचाओ – जीवन बचाओ।
सरकार से मांग है कि तत्काल सख्त कार्रवाई करे, अन्यथा जन आंदोलन और तेज होगा।